पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाई गई दान राशि को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और विश्वास के साथ योगदान दिया था, ऐसे में दान राशि को लेकर सामने आ रही खबरें गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
भाजपा सनातन धर्म की ठेकेदार नहीं
जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है, जबकि सनातन धर्म हजारों वर्षों पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल स्वयं को सनातन धर्म का ठेकेदार नहीं बता सकता। सनातन धर्म करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन शैली का हिस्सा है, किसी एक संगठन की संपत्ति नहीं।
राम मंदिर निर्माण में सभी का योगदान
पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार ने भी मंदिर निर्माण में सहयोग राशि प्रदान की थी। उनके अनुसार यह मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही है।
दान राशि को लेकर उठाए सवाल
जयवर्धन सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़ी दान राशि में कथित आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि यदि ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
प्राण-प्रतिष्ठा का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि जिस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में स्वयं नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे और जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हैं, वहां किसी भी प्रकार के वित्तीय विवाद या भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर विषय हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात
जयवर्धन सिंह ने कहा कि धर्म और राजनीति दो अलग-अलग विषय हैं। धार्मिक आस्था का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम और अयोध्या के नाम पर राजनीति कर रही है, जो उचित नहीं है।
साधु-संतों को मिले संचालन की जिम्मेदारी
पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से जुड़े पुराने साधु-संतों को मंदिर संचालन में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि स्थानीय संत समाज और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है।
अयोध्या के चुनाव परिणामों का भी किया जिक्र
उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या क्षेत्र में भाजपा को जिस प्रकार चुनावी नुकसान उठाना पड़ा, उसके पीछे स्थानीय स्तर पर असंतोष भी एक कारण माना जा सकता है। उनका दावा था कि कई संत और पुजारी मौजूदा व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं थे।
भाजपा की नीतियों पर निशाना
अपने बयान में जयवर्धन सिंह ने भाजपा की कार्यप्रणाली और नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लोगों की आस्था और विश्वास कायम रह सके।
नोट: राम मंदिर दान राशि को लेकर लगाए गए आरोप जयवर्धन सिंह के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस विषय पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आना बाकी है।
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