भोपाल (Bhopal) में सहकारिता मंत्रालय के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (MPCDF) में सहकारिता सप्ताह की शुरुआत उत्साह और सहभागिता के साथ हुई। यह आयोजन प्रदेश के सभी छह दुग्ध संघों में एक साथ मनाया जा रहा है, जिसमें किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह सहकारिता भावना से भरा हुआ नजर आया, जहाँ किसानों के चेहरे पर उम्मीद और आत्मनिर्भरता की झलक साफ दिखाई दी।
“सहकारिता ने किसान को उसका सही हक दिलाया” – डॉ. संजय गोवाणी
एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी ने सेमिनार में कहा कि सहकारिता ने किसानों को उनकी मेहनत का सही और पारदर्शी मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि पहले किसानों को दूध का उचित दाम नहीं मिलता था, लेकिन सहकारी व्यवस्था ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। “जैसा दूध वैसा पैसा” के सिद्धांत ने किसानों को सीधा लाभ पहुँचाया है।
डॉ. गोवाणी ने आगे बताया कि सहकारिता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि किसानों की सेवा का माध्यम है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
MP Dairy Sector Growth: मध्यप्रदेश के पास नंबर-1 बनने का मौका
डॉ. गोवाणी ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। राज्य में करीब 10,000 गाँवों में सहकारी दुग्ध समितियाँ सक्रिय हैं, जबकि कुल गाँवों की संख्या 52,000 से अधिक है।
उन्होंने भरोसा जताया कि यदि नस्ल सुधार, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो मध्यप्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर पहुँच सकता है।
NDDB ने बताए सहकारिता के 7 सिद्धांत
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के महाप्रबंधक श्री जयदेव विश्वास ने सहकारिता के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आधुनिक सहकारिता की नींव यूरोप में रखी गई थी, लेकिन भारत में इसे ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से नई पहचान मिली।
सहकारिता के 7 मुख्य सिद्धांत:
- स्वैच्छिक सदस्यता
- लोकतांत्रिक नियंत्रण
- आर्थिक भागीदारी
- स्वायत्तता
- शिक्षा और प्रशिक्षण
- सहकारी सहयोग
- सामाजिक जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत सहकारिता को मजबूत और टिकाऊ बनाते हैं।
MP Dairy Cooperative Future: उज्जवल संभावनाएँ
जबलपुर दुग्ध संघ के सीईओ श्री राहुल त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश में डेयरी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ सकता है। अगर किसान और संस्थाएँ मिलकर काम करें तो राज्य देश में डेयरी हब बन सकता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक और प्रशिक्षण इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत होंगे।
“सांची” जैसी संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत
डॉ. गोवाणी ने यह भी चेताया कि यदि सहकारिता कमजोर हुई तो निजी कंपनियों द्वारा किसानों के शोषण की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि “सांची” जैसी सहकारी ब्रांड को और मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यक्रम में दिखा सहयोग और सहभागिता
सेमिनार में लगभग 250 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सहकारिता शपथ के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल को एकजुटता और विश्वास से भर दिया।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए, जिनमें शामिल रहे:
- श्री असीम निगम
- श्री डी.के. पांडे
- श्री शुभांकर नंदा
कार्यक्रम का संचालन श्री मिलन मिश्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्री अजय शाह द्वारा दिया गया।
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