Sehore जिला अस्पताल से गुरुवार को एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई। एक पिता अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकला। बच्ची का शव पिछले चार दिनों से अस्पताल की मर्चुरी में रखा हुआ था।
पिता रवि रघुवंशी का आरोप है कि 70 हजार रुपए के कर्ज के कारण एक किसान ने उसे बंधक बनाकर रखा था। इसी वजह से वह बेटी की मौत के बाद भी अस्पताल नहीं पहुंच सका।
जुड़वां बहनों में से एक थी बच्ची
जानकारी के मुताबिक 24 मार्च को रवि और अंजलि रघुवंशी के यहां जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ था। जन्म के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई थी।
दूसरी बच्ची बेहद कमजोर हालत में पैदा हुई थी। उसका वजन सिर्फ 1.4 किलो था। बच्ची प्रीमैच्योर थी, इसलिए उसे जिला अस्पताल के ICU में भर्ती किया गया था।
करीब 40 दिनों तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया, लेकिन 3 मई को उसकी मौत हो गई।
चार दिन तक नहीं पहुंचे परिजन
बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, परिवार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
चार दिन तक कोई शव लेने नहीं पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ढूंढकर लाई माता-पिता को
पुलिस पहले आष्टा तहसील के हकीमाबाद गांव पहुंची, जहां परिवार का घर है। वहां पता चला कि दंपती मजदूरी करने देवास जिले के जालेरिया गांव गए हैं।
इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों को सीहोर लेकर आई। बाद में बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पिता ने लगाया बंधक बनाने का आरोप
पूछताछ में पिता रवि रघुवंशी ने बताया कि वह किसान मनोज जाट के यहां मजदूरी करता था। उस पर करीब 70 हजार रुपए का कर्ज था।
रवि का आरोप है कि किसान ने कर्ज के बदले उसे और उसके साथी को जबरन रोक रखा था। उसने कहा कि उसे अस्पताल जाने नहीं दिया गया।
रवि ने दावा किया कि अगर वह समय पर अस्पताल पहुंच जाता, तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मजदूर को जबरन बंधक बनाकर रखा गया था या नहीं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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