22 अप्रैल 2025… यह वो तारीख है, जिसे इंदौर का नथानियल परिवार शायद कभी नहीं भूल पाएगा। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में सुकून तलाशने निकले इस परिवार की जिंदगी उसी दिन बिखर गई थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस दिन की चीखें आज भी इस परिवार के दिलों में गूंजती हैं।
घाटी में बहा खून वक्त के साथ भले ही मिट गया हो, लेकिन इंदौर के सुशील नथानियल के घर में आज भी उस दर्द की गूंज सुनाई देती है। यह हमला सिर्फ एक घटना नहीं था, बल्कि एक बेटे के सपनों और एक पत्नी की पूरी दुनिया को खत्म कर देने वाला हादसा था।
“अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती…”
सुशील के बेटे ऑस्टिन आज भी उस दिन को याद कर कांप उठते हैं। वे बताते हैं,
“पापा का सपना था कि वे इंदौर आकर मुझे विदेश पढ़ने भेजेंगे। सब कुछ तय था… लेकिन उस दिन अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती, तो शायद मैं पापा के साथ होता… और शायद कहानी कुछ और होती।”
ऑस्टिन की आंखों में आज भी उस दिन की तस्वीरें किसी डरावने सपने की तरह घूमती हैं।

दूसरों की जान बचाते हुए खुद शहीद हो गए
परिवार और चश्मदीदों के मुताबिक, जब हमला हुआ तो सुशील खुद बचने के बजाय वहां फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। यही उनका स्वभाव था—दूसरों की मदद करना।
ऑस्टिन बताते हैं कि पापा उन्हें फोन करने वाले थे, लेकिन पास खड़े एक व्यक्ति ने मना किया कि फोन की आवाज आतंकियों को आकर्षित कर सकती है।
सुशील ने कई लोगों को सुरक्षित निकाल दिया, लेकिन जब उनकी बारी आई, तो आतंकियों की गोली ने उनके सपनों को खत्म कर दिया।
एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म
सुशील की पत्नी जेनिफर आज भी उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई हैं। उनकी आंखों के आंसू अब तक नहीं सूखे हैं।
घर का माहौल आज भी खामोश है, और हर छोटी आवाज उन्हें उस दिन की गोलियों की याद दिला देती है।
अब बेटे ऑस्टिन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने करियर से ज्यादा अपनी मां को संभालने की है।

अधूरे रह गए सपने
परिवार के मुताबिक, सुशील हमेशा कहते थे कि इंदौर में सुकून से रहेंगे और बेटे को अच्छी पढ़ाई दिलाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जिस कश्मीर को वे सुकून की तलाश में गए थे, वहीं से उनकी लाश वापस लौटी।
आज एक साल बाद भी यह परिवार सिर्फ इंसाफ का इंतजार कर रहा है।
परिवार के बारे में
- जेनिफर नथानियल – खातीपुरा के सरकारी स्कूल में टीचर
- बेटी आकांक्षा – सूरत में बैंक ऑफ बड़ौदा में ऑफिसर
- बेटा ऑस्टिन – बैडमिंटन खिलाड़ी
- परिवार मूल रूप से अलीराजपुर (जोबट) का रहने वाला है
ऐसे बना था कश्मीर ट्रिप का प्लान
ऑस्टिन ने बताया कि पहले कहीं और जाने का प्लान था, लेकिन पापा के काम के चलते तारीखें नहीं मिल पा रही थीं।
फिर तय हुआ कि ईस्टर सूरत में मनाया जाएगा और वहीं से घूमने जाएंगे।
इंदौर से सूरत पहुंचकर परिवार ने दो दिन साथ बिताए और फिर कश्मीर जाने का प्लान बना।
सूरत से वे चंडीगढ़ पहुंचे, शॉपिंग की और फिर कश्मीर के लिए रवाना हुए। पूरा परिवार इस ट्रिप को लेकर बेहद उत्साहित था।
ऑस्टिन ने इस यात्रा के हर पल को फोटो और वीडियो में कैद किया था—लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये यादें जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएंगी।
👉 देश-विदेश की ऐसी ही संवेदनशील और सच्ची खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com


