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Shubhendu Adhikari News: पहली कैबिनेट बैठक में विकास और सुरक्षा पर बड़ा फोकस

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) की मौजूदगी में हुई इस अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा BSF (सीमा सुरक्षा बल) को जमीन आवंटन को लेकर हुए निर्णय की हो रही है।

सरकार ने साफ कर दिया है कि BSF को जरूरी जमीन अगले 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सीमा सुरक्षा से जुड़े कामों में किसी तरह की देरी न हो।

BSF Land Allotment पर तेजी, 45 दिन की डेडलाइन तय

कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर लिया गया।

  • BSF को 45 दिनों में जमीन देने का लक्ष्य तय
  • संबंधित विभागों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
  • सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
  • किसी भी तरह की फाइल पेंडेंसी खत्म करने की बात

इस निर्णय को सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Development और Governance पर भी बड़ा फोकस

बैठक में केवल BSF ही नहीं, बल्कि राज्य के विकास और प्रशासन से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई:

  • सरकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने का फैसला
  • विभागों के बीच बेहतर coordination पर जोर
  • जनता से जुड़े कामों को प्राथमिकता देने की रणनीति
  • लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश

सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इन फैसलों का असर जमीनी स्तर पर दिखेगा।

Politics में हलचल तेज, विपक्ष भी नजर बनाए हुए

इन फैसलों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इस पर नजर रखे हुए हैं कि सरकार अपने वादों और फैसलों को कितनी तेजी से लागू करती है।

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Yukta

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PM Modi

PM Modi की अपील का असर त्रिपुरा में 50% कर्मचारी ऑफिस आएंगे, Goa-Andhra में घटा काफिला

देश में बढ़ती बिजली खपत और अंतरराष्ट्रीय तेल संकट के बीच PM Modi की ऊर्जा बचाने की अपील का असर अब राज्यों में साफ नजर आने लगा है। केंद्र सरकार के संकेत के बाद कई राज्यों ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। सरकारी दफ्तरों से लेकर VIP काफिलों तक में कटौती की जा रही है, ताकि आने वाले समय में ऊर्जा संकट का असर कम किया जा सके। 12 राज्यों में शुरू हुआ Power Saving अभियान सूत्रों के अनुसार देश के करीब 12 राज्यों ने ऊर्जा बचत को लेकर नई गाइडलाइन जारी की हैं। सरकारी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि गैरजरूरी बिजली इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और सरकारी वाहनों का उपयोग सीमित किया जाए। कई दफ्तरों में ऑनलाइन मीटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि यात्रा कम हो और पेट्रोल-डीजल की बचत हो सके। वहीं, सरकारी भवनों में अतिरिक्त लाइटिंग और एसी के उपयोग पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। त्रिपुरा सरकार का बड़ा फैसला, सिर्फ 50% कर्मचारी आएंगे ऑफिस ऊर्जा बचत की दिशा में सबसे बड़ा कदम त्रिपुरा सरकार ने उठाया है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि सरकारी दफ्तरों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से बिजली और ईंधन दोनों की बचत होगी। इसके अलावा दफ्तरों में एसी के सीमित इस्तेमाल और बिजली उपकरणों को जरूरत पड़ने पर ही चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। Andhra Pradesh और Goa में छोटा हुआ CM Convoy आंध्र प्रदेश और गोवा सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर बड़ा संदेश दिया है। दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या कम कर दी गई है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि जब सरकार खुद बचत का उदाहरण पेश करेगी, तभी आम लोग भी इस अभियान को गंभीरता से लेंगे। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी VIP मूवमेंट को सीमित किया जा सकता है। सरकारी भवनों में लागू हुई नई Guidelines ऊर्जा बचत के लिए कई राज्यों ने सरकारी कार्यालयों में नई गाइडलाइन लागू की हैं। इनमें शामिल हैं: इन फैसलों का मकसद केवल खर्च कम करना नहीं, बल्कि देश में ऊर्जा संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है। Oil Crisis ने बढ़ाई सरकार की चिंता मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में और सख्त कदम देखने को मिल सकते हैं। आम लोगों से भी की गई अपील सरकार ने नागरिकों से भी बिजली और ईंधन बचाने की अपील की है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने, गैरजरूरी यात्रा से बचने और घरों में बिजली की खपत कम करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटी-छोटी बचत भी देश के लिए बड़ा फर्क ला सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

CBSE 12वीं रिजल्ट 2026: नवोदय और केंद्रीय विद्यालय आगे, निजी स्कूल सबसे पीछे

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा की तस्वीर साफ कर दी है। सरकारी मॉडल पर चलने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि सबसे ज्यादा छात्रों वाले निजी स्कूलों का रिजल्ट सबसे कमजोर रहा। दिलचस्प बात यह है कि निजी स्कूलों की फीस JNV और KV के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भोपाल रीजन देश में 19वें स्थान पर शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, निजी स्कूलों के कमजोर परिणाम का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा। इसी वजह से मध्यप्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 CBSE रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं, हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में लड़कियां करीब 5 प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। नवोदय विद्यालय सबसे आगे Jawahar Navodaya Vidyalaya का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी सफलता की बड़ी वजह है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी बनाए शानदार रिकॉर्ड Kendriya Vidyalaya Sangathan का रिजल्ट भी बेहद मजबूत रहा। शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशिक्षित शिक्षक और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का मुख्य आधार हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया अच्छा प्रदर्शन Eklavya Model Residential Schools (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने बेहतर नतीजे दिए। सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों के बावजूद सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन संतोषजनक है। सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध निजी (इंडिपेंडेंट) स्कूलों में सबसे ज्यादा 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की कमजोर तैयारी और छात्रों पर बढ़ते मानसिक तनाव जैसे कारण निजी स्कूलों के खराब प्रदर्शन की वजह हो सकते हैं। हर श्रेणी में लड़कियां आगे भोपाल रीजन में: शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पढ़ाई और परीक्षा को लेकर गंभीरता छात्राओं की सफलता का प्रमुख कारण है। 12% छात्र सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के नतीजों में एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया। करीब 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में फेल हो गए। विशेषज्ञ इसे स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं। कोविड के बाद पढ़ाई के स्तर में आई गिरावट और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा CBSE रीजन भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े CBSE रीजन में शामिल है। यहां 1291 संबद्ध स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के मामले में यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Portal के साथ।
Sukoon E Musical Evening

Cultural News: ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में गूंजे सदाबहार नगमे, सुरों ने बांधा समां

भोपाल में आयोजित ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में पुराने फिल्मी गीतों और गज़लों की शानदार प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भोपाल शहर के संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम उस वक्त बनी, जब “ख्याल कलाप्रेमियों का” द्वारा आयोजित ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में पुराने सदाबहार गीतों और गज़लों की शानदार प्रस्तुतियों ने माहौल को सुरमयी बना दिया। कार्यक्रम में गायिका Nidhi Sarolkar Parakhi और Shreya Dhanorkar ने अपनी मधुर आवाज़ से श्रोताओं को भावनाओं और संगीत के खूबसूरत सफर पर ले गए। शाम की शुरुआत मशहूर गीत “नाम गुम जाएगा…” से हुई, जिसने शुरुआत से ही दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद “तू है तो दिल धड़कता है”, “हम तेरे प्यार में”, “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, “जब दीप जले आना” और “मेरा साया साथ होगा” जैसे सदाबहार गीतों ने पूरे माहौल को भावुक और रोमांटिक बना दिया। कार्यक्रम में गज़लों और फिल्मी गीतों का भी शानदार संगम देखने को मिला। “आपकी आंखों में कुछ”, “सलोना सा सजन”, “इन आंखों की मस्ती”, “पिया तोसे” और “आज जाने की जिद न करो” जैसी प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। शाम का समापन मराठी गीत “बहरला हा मधुमास” से हुआ, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वाद्य संगीत में भी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। कीबोर्ड पर Karan Murjani, तबले पर Swapnil Bagul और गिटार पर Swapnil Pradhan ने सुरों का बेहतरीन साथ निभाया। कार्यक्रम का संचालन Sanjay Khare ने किया। भोपाल में लगातार हो रहे ऐसे सांस्कृतिक आयोजन यह साबित कर रहे हैं कि शहर में संगीत और कला के प्रति लोगों का जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है।
UP

UP Storm 80kmph की तेज आंधी से तबाही, MP और Rajasthan में भीषण गर्मी

उत्तर भारत में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदली कि कई राज्यों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। UP में तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। अलग-अलग हादसों में 94 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं राजस्थान में भीषण गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश भी तेज गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान से परेशान है। UP में तेज आंधी और बारिश से बिगड़े हालात उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देर रात मौसम अचानक बदल गया। तेज हवाओं के साथ बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों को डरा दिया। मौसम विभाग के अनुसार कई इलाकों में हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। आंधी इतनी तेज थी कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक युवक हवा के दबाव में संतुलन खोता दिखाई दिया। कई जगह पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिरने से घंटों बिजली सप्लाई ठप रही। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और आसपास के जिलों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। सुबह लोगों ने जब घरों से बाहर निकलकर देखा तो सड़कों पर टूटे पेड़ और बिखरा सामान नजर आया। 94 लोगों की मौत, कई घायल तेज तूफान, बिजली गिरने और दीवार गिरने जैसी घटनाओं में अब तक 94 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल हुए हैं और अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। कई परिवार रातभर डर के साये में जागते रहे। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। Rajasthan में Heatwave का Red Alert एक तरफ यूपी में बारिश और तूफान का असर दिखा, वहीं राजस्थान भीषण गर्मी से झुलस रहा है। जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जयपुर समेत कई शहरों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। मौसम विभाग ने Heatwave को लेकर Red Alert जारी किया है। दोपहर के समय सड़कें लगभग खाली नजर आ रही हैं। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की सलाह दी है, क्योंकि लगातार बढ़ती गर्मी से डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। MP में भी बढ़ी गर्मी की मार मध्य प्रदेश में भी गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, रीवा और छतरपुर समेत कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक लू चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने दी ये सलाह मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। उत्तर भारत में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज आने वाले दिनों में भी लोगों की चिंता बढ़ा सकता है। कहीं तूफान का खतरा है तो कहीं गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
होर्मुज

Middle East Tension: होर्मुज स्ट्रेट में फिर जहाज हादसा, गुजरात से जुड़े Cargo Ship के डूबने से बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से एक और बड़ी खबर सामने आई है। गुजरात से जुड़ा एक कार्गो शिप ओमान तट के पास समुद्र में हादसे का शिकार हो गया। जहाज पर मौजूद 14 भारतीय क्रू मेंबर्स को ओमान कोस्टगार्ड ने समय रहते सुरक्षित बचा लिया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं, जिसका असर अब भारतीय जहाजों पर भी दिखाई देने लगा है। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के मुताबिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। इसी दौरान खराब मौसम और तकनीकी दिक्कतों के कारण जहाज का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते जहाज समुद्र में डूबने लगा। घटना की सूचना मिलते ही ओमान की कोस्टगार्ड टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी कोशिशों के बाद सभी 14 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना चिंता का कारण? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत समेत कई देशों का तेल और गैस आयात इसी रास्ते से होकर गुजरता है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस इलाके में ड्रोन गतिविधियां, जहाजों पर हमले और सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए जोखिम भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारतीय जहाजों पर बढ़ी निगरानी इस ताजा हादसे के बाद भारतीय समुद्री एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं, जहाज हादसे में सुरक्षित बचाए गए क्रू मेंबर्स को मेडिकल सहायता और जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा रही है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले बीते कुछ महीनों में होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में कई जहाज हादसों और हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं। कुछ मामलों में तकनीकी खराबी रही, जबकि कुछ घटनाओं में सुरक्षा खतरे की आशंका जताई गई। ताजा घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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