देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया। उनके निधन से लोककला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपनी अनूठी गायन शैली से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा
तीजन बाई का बचपन लोक परंपराओं के बीच बीता। उन्हें महाभारत की कहानियां सुनाने और पंडवानी गायन की प्रेरणा अपने नाना से मिली। बचपन से ही उन्होंने महाभारत के प्रसंगों को याद करना शुरू कर दिया और आगे चलकर यही उनकी पहचान बन गया।
पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली प्रस्तुति और अभिनय शैली के जरिए पंडवानी कला को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने अनेक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
कई बड़े सम्मानों से हुईं सम्मानित
लोककला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। इनमें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल सम्मान भी शामिल हैं। उनके योगदान को भारतीय लोकसंगीत के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

