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Bhopal में व्यावसायिक ट्रेनर्स का विरोध: “25 हजार मिल रहे हैं तो 20 हजार सैलरी क्यों?”

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Bhopal में आज व्यावसायिक ट्रेनर्स (Vocational Trainers) ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। ट्रेनर्स का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें 25 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन उन्हें केवल 20 हजार रुपए ही सैलरी मिल रही है।

क्या है ट्रेनर्स की मांग?

प्रदर्शन कर रहे ट्रेनर्स का आरोप है कि उन्हें तय मानदेय से कम भुगतान किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब सरकार की ओर से 25 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है, तो फिर उन्हें पूरा भुगतान क्यों नहीं मिल रहा।

ट्रेनर्स ने इसे सीधा-सीधा अन्याय बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

धरना-प्रदर्शन में उठी आवाज

धरना स्थल पर मौजूद ट्रेनर्स ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। कई ट्रेनर्स ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Manya

manyajadoun42@gmail.com

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TRE-4

Patna में TRE-4 Protest तेज: छात्रों और पुलिस में झड़प, Water Cannon का इस्तेमाल; परीक्षा Pattern पर विवाद

बिहार की राजधानी पटना में TRE-4 Exam को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी परेशानी बढ़ गई है। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर Water Cannon का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की भी खबर सामने आई है। TRE-4 Exam Pattern को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध BPSC TRE-4 परीक्षा के Pattern को लेकर है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा को एक चरण में कराया जाए और भर्ती प्रक्रिया को पहले की तरह सरल एवं स्पष्ट रखा जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। उनका यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उम्मीदवार महीनों मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी बदलाव की जानकारी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। Single Stage Exam और No Negative Marking की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी Single Stage Examination की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे No Negative Marking की व्यवस्था चाहते हैं। छात्रों का तर्क है कि Negative Marking होने से परीक्षा में प्रश्न हल करने की रणनीति बदल जाएगी। उनका कहना है कि अगर परीक्षा का पैटर्न बदला जा रहा है तो BPSC को अभ्यर्थियों की चिंताओं को भी गंभीरता से सुनना चाहिए। Patna में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव TRE-4 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पटना के गर्दनीबाग इलाके में लंबे समय से चल रहा है। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए Water Cannon का इस्तेमाल किया। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चोट की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इस मामले में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। BPSC के बयान से भी नाराज हुए छात्र TRE-4 परीक्षा को लेकर विवाद केवल परीक्षा Pattern तक सीमित नहीं है। हाल में BPSC के परीक्षा नियंत्रक की एक टिप्पणी को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारी की ओर से बयान पर खेद जताया गया। लेकिन छात्रों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी असली चिंता परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन TRE-4 अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। छात्रों की मांग साफ, अब सरकार के फैसले का इंतजार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी टकराव के लिए सड़क पर नहीं आए हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि TRE-4 Exam Pattern को लेकर स्थिति साफ की जाए और उम्मीदवारों के हित में फैसला लिया जाए। अब निगाहें बिहार सरकार और BPSC के अगले कदम पर हैं। अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता है, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पटना का TRE-4 Protest बिहार में सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की चिंता को सामने ला रहा है। छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके लंबे समय से देखे जा रहे सरकारी नौकरी के सपने से जुड़ा मामला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
B1/B2 Visa

Trump का बड़ा Immigration Action: 2 लाख तक B1/B2 Visa होंगे रद्द, Asylum वालों पर नजर

अमेरिका जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए इमिग्रेशन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। Trump Administration अब उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है, जो Tourist या Business Visa पर अमेरिका पहुंचे और बाद में वहां Asylum (शरण) के लिए आवेदन कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे 2 लाख तक B1/B2 Visa रद्द किए जा सकते हैं। अगर यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो एक साथ इतने वीजा रद्द किए जाने की कार्रवाई अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में असाधारण कदम मानी जाएगी। हालांकि, फिलहाल 2 लाख का आंकड़ा संभावित संख्या है, अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं। Tourist Visa पर अमेरिका गए, फिर Asylum मांगा अमेरिका में B1 और B2 Visa मुख्य रूप से अस्थायी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं। B1 Visa का इस्तेमाल आमतौर पर Business Travel के लिए होता है, जबकि B2 Visa Tourism, रिश्तेदारों से मिलने या कुछ मेडिकल यात्राओं के लिए दिया जाता है। अमेरिकी प्रशासन की चिंता उन मामलों को लेकर है, जहां कोई व्यक्ति Visitor Visa के जरिए अमेरिका पहुंचने के बाद वहां Asylum Application दाखिल कर देता है। सरकार का मानना है कि कुछ मामलों में अस्थायी यात्रा के लिए मिले वीजा का इस्तेमाल लंबे समय तक अमेरिका में रहने के रास्ते के तौर पर किया जा रहा है। 2 लाख Visa Cancel होने की खबर कितनी सही? यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। 2 लाख वीजा रद्द किए जाने की बात अभी एक संभावित आंकड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मामलों की समीक्षा जारी है और वास्तविक संख्या इससे कम या ज्यादा हो सकती है। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने 2 लाख लोगों के वीजा तुरंत रद्द कर दिए हैं। बल्कि प्रशासन ऐसे मामलों की पहचान और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। Visa Cancel होने का मतलब Deportation नहीं Visa cancellation को लेकर लोगों के बीच एक बड़ा भ्रम भी है। वीजा रद्द होना और Deportation एक ही बात नहीं है। किसी व्यक्ति का B1/B2 Visa रद्द होने का मतलब यह है कि वह उस वीजा के आधार पर अमेरिका की यात्रा नहीं कर पाएगा। लेकिन अगर उसका Asylum Case पहले से किसी प्रक्रिया में है, तो उसकी इमिग्रेशन स्थिति अलग नियमों के तहत देखी जा सकती है। इसलिए प्रभावित लोगों के लिए आगे की कानूनी और इमिग्रेशन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। Trump Administration क्यों कर रहा है इतनी सख्ती? राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने इमिग्रेशन को अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है। सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि अमेरिका में प्रवेश और रहने के नियमों का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Administration का फोकस खास तौर पर उन मामलों पर है, जहां Visitor Visa लेकर अमेरिका पहुंचने के बाद व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया शुरू करता है जिससे वह लंबे समय तक देश में रह सके। सरकार का तर्क है कि Asylum System का इस्तेमाल वास्तविक शरण की जरूरत वाले लोगों के लिए होना चाहिए, न कि इमिग्रेशन नियमों से बचने के वैकल्पिक रास्ते के तौर पर। पहले भी हजारों Visa हो चुके हैं Cancel यह कार्रवाई अचानक शुरू हुई प्रक्रिया नहीं है। Trump Administration पहले से ही Visa और Immigration System की जांच कड़ी कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पिछले करीब 18 महीनों में अलग-अलग कारणों से 1.75 लाख से ज्यादा Visa रद्द किए जा चुके हैं। इनमें आपराधिक मामलों और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। अब अगर B1/B2 Visa वाले Asylum Applicants पर प्रस्तावित कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो यह अभियान और बड़ा रूप ले सकता है। आगे क्या होगा? आने वाले समय में अमेरिकी State Department और Department of Homeland Security की जांच और समीक्षा के बाद तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। प्रभावित लोगों की संख्या भी इसी प्रक्रिया के बाद सामने आएगी। फिलहाल इतना साफ है कि America Visa Rules को लेकर Trump Administration का रुख पहले से ज्यादा सख्त हो चुका है। Tourist और Business Visa पर अमेरिका जाने वालों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में Visa Screening और Immigration Checks और कड़े होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI के 10 साल पूरे: ₹1.78 करोड़ से हजारों करोड़ तक पहुंचा सफर, PM Modi ने किया याद

भारत में आज मोबाइल से चंद सेकंड में पैसे भेजना जितना आसान लगता है, दस साल पहले इसकी कल्पना भी इतनी आम नहीं थी। UPI यानी Unified Payments Interface ने इसी बदलाव को संभव बनाया। साल 2016 में शुरू हुआ UPI अब अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान इसने भारत के Digital Payment सिस्टम की पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI की 10वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया के जरिए इस खास सफर को याद किया। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल तरक्की की एक बड़ी मिसाल बताते हुए इससे जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की। ₹1.78 करोड़ से शुरू होकर ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा UPI UPI की शुरुआत के समय इसके जरिए होने वाले लेनदेन बेहद कम थे। शुरुआती दौर में इसका सालाना ट्रांजैक्शन करीब ₹1.78 करोड़ था। लेकिन अगले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन, इंटरनेट और Digital Banking के बढ़ते इस्तेमाल ने UPI को तेजी से आगे बढ़ाया। आज यही आंकड़ा बढ़कर करीब ₹24,162 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि बताता है कि भारतीयों ने डिजिटल पेमेंट को कितनी तेजी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया। चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक पहुंचा QR Payment UPI की असली ताकत उसकी सादगी रही। सड़क किनारे चाय बेचने वाला हो या बड़ा कारोबारी, QR Code ने सभी के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता आसान कर दिया। अब किसी दुकान पर कैश नहीं है तो परेशानी नहीं। मोबाइल निकाला, QR Code स्कैन किया और Payment पूरा। यही सुविधा UPI को आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाने में अहम रही। Cashless India की दिशा में बड़ा कदम UPI ने भारत में Cashless Economy को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे भुगतान से लेकर बड़े लेनदेन तक, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई जटिल प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक अकाउंट और मोबाइल के जरिए भुगतान करना काफी आसान हो गया है। PM Modi ने UPI के सफर को बताया खास UPI के 10 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक खास पोस्ट साझा किया। उन्होंने इस डिजिटल पेमेंट सिस्टम के विकास को भारत की तकनीकी क्षमता और Innovation से जोड़ते हुए इससे जुड़े लोगों की तारीफ की। UPI ने न केवल देश के भीतर भुगतान को आसान बनाया, बल्कि भारत के Digital Public Infrastructure की चर्चा को भी दुनिया तक पहुंचाया है। भारत से बाहर भी बढ़ी UPI की पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI की चर्चा भारत के बाहर भी बढ़ी है। अलग-अलग देशों के साथ Digital Payment Connectivity बढ़ने से भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए भी भुगतान के नए रास्ते खुले हैं। इससे भारत के उस मॉडल को भी मजबूती मिली है, जिसमें Technology को आम लोगों की जरूरतों से जोड़कर बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। 10 साल बाद भी UPI की कहानी जारी 2016 में शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ₹1.78 करोड़ से ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा इसका सफर भारत में Digital Payment Revolution की तस्वीर सामने रखता है। आने वाले समय में UPI को और सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल, UPI के 10 साल पूरे होना इस बात का प्रमाण है कि सही Technology जब आम आदमी के हाथ में पहुंचती है, तो बदलाव बहुत बड़े स्तर पर दिखाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
TMC

TMC vs Rebel MPs: 20 सांसदों की Disqualification पर Supreme Court का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मामला केवल सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दल-बदल कानून, लोकसभा स्पीकर के अधिकार और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी जैसे अहम सवाल भी हैं। 20 सांसदों की Disqualification का क्या है मामला? TMC का आरोप है कि उसके टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई योग्य बताया है। TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए लोकसभा स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन याचिकाओं पर अपेक्षित तेजी से फैसला नहीं हुआ। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अलग दलील रखी गई है। उनका कहना है कि उनका कदम कानूनी राजनीतिक विलय के दायरे में आता है और इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। Abhishek Banerjee ने उठाया मामला इस मामले को लेकर TMC के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा स्पीकर से भी जल्द फैसला लेने की मांग की थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि अयोग्यता याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की प्रमुख मांग है कि अयोग्यता याचिकाओं पर Time-Bound Decision लिया जाए। SC के Notice से क्या बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना फिलहाल यह नहीं बताता कि 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अदालत अब संबंधित पक्षों का जवाब सुनकर मामले की कानूनी स्थिति पर विचार करेगी। यही वजह है कि इस मामले में अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा क्या हो सकती है। Anti-Defection Law पर भी नजर भारत में दल-बदल रोकने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में प्रावधान किए गए हैं। किसी सांसद के पार्टी बदलने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाने की स्थिति में अयोग्यता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। TMC और बागी सांसदों के बीच विवाद इसी कानूनी ढांचे की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए मामला सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसदीय कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आगे क्या होगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। 20 बागी सांसदों को नोटिस मिलने के बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल इतना साफ है कि TMC के 20 Rebel MPs का Disqualification Case अब संसद से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक असर जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही इसकी कानूनी दिशा पर भी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America vs Iran: ईरान की कमाई पर बड़ा हमला, इन 5 Sectors में कारोबार पर बढ़ा खतरा

अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ आर्थिक दबाव को एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने “Operation Economic Outcast” नाम से एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों पर Secondary Sanctions का खतरा बढ़ाया गया है। इनमें Digital Assets, Technology, Gold, Aviation और Shipping शामिल हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका का निशाना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जो विदेशी कंपनियां या संस्थाएं ईरान से जुड़े इन क्षेत्रों में कारोबार या सेवाएं जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिका ने कई मामलों में पहले चेतावनी और कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की बात कही है। अमेरिका ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मकसद ईरान की उन आर्थिक “lifelines” को काटना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और राजस्व हासिल होता है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान तेल की बिक्री, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क और दूसरे वित्तीय रास्तों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखता है। नई रणनीति में अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के साथ-साथ उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बनाना चाहता है, जो इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। Gold और Digital Assets पर खास नजर नई कार्रवाई में Gold और Digital Assets को भी प्रमुखता दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि ईरान अपनी कमजोर होती औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच सोने का इस्तेमाल अपनी मुद्रा को सहारा देने और महंगाई के असर से बचने के लिए कर रहा है। वहीं, Digital Assets यानी क्रिप्टो से जुड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधों से बचने और वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। Technology सेक्टर भी अमेरिकी निशाने पर ईरान को उन्नत तकनीक तक पहुंच से रोकना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ऐसी तकनीक और उपकरण हासिल करने की कोशिश करता है, जिनका इस्तेमाल उसके मिसाइल और अन्य संवेदनशील कार्यक्रमों में हो सकता है। इसी वजह से नई कार्रवाई में Technology से जुड़े नेटवर्क और खरीद गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। Aviation और Shipping पर भी शिकंजा ईरान की Aviation और Shipping गतिविधियां भी इस अभियान के केंद्र में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ ईरानी एयरलाइंस और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील सामान, तकनीक और तेल की आवाजाही के लिए किया जाता है। Shipping के मामले में अमेरिका ने ईरान से जुड़े Shadow Fleet नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई की है। ट्रेजरी ने अलग-अलग देशों में मौजूद ब्रोकरों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई और उससे होने वाली कमाई के नेटवर्क को निशाना बनाया है। करीब 60 Entities, Individuals और Vessels पर कार्रवाई अमेरिका ने इस अभियान के शुरुआती चरण में करीब 60 Entities, Individuals और Vessels को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। इनमें कथित तेल नेटवर्क, तकनीकी खरीद, साइबर गतिविधियों और अन्य वित्तीय चैनलों से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें UAE, Hong Kong, China, Singapore, Switzerland और यूरोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क शामिल बताए गए हैं। दूसरे देशों के लिए क्यों बढ़ी चिंता? अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि Secondary Sanctions का असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। अगर कोई विदेशी संस्था ईरान से जुड़े ऐसे कारोबार में शामिल होती है जिसे अमेरिका प्रतिबंधों के दायरे में लाता है, तो उस संस्था के अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच पर खतरा बढ़ सकता है। यानी अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को सिर्फ तेहरान के साथ अपने रिश्ते नहीं देखने होंगे, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को भी ध्यान में रखना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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