महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘बाबर जनता पार्टी’ कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता का विस्तार करने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 6 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की भी मांग की।
उद्धव ठाकरे ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप
एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है। उनके अनुसार, दूसरी पार्टियों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने पक्ष में लाकर राजनीतिक लाभ लेना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिन सांसदों को जनता ने एक पार्टी के नाम पर चुना था, वे बाद में निजी हितों और राजनीतिक फायदे के लिए दूसरी पार्टी में चले गए। ऐसे नेताओं को जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।
‘बाबर जनता पार्टी’ टिप्पणी पर क्यों मचा बवाल?
अपने भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने भाजपा की कार्यशैली की तुलना ऐतिहासिक आक्रमणों से करते हुए उसे ‘बाबर जनता पार्टी’ कहा। उनका कहना था कि भाजपा दूसरे दलों को कमजोर कर अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
इस बयान के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई।
राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावों से पहले बढ़ती सियासी तल्खी के रूप में देखा जा रहा है।
6 बागी सांसदों पर कार्रवाई की मांग
उद्धव ठाकरे ने कहा कि दल-बदल कर दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिवसेना छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले 6 सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए।
उनका कहना था कि यदि जनता किसी उम्मीदवार को एक राजनीतिक दल के नाम पर चुनती है, तो बाद में पार्टी बदलना मतदाताओं के भरोसे को कमजोर करता है।
चुनाव से पहले तेज हुई सियासी बयानबाजी
महाराष्ट्र में आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी माहौल को देखते हुए नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है। उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद भाजपा की ओर से भी जवाब आने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।
क्या कहता है दल-बदल कानून?
भारत में दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का उद्देश्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को रोकना है। हालांकि किसी सांसद या विधायक की सदस्यता समाप्त करने का अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संबंधित प्राधिकरण द्वारा लिया जाता है।
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