कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को लेकर बड़ा बयान दिया है। थरूर का कहना है कि संघ के मूल विचार और उसका हिंदू राष्ट्र से जुड़ा लक्ष्य अब भी कायम है। हालांकि, उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को संगठन के रुख में संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा है।
थरूर के मुताबिक, RSS लंबे समय से भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की बात करता रहा है। उनके अनुसार संगठन की वैचारिक दिशा को पूरी तरह बदला हुआ मानना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, मोहन भागवत के कुछ हालिया बयानों से यह जरूर संकेत मिलता है कि संघ अपने विचारों को मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से नए तरीके से पेश कर रहा है।
RSS की विचारधारा पर क्या बोले थरूर?
शशि थरूर ने RSS की विचारधारा पर बात करते हुए कहा कि संगठन का मूल उद्देश्य समझना जरूरी है। उनके अनुसार, संघ की विचारधारा में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है।
थरूर का मानना है कि किसी संगठन की विचारधारा में बदलाव केवल बयानों से तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसके लंबे समय के काम, नीतियों और सार्वजनिक रुख को भी देखना पड़ता है।
Bhagwat के बयान को क्यों माना बदलाव का संकेत?
RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। थरूर ने भी माना कि भागवत की ओर से दिए गए कुछ संदेशों को बदलाव की दिशा में संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि RSS ने अपनी मूल विचारधारा पूरी तरह बदल ली है। थरूर के बयान का मुख्य संदेश यही है कि संगठन की वैचारिक नींव और उसके मौजूदा सार्वजनिक रुख के बीच अंतर को समझने की जरूरत है।
Hindu Rashtra का मुद्दा फिर चर्चा में
भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अवधारणा RSS और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के विचार भी अलग रहे हैं।
थरूर के ताजा बयान ने एक बार फिर इस बहस को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ RSS के पुराने वैचारिक रुख की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर भागवत के हालिया बयानों को बदलते समय के साथ संगठन की भाषा में आए बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं?
शशि थरूर का बयान ऐसे समय आया है जब RSS की भूमिका और उसकी विचारधारा को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। थरूर ने एक ओर संघ के पुराने वैचारिक लक्ष्य की ओर इशारा किया, तो दूसरी ओर भागवत के बयानों में दिखाई दे रहे बदलाव को भी नजरअंदाज नहीं किया।
कुल मिलाकर, थरूर का रुख यह बताता है कि RSS की विचारधारा को समझने के लिए केवल पुराने बयानों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। संगठन के मौजूदा बयानों और उसके भविष्य के रुख पर भी नजर रखनी होगी।
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