भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सोमवार का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिकी Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 96.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी करीब 2% की तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।
रुपये में आई इस बड़ी गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 1000 अंक तक टूट गया। हालांकि बाद में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली और निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की महंगी कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश से आने वाले कई सामान महंगे हो सकते हैं। इसका असर आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ने की आशंका है। वहीं शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव से छोटे निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए, तो भारतीय बाजारों में आगे भी दबाव बना रह सकता है।
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