दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) में भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत के पूर्व रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर डॉ. रघुराम राजन समेत तीन भारतीय विशेषज्ञों को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों में शामिल किया गया है। इसे भारत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।
फेडरल रिजर्व ने अपने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सलाहकार समूहों के लिए नए सदस्यों की घोषणा की है। इनमें भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी जगह मिली है। इन विशेषज्ञों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देना होगा।
डॉ. रघुराम राजन, जो भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माने जाते हैं, को एक अहम सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उनके साथ दो अन्य भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थशास्त्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा और आर्थिक विशेषज्ञता को लगातार सम्मान मिल रहा है। भारतीय पेशेवर आज दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माण से जुड़े संगठनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के निर्णय लेने वाले बोर्ड की सदस्यता नहीं है, बल्कि सलाहकार समितियों का हिस्सा है। फिर भी इन समितियों की सिफारिशें आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की यह बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है।
भारतीय मूल के विशेषज्ञों को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक विशेषज्ञता की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जा रही है।
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