जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आ रही तस्वीरें और परिवारों की आपबीती इस घटना की गंभीरता को बयां कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। इस बीच घायल जवानों के परिजनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उनके पिता और परिवार के सदस्य ड्यूटी से घर लौटे, तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। परिवारों का कहना है कि यह दृश्य उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था।
‘वर्दी पूरी तरह खून से लाल थी’
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके पिता कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर तैनात थे। शाम को जब वे घर पहुंचे तो उनकी वर्दी खून से लाल थी और शरीर पर चोट के कई निशान थे। परिवार के सदस्यों ने कहा कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी किस तरह जोखिम उठाते हैं।
एक परिजन ने कहा, “जब हमने पापा को देखा तो उनकी हालत देखकर पूरे परिवार की आंखें नम हो गईं। वे दर्द में थे, लेकिन सबसे पहले यही बोले कि ड्यूटी निभाना उनका फर्ज था।”
परिजनों का आरोप- ‘प्रदर्शन में स्टूडेंट नहीं, उपद्रवी थे’
घायल जवानों के परिवारों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद थे, जिन्होंने पुलिस पर हमला किया। उनका कहना है कि यदि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होता तो इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल नहीं होते।
हालांकि, इस मामले में अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी बातें रख रहे हैं। घटना की परिस्थितियों और हिंसा के कारणों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
घटना के बाद बढ़ी सुरक्षा
हिंसा के बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना दोबारा न हो। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
ड्यूटी निभाते पुलिसकर्मियों के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन का हिंसक रूप लेना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। ऐसे हालात में पुलिसकर्मियों पर सबसे अधिक जिम्मेदारी होती है, क्योंकि उन्हें कानून का पालन कराते हुए भी संयम बनाए रखना पड़ता है।
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