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Canada PGWP पढ़ाई पूरी, लाखों खर्च फिर भी Work Permit से इनकार; Punjabi Students का बड़ा Protest

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विदेश में बेहतर शिक्षा और सुनहरे भविष्य का सपना लेकर हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा (Canada) का रुख करते हैं। लेकिन इस समय कनाडा में पढ़ रहे सैकड़ों भारतीय छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। खासतौर पर पंजाब से जुड़े 500 से अधिक छात्र पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नहीं मिलने के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। कई छात्र कई दिनों से धरना दे रहे हैं, जबकि कुछ ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद अब उन्हें काम करने की अनुमति नहीं मिल रही। इससे उनका करियर, आर्थिक स्थिति और भविष्य तीनों दांव पर लग गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे अधिकांश छात्र अल्बर्टा (Alberta) के विभिन्न कॉलेजों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इनमें Portage College के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने एडमिशन लिया था, तब उन्हें पढ़ाई पूरी होने के बाद Post-Graduation Work Permit (PGWP) मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब बड़ी संख्या में उनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।

छात्रों का कहना है कि परिवारों ने कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। कॉलेज फीस, रहने का खर्च और अन्य जरूरतों पर लाखों रुपये खर्च हुए। अब वर्क परमिट नहीं मिलने से वे न नौकरी कर पा रहे हैं और न ही आगे स्थायी निवास (PR) की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की क्या मांग है?

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी केवल एक मांग है कि उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पोस्टर लेकर नारे लगाए—

“We Studied Here, We Deserve to Work Here”

यानी, “हमने यहां पढ़ाई की है, इसलिए हमें यहां काम करने का मौका मिलना चाहिए।”

कई छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा तो उनका करियर और परिवार की वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी।

Alberta Premier Danielle Smith का सख्त बयान

इस पूरे विवाद के बीच अल्बर्टा की प्रीमियर Danielle Smith का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने साफ कहा कि जिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के पास वैध वीजा, वर्क परमिट या कानूनी रूप से रहने की अनुमति नहीं है, उन्हें कनाडा छोड़कर अपने देश लौटना होगा।

उन्होंने कहा कि कनाडा के इमिग्रेशन नियम सभी के लिए समान हैं और सरकार इनमें कोई विशेष छूट नहीं दे सकती। उनके इस बयान के बाद छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

छात्रों को मिला राजनीतिक समर्थन

प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कुछ कनाडाई सांसदों ने मुलाकात की और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया। छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करेगी और कोई समाधान निकलेगा।

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से वर्क परमिट को लेकर किसी बड़े राहत पैकेज या नीति बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

क्यों बढ़ रही है Canada में सख्ती?

पिछले कुछ वर्षों में कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि शिक्षा प्रणाली का गलत इस्तेमाल रोकना, इमिग्रेशन प्रक्रिया को संतुलित रखना और स्थानीय रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

इन्हीं बदलावों के चलते अब वर्क परमिट और स्थायी निवास (PR) से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए हैं।

भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

भारत, खासकर पंजाब, हर साल कनाडा भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सबसे बड़ी संख्या वाले राज्यों में शामिल है। अधिकांश छात्र पढ़ाई के बाद नौकरी और फिर Permanent Residency (PR) की उम्मीद लेकर कनाडा जाते हैं।

ऐसे में वर्क परमिट पर आई इस सख्ती ने हजारों भारतीय छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों को अब किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले वर्क परमिट और इमिग्रेशन नियमों की पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रदर्शन जारी है और छात्र अपने मामलों की दोबारा समीक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, अल्बर्टा सरकार अपने रुख पर कायम है कि जिन छात्रों के पास वैध कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें देश छोड़ना होगा।

अब सबकी नजर कनाडा सरकार के अगले फैसले पर है। यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो सैकड़ों भारतीय छात्रों को वापस लौटना पड़ सकता है। यह मामला सिर्फ वर्क परमिट का नहीं, बल्कि उन परिवारों के सपनों का भी है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई दांव पर लगा दी।

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Yukta

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इंदौर में शिवाजी महाराज की प्रतिमा के ढांचे पर विवाद, नगर निगम की कार्रवाई के बाद थाने पहुंचे रहवासी और हिंदू संगठन

इंदौर के मोती तबेला इलाके में शासकीय भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए तैयार किए जा रहे ढांचे को नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। कार्रवाई से नाराज स्थानीय रहवासी, क्षेत्रीय पार्षद और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता गुरुवार रात पंढरीनाथ थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने थाने के बाहर नारेबाजी करते हुए निर्माणाधीन चबूतरा तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया। सरकारी जमीन पर तैयार किया गया था चबूतरा जानकारी के मुताबिक, मोती तबेला क्षेत्र में शासकीय भूमि पर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए मौके पर चबूतरा बनाया गया था। गुरुवार को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और निर्माणाधीन ढांचे को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। ढांचा हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में विरोध शुरू हो गया। पार्षद के नेतृत्व में थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी क्षेत्रीय पार्षद रूपाली पंडित के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसके बाद सभी जुलूस के रूप में पंढरीनाथ थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने चबूतरा तोड़ने की कार्रवाई में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रतिमा स्थापना को लेकर अनुमति देने की मांग भी रखी। प्रतिमा स्थापना की अनुमति देने की मांग पार्षद रूपाली पंडित और प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए विधिवत अनुमति दी जाए। उन्होंने बिना संवाद के कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया। पार्षद की ओर से मामले को लेकर पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई है।

जियो-बीपी और नायरा पंपों पर डीजल की लिमिट, 50-70 लीटर तक ही बिक्री; महंगे क्रूड से कंपनियों को नुकसान

जियो-बीपी और नायरा एनर्जी के कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को लेकर लिमिट तय किए जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो-बीपी के कुछ पंपों पर एक वाहन को एक बार में अधिकतम 50 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है। वहीं, नायरा एनर्जी के कुछ पंपों पर 70 से 200 लीटर तक की सीमा बताई जा रही है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 21 सितंबर को 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस स्थिति का असर तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ा है। वहीं, देश में 90% से ज्यादा पेट्रोल पंप संचालित करने वाली सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—के पंपों पर ऐसी किसी डीजल सीमा की जानकारी नहीं है। सवाल 1: जियो-बीपी और नायरा पंपों पर कितनी लिमिट? जियो-बीपी: रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ पंपों पर एक वाहन को एक बार में अधिकतम 50 लीटर डीजल दिया जा रहा है। कुछ पंपों पर प्रतिदिन 6,000 लीटर से अधिक डीजल की बिक्री नहीं करने की सीमा भी बताई गई है। नायरा एनर्जी: कंपनी के कुछ पेट्रोल पंपों पर एक बार में 70 से 200 लीटर तक डीजल देने की सीमा बताई गई है। सवाल 2: ट्रकों और लॉजिस्टिक्स पर क्या असर? सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर सामान्य रूप से डीजल उपलब्ध होने के बावजूद लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों और मालवाहक वाहनों को कुछ इलाकों में परेशानी हो सकती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और हाईवे के उन हिस्सों में जहां पेट्रोल पंप काफी दूरी पर हैं, वहां वाहन चालकों को एक बार में जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पाने से यात्रा प्रभावित हो सकती है। सवाल 3: कच्चे तेल की कीमत कितनी बढ़ी? रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत 21 सितंबर को 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस साल इसकी औसत कीमत करीब 66 डॉलर प्रति बैरल बताई गई है। यानी मौजूदा कीमत साल के औसत स्तर से काफी ऊपर पहुंच गई है। सवाल 4: क्या पेट्रोल-डीजल महंगा होगा? कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती है, तो तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के बीच खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। सवाल 5: तेल कंपनियों को कितना नुकसान? रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल कंपनियों को डीजल की बिक्री पर करीब 9 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 8 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल को मिलाकर रोजाना करीब 530 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। इसी तरह के मार्जिन दबाव के बीच कुछ निजी कंपनियों की ओर से डीजल की बिक्री सीमित करने की बात सामने आई है। सवाल 6: डीजल की किल्लत की वजह क्या है? डीजल की उपलब्धता पर दबाव की एक वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों को भी बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको की पाइपलाइन पर हमले के बाद भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते भारतीय तेल कंपनियों को दूसरे स्रोतों से अपेक्षाकृत महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार देश में डीजल खत्म नहीं हुआ है। कुछ निजी कंपनियों ने घाटे से बचने के लिए सीमित अवधि के लिए कुछ पंपों पर बिक्री कम करने का फैसला किया है। नोट: डीजल की बिक्री सीमा, कंपनियों के नुकसान और कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़े आंकड़े रिपोर्ट्स और उपलब्ध अनुमानों पर आधारित हैं।

राहुल गांधी का आरोप- छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में हुई ‘वोट चोरी’, CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।  राहुल गांधी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी वोट चोरी हुई है और उनके तकनीकी विशेषज्ञों ने चुनाव आयोग की कथित गलती पकड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की CEC के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उनकी आपत्ति नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कानून से ऊपर रखा है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र रहना चाहिए। ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों का जिक्र राहुल गांधी ने अपने आरोपों के दौरान छत्तीसगढ़ के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का भी जिक्र किया। उन्होंने इन राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान अचानक खत्म होने पर सवाल उठाया। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।  बोले- ‘वोट चोरी के बाद कानून चोरी’ राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट चोरी के जरिए किसी को चुनाव में जीत मिलती है और उन्हीं वोटों से चुने गए सांसद कानून बनाते हैं, तो मामला सिर्फ वोट चोरी तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ से जोड़ा। राहुल गांधी के मुताबिक, मतदाताओं के जनादेश से जुड़ी कथित गड़बड़ी का असर संसद और कानून बनाने की प्रक्रिया की वैधता पर भी पड़ता है।  छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े छत्तीसगढ़ के 2023 विधानसभा चुनाव में कुल 90 सीटों में BJP ने 54 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 35 सीटें मिली थीं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) को एक सीट मिली थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक BJP को 46.27% और कांग्रेस को 42.23% वोट मिले थे।  दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर में करीब 4 प्रतिशत का अंतर था, जबकि सीटों के परिणाम में अंतर अधिक रहा। चुनाव आयोग ने इन परिणामों का विस्तृत सांख्यिकीय रिकॉर्ड भी जारी किया है।  इन चुनाव परिणामों का उल्लेख राहुल गांधी के मौजूदा आरोपों के संदर्भ में किया गया है; उपलब्ध चुनाव आयोग के आंकड़े अपने आप में ‘वोट चोरी’ के आरोप को साबित नहीं करते। EVM को लेकर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि जनता ने जो जनादेश दिया है, वह स्वीकार है और समीक्षा के बाद हार के कारणों का पता चलेगा। EVM को लेकर उठ रहे सवालों पर बघेल ने कहा था कि जब भी इस मुद्दे पर बात होती है तो BJP को आपत्ति होती है और उन्होंने सवाल उठाया था कि ऐसा क्यों है।

ट्रम्प-जिनपिंग की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म, बोले- अमेरिका और चीन दोस्त; जिनपिंग ने कहा- रेस हो, रेसलिंग नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच संबंधों और आपसी सहयोग पर बात की। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और चीन दोस्त हैं और दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के लिए मिलकर काम करना फायदेमंद है, जबकि टकराव से दोनों को नुकसान होगा। जिनपिंग बोले- अमेरिका और चीन में रेस हो, रेसलिंग नहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन इसे टकराव में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका-चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं। दोनों देशों की कोशिश एक-दूसरे से आगे निकलने की होनी चाहिए, न कि ऐसी लड़ाई जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो।” जिनपिंग के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग से दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है, जबकि टकराव दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। कोर्ट के आदेश के बाद पत्रकारों को व्हाइट हाउस में एंट्री CNN, पॉलिटिको और MS NOW के पत्रकारों को करीब 12 बजे अमेरिकी समय के मुताबिक व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश की अनुमति मिली। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बावजूद इन पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने 23 सितंबर की रात करीब 1 बजे आदेश जारी कर इन पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश देने को कहा था। इसके बावजूद 24 सितंबर की सुबह पत्रकारों को अंदर जाने से रोका गया। इसके बाद तीनों मीडिया संस्थान कोर्ट पहुंचे और तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन से दोपहर 12:30 बजे तक जवाब मांगा था। इस विवाद के बीच व्हाइट हाउस में ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात का पत्रकारों ने बहिष्कार किया। अमेरिकी टीवी चैनलों पर बैठक का लाइव वीडियो भी नहीं दिखाया गया। बाद में दोपहर में पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। प्रोटोकॉल तोड़कर जिनपिंग को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे ट्रम्प चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार सुबह अमेरिका पहुंचे। उनके स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान ट्रम्प के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद थीं। शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं।

मध्य प्रदेश में शुक्रवार से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, 7 शहरों में दौड़ेंगी 351 बसें; ₹2 प्रति किमी किराया तय

मध्य प्रदेश में शुक्रवार से सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत होने जा रही है। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 7 शहरों में कुल 351 बसें संचालित की जाएंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी बस सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत करेंगे। सेवा के शुभारंभ से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने बसों को देखा और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह भी मौजूद रहे। सीएम बोले- बेहतर और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा दोबारा शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। एक व्यवस्था के तहत संचालित होंगी बसें सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाने की योजना है। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे संबंधित फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि यह काम संबंधित बस एजेंसियों की ओर से किया गया है। सुगम परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है। इन बसों में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह उपलब्ध कराई गई है। बसों में यात्रियों के प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है।

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