Sikkim में निर्माणाधीन टनल पर हुआ भीषण Landslide पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5 मजदूर अब भी लापता हैं। कई दिनों से लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद खराब मौसम, भारी मलबा और टनल के भीतर फैली मीथेन गैस (Methane Gas) राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रेस्क्यू टीम के अधिकारियों का कहना है कि हर पल जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन लापता मजदूरों तक पहुंचने के लिए अभियान बिना रुके जारी है।
कैसे हुआ Sikkim Tunnel Landslide?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा निर्माणाधीन टनल के प्रवेश मार्ग पर आ गिरा। उस समय कई मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे और बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत अभियान शुरू किया गया।
20 शव मिले, 5 मजदूरों की तलाश अभी जारी
रेस्क्यू टीम ने लगातार कई दिनों तक मलबा हटाने के बाद अब तक 20 मजदूरों के शव बाहर निकाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी 5 मजदूरों के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है।
हालांकि समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं, लेकिन बचाव दल का कहना है कि जब तक अंतिम मजदूर का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा।
Methane Gas बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल के अंदर मीथेन गैस की मौजूदगी ने हालात और गंभीर बना दिए। गैस का स्तर बढ़ने से कुछ बचावकर्मियों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई कर्मी बेहोश हो गए।
इसके बाद ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोककर टनल में गैस की जांच की गई। अब बचाव दल विशेष ऑक्सीजन उपकरण, गैस डिटेक्टर और सुरक्षा किट के साथ अंदर प्रवेश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टनलों में मीथेन गैस का जमा होना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और विस्फोट का खतरा भी बना रहता है।
युद्धस्तर पर चल रहा Rescue Operation
घटनास्थल पर NDRF, SDRF, भारतीय सेना, पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार काम कर रही है। भारी मशीनों और आधुनिक ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।
लगातार बारिश और पहाड़ी इलाके की कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम चौबीसों घंटे अभियान में जुटी हुई है।
सरकार ने मांगी पूरी रिपोर्ट
हादसे के बाद राज्य सरकार ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पूरे देश की नजर Rescue Operation पर
सिक्किम का यह हादसा केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। देशभर से लोग लापता मजदूरों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।
फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन का कहना है कि मौसम चाहे जितनी चुनौती पेश करे, अंतिम मजदूर तक पहुंचने की हर संभव कोशिश की जाएगी।
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