पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित तौर पर जुड़े एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई है कि आरोपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को निशाना बनाने की योजना से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को कुछ समय से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों और धमकी भरे इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद STF ने तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर एक विशेष अभियान चलाया।
ऑपरेशन के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संपर्क होने की आशंका सामने आई। फिलहाल एजेंसियां इस दावे की पुष्टि के लिए हर पहलू की जांच कर रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की हो रही फोरेंसिक जांच
गिरफ्तार आरोपी के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। इन सभी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था। उसके ईमेल, चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
क्या सचमुच CM को बनाया गया था निशाना?
अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर हमला निश्चित रूप से होने वाला था। जांच अधिकारी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपी की मंशा क्या थी और क्या उसके पास किसी साजिश को अंजाम देने की वास्तविक तैयारी थी।
यही वजह है कि एजेंसियां फिलहाल पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए हर सबूत की बारीकी से जांच कर रही हैं।
बढ़ाई गई मुख्यमंत्री की सुरक्षा
मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की गई है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में भी मुख्यमंत्री को लेकर कुछ धमकी भरे इनपुट मिले थे। ऐसे में मौजूदा गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है।
कई एजेंसियां कर रहीं संयुक्त जांच
इस मामले की जांच केवल बंगाल STF तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। जांचकर्ताओं का फोकस इस बात पर है कि आरोपी के देश के भीतर या सीमा पार किसी आतंकी नेटवर्क से संबंध थे या नहीं।
यदि जांच में किसी बड़े मॉड्यूल के संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
अफवाहों से बचने की अपील
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट दावों पर भरोसा न करें। केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित साजिश कितनी गंभीर थी और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
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