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Heat Wave in Europe: यूरोप में भीषण गर्मी का कहर, AC के लिए मची होड़; फायर ब्रिगेड की गाड़ियां छिड़क रहीं पानी

Table of Content

यूरोप के कई देशों में इन दिनों भीषण हीट वेव (Heat Wave) का कहर देखने को मिल रहा है। तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। कई शहरों में हालात ऐसे हैं कि लोग ठंडक पाने के लिए एयर कंडीशनर (AC) और कूलिंग डिवाइस खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ लगा रहे हैं।

कैसे बिगड़े हालात?

तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण कई इलाकों में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सड़कें गर्म हो रही हैं और दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। गर्म हवाओं के कारण लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं।

AC और कूलिंग सामान की भारी डिमांड

गर्मी बढ़ने के साथ ही बाजारों में AC, कूलर और पंखों की मांग अचानक बढ़ गई है। कई जगहों पर दुकानों में स्टॉक भी कम होने लगा है और लोग जल्दी से जल्दी राहत पाने के लिए खरीदारी कर रहे हैं।

फायर ब्रिगेड भी कर रही मदद

कुछ शहरों में हालात को काबू में करने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रही हैं, ताकि गर्मी और लू के असर को थोड़ा कम किया जा सके।

Manya

manyajadoun42@gmail.com

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Gold-Silver

Gold-Silver Price Today: चांदी ₹2,299 उछली, सोना ₹610 सस्ता; जानें आज के ताजा भाव

सोने-चांदी (Gold-Silver) के बाजार में बुधवार, 26 अगस्त को तस्वीर थोड़ी अलग रही। जहां चांदी के भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली, वहीं सोना हल्का सस्ता हुआ। IBJA के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी ₹2,299 प्रति किलो उछलकर करीब ₹2.44 लाख प्रति किलो पहुंच गई। दूसरी ओर 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹610 की गिरावट आई और भाव करीब ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम रहा। Silver Price Today: चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार चांदी की कीमत में एक दिन में ₹2,299 की बढ़ोतरी ने बाजार का ध्यान खींचा है। 999 शुद्धता वाली चांदी अब करीब ₹2.44 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। साल की शुरुआत के मुकाबले भी चांदी महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को इसका भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था, जो अब बढ़कर लगभग ₹2.44 लाख हो गया है। यानी साल के दौरान करीब ₹14 हजार प्रति किलो की बढ़त देखने को मिली है। हालांकि, इस साल चांदी इससे भी कहीं ऊंचा स्तर देख चुकी है। 29 जनवरी 2026 को इसका भाव करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गया था। ऐसे में मौजूदा कीमत उस रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है। Gold Price Today: ₹610 की गिरावट से राहत चांदी के उलट सोने में बुधवार को नरमी रही। 24 कैरेट सोने का भाव ₹610 घटकर करीब ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम रह गया। लेकिन एक दिन की गिरावट के बावजूद सोना इस साल की शुरुआत की तुलना में काफी महंगा है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.33 लाख थी। मौजूदा भाव करीब ₹1.61 लाख होने का मतलब है कि 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹29 हजार की बढ़ोतरी हो चुकी है। आखिर क्यों बदल रहे हैं Gold-Silver Rates? सोने-चांदी की कीमतों पर सिर्फ घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद, महंगाई और वैश्विक तनाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को सोने में करीब 0.6% की गिरावट दर्ज हुई। निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आगामी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर है। यही वजह है कि बुलियन मार्केट में एक दिन तेजी तो दूसरे दिन गिरावट देखने को मिल सकती है। इस साल Gold ने भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड सोना भी 2026 में कई बार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी को सोने का भाव करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले महीनों में कीमती धातुओं में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि किसी भी अनुमान को निश्चित कीमत नहीं माना जा सकता। Jewellery खरीदने वालों के लिए जरूरी बात यहां बताए गए भाव बुलियन/IBJA के indicative rates हैं। ज्वेलरी खरीदते समय दुकान पर मिलने वाला अंतिम बिल अलग हो सकता है। इसमें सोने की purity के अलावा GST, making charges और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं। IBJA के प्रकाशित रेट भी GST और making charges से अलग होते हैं। इसलिए अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो दुकान पर भुगतान करने से पहले purity, प्रति ग्राम भाव, making charges और GST का पूरा हिसाब जरूर देख लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: भोटेकोशी नदी बनी काल, पुल और गाड़ियां बहीं; 9 पुलिसकर्मियों की तलाश जारी

नेपाल (Nepal) के रसुवा जिले से आई तस्वीरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तिब्बत की ओर से अचानक आए तेज पानी ने भोटेकोशी नदी का रुख बेहद खतरनाक कर दिया। देखते ही देखते नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया और टिमुरे समेत कई जगहों पर भारी नुकसान की खबर सामने आई है। इस हादसे में टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट पर तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक बढ़ा भोटेकोशी नदी का जलस्तर बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बहाव आया। स्थानीय स्तर पर हालात इतने तेजी से बदले कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में तेजी से फैल गया। बाढ़ के कारण टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में पानी और मलबा पहुंच गया। कई वाहन इसकी चपेट में आए हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी रही, क्योंकि कुछ ही समय में सामान्य नदी का बहाव खतरनाक सैलाब में बदल गया। 9 पुलिसकर्मी हुए लापता इस बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता 9 सशस्त्र पुलिसकर्मियों के लापता होने को लेकर है। ये जवान टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट में तैनात थे। बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने की वजह से स्थिति की पूरी जानकारी जुटाने में परेशानी आ रही है। अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि कुछ जवान सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हों और नेटवर्क नहीं होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा हो। तीन Police Posts को भी नुकसान बाढ़ का असर केवल आम आबादी तक सीमित नहीं रहा। टिमुरे एरिया पुलिस ऑफिस, स्याफ्रुबेसी पुलिस पोस्ट और रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है। तेज पानी के साथ मलबा आने से सड़क और आसपास के दूसरे बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है। कई जगहों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। पुल टूटा, गाड़ियां और सामान बहा भोटेकोशी नदी का बहाव इतना तेज था कि एक पुल के क्षतिग्रस्त होने और बहने की जानकारी सामने आई है। टिमुरे बाजार में कई वाहन भी बाढ़ के पानी की चपेट में आए। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बाढ़ की भयावहता साफ नजर आ रही है। बाजार और सड़क के आसपास पानी का तेज बहाव देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ ही देर में हालात कितने बिगड़ गए। Rescue Operation में जुटी Nepal Army हादसे के बाद नेपाल सरकार ने Rescue Operation तेज कर दिया है। Nepal Army, Armed Police Force और Nepal Police की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। बचाव अभियान में हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। सुरक्षा बलों का मुख्य फोकस लापता पुलिसकर्मियों की तलाश और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है। निचले इलाकों के लिए भी Alert भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ने की वजह से नदी किनारे बसे दूसरे इलाकों में भी खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और नालों के पास जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। बारिश से ज्यादा Tibet से आए पानी ने बढ़ाई मुश्किल? बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी में तिब्बत क्षेत्र में हुई भारी बारिश को अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नेपाल के रसुवा इलाके में हुई बारिश इस अचानक आई बाढ़ की पूरी वजह नहीं लगती। हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण और पानी के अचानक बढ़ने की स्थिति का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है। अभी कितना नुकसान हुआ, तस्वीर साफ नहीं फिलहाल बाढ़ से हुए कुल नुकसान और संभावित जनहानि का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है। प्रभावित इलाकों में संचार और सड़क संपर्क प्रभावित होने से प्रशासन को भी सही जानकारी जुटाने में समय लग रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लापता 9 पुलिसकर्मियों को लेकर है। राहत और बचाव दल लगातार Search Operation चला रहे हैं। आने वाले घंटों में बाढ़ से हुए नुकसान और लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rekha Gupta

Rekha Gupta का बड़ा तोहफा: Delhi Lakshmi Yojana में महिलाओं को हर महीने ₹2500, जानें Payment Date

रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली की महिलाओं के लिए जिस Lakshmi Yojana को लेकर काफी उम्मीदें थीं, उसे लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने जा रही है। हालांकि, पहली किस्त को लेकर पहले अलग-अलग तारीखों की चर्चा थी, लेकिन अब सरकार की ओर से भुगतान शुरू करने की तारीख 1 सितंबर 2026 बताई गई है। यानी जिन महिलाओं का आवेदन जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में सही पाया गया है, उन्हें जल्द ही इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो सकता है। 26 अगस्त से Approval Letter देने की शुरुआत सरकार की ओर से 26 अगस्त को योजना से जुड़े लाभार्थियों को Approval Letter देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए दिल्ली में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। इस पत्र का मतलब यह होगा कि संबंधित महिला का आवेदन तय प्रक्रिया के तहत मंजूर हो चुका है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए यह चरण काफी अहम माना जा रहा है। हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500 Delhi Lakshmi Yojana के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रावधान है। पूरे साल की रकम देखें तो यह सहायता ₹30,000 तक पहुंचती है। सरकार का कहना है कि योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए थोड़ी अतिरिक्त वित्तीय मदद मिल सके। इस योजना के लिए दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹5,110 करोड़ का प्रावधान किया है। कौन महिलाएं ले सकती हैं योजना का लाभ? योजना की घोषित शर्तों के मुताबिक, दिल्ली की 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाएं इसका लाभ ले सकती हैं। इसके साथ दिल्ली का निवासी होना और सरकार द्वारा तय आय संबंधी मानदंडों को पूरा करना जरूरी है। कुछ ऐसी श्रेणियां भी हैं जिन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। इसलिए सिर्फ उम्र पूरी होना ही पर्याप्त नहीं है। आवेदन की जांच के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित महिला योजना के लिए पात्र है या नहीं। रक्षाबंधन पर पहली किस्त की थी उम्मीद Lakshmi Yojana को लेकर शुरुआत में रक्षाबंधन के आसपास पहली किस्त आने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसी वजह से दिल्ली की बड़ी संख्या में महिलाएं भुगतान का इंतजार कर रही थीं। बाद में भुगतान की तारीख को लेकर बदलाव हुआ और अब 1 सितंबर 2026 से पहली किस्त जारी करने की तैयारी है। ऐसे में लाभार्थियों को पुरानी तारीखों के बजाय सरकार के ताजा अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। Delhi Lakshmi Yojana Status कैसे चेक करें? अगर आपने इस योजना के लिए आवेदन किया है तो अपने आवेदन का Status चेक करने के लिए दिल्ली सरकार के संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Status चेक करने का तरीका: ध्यान रखें कि OTP, बैंक PIN, ATM PIN या पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी माध्यमों पर भरोसा करें। महिलाओं के लिए क्यों खास है ₹2,500 की मदद? हर महीने मिलने वाली ₹2,500 की राशि भले ही किसी परिवार की पूरी आर्थिक जरूरत पूरी न करे, लेकिन घरेलू खर्चों में यह मददगार जरूर हो सकती है। खासकर उन महिलाओं के लिए जो आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भर हैं, नियमित सहायता का अपना महत्व है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 सितंबर से भुगतान कितनी तेजी से लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में इसी पर महिलाओं की नजर रहेगी। Delhi Lakshmi Yojana: एक नजर में जानकारी विवरण योजना का नाम Delhi Lakshmi Yojana लाभ ₹2,500 प्रति माह सालाना सहायता ₹30,000 तक आयु सीमा 21 से 60 वर्ष Approval Letter 26 अगस्त 2026 पहली किस्त 1 सितंबर 2026 से लाभार्थी पात्र दिल्ली निवासी महिलाएं जरूरी बात: योजना की पात्रता, किस्त और आवेदन Status से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए दिल्ली सरकार के आधिकारिक अपडेट को ही मानें। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट तारीखों या दावों पर भरोसा न करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kriti Sanon

GIVA Raksha Bandhan Ad: कृति सेनन के विज्ञापन पर Controversy, कंपनी ने लिया बड़ा फैसला

Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad Controversy: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन का एक ज्वेलरी विज्ञापन विवादों में घिर गया। GIVA के इस कैंपेन में कृति का मॉडर्न लुक और राखी बांधने का अंदाज कुछ लोगों को पसंद नहीं आया। सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हुई तो मामला कंगना रनौत और राहुल गांधी तक पहुंच गया। आखिरकार ब्रांड ने विवाद के बीच विज्ञापन को हटा दिया। कृति सेनन के Raksha Bandhan Ad में ऐसा क्या था? GIVA के रक्षाबंधन कैंपेन में Kriti Sanon ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल टॉप, स्कर्ट और केप में दिखाई दीं। विज्ञापन में वह अपने भाई को राखी बांधती नजर आती हैं। इसी दौरान उनके पहनावे और त्योहार को पेश करने के तरीके पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों को यह विज्ञापन नए जमाने की सोच और फैशन का उदाहरण लगा, जबकि कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में इस तरह का लुक कितना उचित है। Kangana Ranaut ने कृति के Ad पर साधा निशाना विवाद ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने विज्ञापन पर सवाल उठाए। कंगना ने कृति के पहनावे को लेकर टिप्पणी करते हुए पूछा कि रक्षाबंधन के मौके पर इस तरह के आउटफिट को विज्ञापन का हिस्सा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। कंगना की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की राय देखने को मिली। कुछ लोग उनके सवाल से सहमत नजर आए, तो कुछ ने इसे अभिनेत्री की व्यक्तिगत पसंद में दखल बताया। Kriti Sanon ने दिया करारा जवाब आलोचना के बीच कृति सेनन ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली लगातार टिप्पणियों पर सवाल उठाया। कृति का कहना था कि किसी महिला की पसंद को सिर्फ उसके कपड़ों के आधार पर तय करना सही नहीं है। कृति की प्रतिक्रिया के बाद यह बहस और तेज हो गई। अब सवाल सिर्फ एक विज्ञापन का नहीं रहा, बल्कि यह चर्चा होने लगी कि आधुनिक दौर में महिलाओं की पसंद और सामाजिक सोच के बीच संतुलन कहां होना चाहिए। Rahul Gandhi ने किया Kriti Sanon का Support मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एंट्री ने विवाद को राजनीतिक चर्चा में बदल दिया। राहुल गांधी ने कृति सेनन का समर्थन करते हुए महिलाओं की पसंद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात कही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी महिला के कपड़े उसके चरित्र या उसकी सोच का पैमाना नहीं होने चाहिए। राहुल के समर्थन के बाद कृति के विज्ञापन को लेकर चल रही बहस ने सोशल मीडिया पर और जोर पकड़ लिया। विवाद बढ़ा तो GIVA ने हटाया Advertisement लगातार हो रही चर्चा और आलोचना के बीच GIVA ने रक्षाबंधन वाले इस विज्ञापन को हटा दिया। कंपनी के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर फिर सवाल उठने लगे कि क्या विज्ञापन को हटाने का फैसला विवाद को देखते हुए लिया गया या ब्रांड ने सांस्कृतिक भावनाओं को प्राथमिकता दी। फिलहाल विज्ञापन कैंपेन से हटा दिया गया है, लेकिन इससे जुड़ी बहस अभी भी सोशल मीडिया पर जारी है। त्योहार, Fashion और Freedom की बहस कृति सेनन का यह मामला दिखाता है कि आज के दौर में Festival Advertising सिर्फ प्रोडक्ट बेचने तक सीमित नहीं रह गया है। विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाला पहनावा, भाषा और त्योहारों की प्रस्तुति लोगों की भावनाओं से भी जुड़ जाती है। एक तरफ लोग आधुनिक सोच और महिलाओं की अपनी पसंद की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि पारंपरिक त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में भारतीय संस्कृति और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। रक्षाबंधन के एक विज्ञापन से शुरू हुई यह कहानी अब Kriti Sanon, Kangana Ranaut और Rahul Gandhi के बयानों तक पहुंच चुकी है। GIVA ने विज्ञापन भले ही हटा दिया हो, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है—त्योहारों के विज्ञापनों में आधुनिकता और परंपरा के बीच सही संतुलन आखिर कैसे बनाया जाए? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: घुसपैठ को लेकर शाह का बड़ा ऐलान, Security और Economy पर बताया खतरा

देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। देश में आने और रहने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को सिर्फ सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि National Security, Economy और Demographic Balance से जुड़ी चुनौती बताया। शाह के इस बयान के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान, सीमा सुरक्षा और राज्यों की भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’, शाह ने क्यों कहा? अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत में रहने का अधिकार नागरिकों को है। जो विदेशी नागरिक वैध दस्तावेज और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत आते हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों पर सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय स्थिति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इसे लंबे समय से सरकार की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शामिल किया गया है। Infiltration Free India का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश को कम से कम समय में Infiltration Free India बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। भूमि सीमा साझा करने वाले राज्यों के साथ बैठकें और दौरे कर सीमा सुरक्षा को लेकर एक चार सूत्रीय रणनीति पर भी काम किया गया है। इसका उद्देश्य सीमा पर निगरानी मजबूत करने के साथ स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। Border Security में Technology का बढ़ेगा इस्तेमाल बदलते समय के साथ सीमा सुरक्षा का तरीका भी बदल रहा है। सरकार अब पारंपरिक निगरानी के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। Smart Border Management, बेहतर निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मकसद संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जल्दी करना और सुरक्षा तंत्र को ज्यादा प्रभावी बनाना है। 15-20 साल आगे की तैयारी पर जोर राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में शाह ने अधिकारियों से सिर्फ आज की चुनौतियों पर ध्यान देने के बजाय आने वाले 15 से 20 वर्षों के सुरक्षा रुझानों का अध्ययन करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी खतरे के बड़ा रूप लेने का इंतजार करने के बजाय पहले से उसकी पहचान कर तैयारी की जाए। आतंकवाद, साइबर खतरे, कट्टरपंथ, नशीले पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से आने वाली चुनौतियां इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं। Narcotics और Terrorism पर भी सरकार की नजर गृह मंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की जरूरत बताई। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर Coordination के साथ नई तकनीक और Intelligence Sharing को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हो, ताकि किसी संभावित खतरे पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। राज्यों की भूमिका क्यों अहम? भारत की सीमा से जुड़े कई राज्यों की भूमिका इस पूरी रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सुरक्षा केवल केंद्रीय बलों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल से ही सीमा क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी संभव है। इसी वजह से केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर Integrated Security Grid को मजबूत करने पर जोर दे रही है। शाह के बयान का बड़ा संदेश अमित शाह का ताजा बयान बताता है कि केंद्र सरकार के लिए Illegal Infiltration और Border Security आने वाले समय में भी बड़ी प्राथमिकता बने रहेंगे। सरकार एक तरफ सीमा पर निगरानी मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और Intelligence आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने पर जोर दे रही है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की पहचान या उसके खिलाफ कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए। अवैध घुसपैठ और वैध रूप से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के बीच अंतर करना भी इसी कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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