साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल आईबी (Intelligence Bureau) अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। दिल्ली की अदालत ने इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार ने न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं था, बल्कि उन दंगों की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
कैसे हुई थी अंकित शर्मा की हत्या?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले थे। जांच एजेंसियों का आरोप था कि हिंसक भीड़ ने उन पर हमला किया और उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने विस्तृत जांच शुरू की और कई लोगों को गिरफ्तार किया।
अदालत ने किन आधारों पर सुनाई सजा?
लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेज पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांचों आरोपियों को हत्या और दंगे से जुड़ी विभिन्न धाराओं में दोषी माना।
सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि भीड़ की हिंसा के दौरान किसी व्यक्ति, विशेषकर एक सरकारी अधिकारी की हत्या, समाज और कानून दोनों के खिलाफ गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि कानून के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे।
परिवार ने कहा—लंबे इंतजार के बाद मिला न्याय
फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार ने संतोष जताया। परिवार का कहना है कि पिछले छह वर्षों से वे अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे थे और अब उन्हें न्याय मिलने का एहसास हो रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सजा से उनके बेटे की कमी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन अदालत का फैसला यह भरोसा दिलाता है कि कानून अपना काम करता है।
क्यों चर्चा में रहा यह मामला?
2020 के दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड उन मामलों में शामिल रहा, जिस पर पूरे देश की नजर बनी रही। जांच, गिरफ्तारी, आरोप तय होने से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा।
इस फैसले को दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे अहम न्यायिक निर्णयों में से एक माना जा रहा है।
फैसले का क्या संदेश?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि भीड़ की हिंसा और सुनियोजित हत्या जैसे अपराधों को कानून किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। न्यायिक प्रक्रिया भले समय ले, लेकिन गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
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