NEET Paper Leak Case को लेकर CBI की जांच में एक के बाद एक गंभीर बातें सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो गई थी। आरोप है कि परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र तैयार होने के दौरान ही सवालों को याद किया और बाद में इन्हें छात्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
CBI की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि पेपर से जुड़े सवालों को छात्रों तक पहुंचाने के लिए WhatsApp और Telegram जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेपर तैयार होने के दौरान सवाल याद करने का आरोप
जांच से जुड़े दावों के अनुसार, कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ NTA एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया था। इसके बाद इन सवालों को आगे पहुंचाने की कोशिश की गई।
CBI का मानना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पहले से बनाई गई योजना हो सकती है। एजेंसी इसी कड़ी को जोड़ते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र से संबंधित जानकारी किस स्तर पर बाहर निकली और किन लोगों के बीच इसका आदान-प्रदान हुआ।
WhatsApp और Telegram बने कथित जरिया
जांच में डिजिटल माध्यमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। आरोप है कि प्रश्नपत्र से संबंधित सवालों या उनकी जानकारी को WhatsApp और Telegram के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया।
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से ऐसी जानकारी को कम समय में कई लोगों तक पहुंचाना आसान हो जाता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां डिजिटल चैट, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रही हैं।
छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ी चिंता
NEET जैसी परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उम्मीद लेकर विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की कोई भी खबर छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा देती है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी वास्तव में परीक्षा से पहले बाहर गई थी, तो वह सुरक्षा व्यवस्था को पार करके बाहर कैसे पहुंची और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
CBI जांच में आगे क्या?
CBI इस मामले में कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी किसने हासिल की, उसे किस तरह सुरक्षित रखा गया और फिर छात्रों तक कैसे पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी डिजिटल सबूतों के साथ-साथ आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल जांच से सामने आए दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत की कार्यवाही और CBI की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित पेपर लीक की पूरी साजिश किस तरह काम कर रही थी और इसमें कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे।
NEET Paper Leak Case ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि देश की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है।
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