पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद अहम इलाका Chicken Neck एक बार फिर चर्चा में है। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस रणनीतिक कॉरिडोर से जुड़े एक अहम प्रशासनिक और सुरक्षा समन्वय को केंद्र सरकार के हवाले करने का फैसला लिया है। इस कदम को सिर्फ सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यापार, परिवहन और विकास के लिहाज से भी बड़ा माना जा रहा है।
क्या है ‘Chicken Neck’ Corridor?
‘चिकन नेक’ या सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल का एक बेहद संकरा भू-भाग है, जिसकी चौड़ाई कई जगहों पर सिर्फ 20-22 किलोमीटर रह जाती है। यही रास्ता भारत के पूर्वोत्तर के 8 राज्यों — असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम — को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है।
इस इलाके के एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश और पास में भूटान व चीन की सीमाएं हैं। इसलिए यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
बंगाल सरकार ने क्या फैसला लिया?
सूत्रों के मुताबिक, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ अहम मामलों में केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे रेलवे, हाईवे, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल संभव होगा।
केंद्र सरकार लंबे समय से इस इलाके में तेज कनेक्टिविटी, सैन्य मूवमेंट और आपातकालीन प्रबंधन को मजबूत करने पर काम कर रही है। अब राज्य सरकार के सहयोग से कई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
8 राज्यों के लिए क्यों है ‘Good News’?
1. बेहतर कनेक्टिविटी
पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाने में अक्सर देरी और ट्रैफिक की समस्या होती है। नए फैसले से सड़क और रेल नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
2. सुरक्षा होगी मजबूत
यह इलाका भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। केंद्र के सीधे समन्वय से सेना और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती और मूवमेंट आसान हो सकेगी।
3. व्यापार और उद्योग को फायदा
पूर्वोत्तर राज्यों में कारोबार करने वाली कंपनियों को तेज लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलेगा। इससे स्थानीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
4. आपदा और इमरजेंसी में राहत
भूस्खलन, बाढ़ या किसी आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी।
चीन और सीमा सुरक्षा के नजरिए से भी अहम
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच चिकन नेक कॉरिडोर की अहमियत और बढ़ गई है। अगर इस इलाके में किसी तरह की बाधा आती है तो पूर्वोत्तर भारत की सप्लाई और संपर्क प्रभावित हो सकता है। इसलिए केंद्र सरकार लंबे समय से यहां मल्टी-लेयर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
विकास परियोजनाओं को मिल सकती है रफ्तार
इस फैसले के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर में नए एक्सप्रेसवे, रेलवे अपग्रेड, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब जैसी परियोजनाओं को तेजी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
