जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। प्राथमिक जांच में खराब मौसम के अलर्ट को नजरअंदाज करना हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। इस बीच मृतकों के शवों के साथ हुई लापरवाही ने सिस्टम पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
फ्लाइट ऑपरेटर ने शव ले जाने से किया इनकार
हादसे में जान गंवाने वाले आर्डनेंस फैक्ट्री कर्मचारी कामराज आर और उनके 5 साल के बेटे श्रीतमिल के शव को फ्लाइट से ले जाने से ऑपरेटर ने इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि शवों से बदबू आ रही है और वे डीकंपोज हो रहे हैं।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हुआ रवाना
मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तुरंत अधिकारियों को एयरपोर्ट भेजा।
- शवों पर स्प्रे किया गया
- कॉफिन को दोबारा सील किया गया
इसके बाद करीब एक घंटे की देरी से फ्लाइट त्रिची के लिए रवाना हो सकी।
मौसम के कारण पहले भी टली उड़ान
रविवार को खराब मौसम के कारण फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी थी। एम्बुलेंस से शव एयरपोर्ट ले जाए गए थे, लेकिन विमान लैंड न कर पाने के कारण उन्हें वापस अस्पताल लाना पड़ा।
हादसे में 13 लोगों की मौत
30 अप्रैल को हुए इस हादसे में:
- 13 पर्यटकों की मौत
- 28 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
- मृतकों में 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल
एक ही परिवार में तीन मौतें
कामराज मूल रूप से तमिलनाडु के त्रिची के रहने वाले थे। इस हादसे में उनकी पत्नी और छोटे बेटे की भी मौत हो गई। परिवार में अब केवल बड़ा बेटा ही बचा है।
यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि हादसे के बाद राहत और संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल उठाती है।
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