उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद (Jalalabad) का नाम बदलकर अब “परशुरामपुरी (Parshurampuri)” कर दिया है। यह निर्णय सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नया स्वर देने वाला कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट बैठक में 29 प्रस्तावों पर मुहर
लखनऊ में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में कुल 29 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहा जलालाबाद का नाम परिवर्तन, जिसे अब आधिकारिक रूप से “परशुरामपुरी” के नाम से जाना जाएगा।
भगवान परशुराम से जुड़ी आस्था के आधार पर फैसला
सरकार के अनुसार यह फैसला भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यताओं और क्षेत्रीय आस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थान भगवान परशुराम से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, और इसी वजह से लंबे समय से नाम बदलने की मांग की जा रही थी।
इस फैसले के बाद क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, खासकर उन लोगों के बीच जो इसे धार्मिक पहचान की पुनर्स्थापना के रूप में देख रहे हैं।
पहले ही मिल चुकी थी केंद्र की मंजूरी
जानकारी के मुताबिक, इस नाम परिवर्तन को लेकर केंद्र सरकार से पहले ही अनापत्ति (NOC) मिल चुकी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए इसे लागू करने का निर्णय लिया।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि “परशुरामपुरी” नाम के बाद इस क्षेत्र की पहचान और मजबूत होगी और यहां धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए अवसर भी बनने की उम्मीद है।
विकास से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी पास
कैबिनेट बैठक में सिर्फ नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि राज्य के विकास से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए। इनमें नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनका उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य और सुविधाओं को मजबूत करना है।
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