मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में जल संकट गहराता जा रहा है। मानपुरा, पचामा समेत आधा दर्जन गांवों की महिलाएं पिछले चार दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। सिस्टम की अनदेखी से नाराज महिलाओं ने अब अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए PHE विभाग के अधिकारियों का पुतला बनाकर सूखे हैंडपंप और पेड़ों से बांध दिया।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मानपुरा, जामिनी, अमरूद और पचामा गांवों में कई हफ्तों से पानी की भारी समस्या बनी हुई है। बावजूद इसके, प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।
मटका फोड़ से पुतला बांधने तक पहुंचा आंदोलन
महिलाओं का प्रदर्शन अब तेज होता जा रहा है। पहले मटका फोड़कर विरोध किया गया, अब पुतलों को जंजीरों से बांधकर और पेड़ों पर लटकाकर आक्रोश जताया जा रहा है।
किसान नेता एमएस मेवाडा के नेतृत्व में ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल भोपाल भी गया था, जहां मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित मंत्री से शिकायत की गई थी। निर्देश मिलने के बावजूद एक महीने बाद भी नलकूप खनन शुरू नहीं हुआ।
जनसुनवाई में भी नहीं मिली राहत
करीब 15 दिन पहले महिलाएं कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में भी पहुंची थीं, लेकिन वहां भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
क्या है मुख्य मांग?
- गांवों में तुरंत नए नलकूप (बोर) का खनन
- सूखे हैंडपंपों को चालू करना
- नियमित जल आपूर्ति की व्यवस्था
उग्र आंदोलन की चेतावनी
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बोरिंग मशीन गांव नहीं पहुंची, तो आंदोलन और उग्र होगा। उनका कहना है कि “जब तक पानी नहीं मिलेगा, तब तक घर नहीं जाएंगे।”
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, जो हर साल गर्मी के मौसम में सामने आती है।
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