मध्य प्रदेश के खंडवा में जनजातीय कार्य विभाग में कथित तबादला घोटाले और अवैध वसूली के मामले में सस्पेंड अधीक्षक हेमंत सिन्हा पर अब शिकंजा कसता जा रहा है।
मामले के सामने आने के बाद इंदौर कमिश्नर ने सख्त जांच के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने बनाई 2 सदस्यीय जांच टीम
कमिश्नर के आदेश पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है।
इस टीम को 2 दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच टीम में शामिल हैं:
- अभय भटोरे (नायब तहसीलदार)
- महिपाल सोलंकी (सहायक कोषालय अधिकारी)

क्या हैं आरोप?
मामला जिले के 125 छात्रावासों से जुड़े अधीक्षकों से अवैध वसूली का है।
आरोप है कि हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक वसूले जाते थे।
इसके अलावा:
- ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले पैसे लिए गए
- रकम ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर कराई गई
- हेमंत सिन्हा ने बिचौलिए की भूमिका निभाई
बैंक डिटेल और UPI रिकॉर्ड मांगे गए
जांच को निष्पक्ष रखने के लिए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि:
- हेमंत सिन्हा और उनके बेटे के बैंक खातों की जानकारी दी जाए
- पिछले 3 महीने का पूरा ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड जांच टीम को सौंपा जाए
61 ट्रांसफर आदेश रद्द, पहले ही हुआ सस्पेंशन
मामले के उजागर होने के बाद:
- 61 ट्रांसफर और पोस्टिंग आदेश निरस्त किए गए
- हेमंत सिन्हा को सस्पेंड कर दिया गया
जयस ने भी उठाए सवाल
जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) ने भी इस मामले में शिकायत की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि:
- प्रमोशन के नाम पर 5 से 10 हजार रुपए वसूले गए
- 61 संस्थानों में वित्तीय गड़बड़ी हुई
- 50 से ज्यादा शिक्षकों को अनधिकृत रूप से अटैच किया गया
पहले भी विवादों में रह चुके अधिकारी
रिटायर सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।
लोकायुक्त छापे में उनके पास करीब 6.5 करोड़ की संपत्ति सामने आई थी।
इसके अलावा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी एक मामले में उन्हें फटकार लगाई थी।
अब आगे क्या?
जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है।
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