चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। रिपोर्टों के मुताबिक CJP ने 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देने पर देशभर में आंदोलन करने की बात कही है। दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में CEC के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया।
SIR में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने का दावा
विवाद का बड़ा केंद्र SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलाव हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट, अपात्र या अन्य मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले नामों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना है।
वहीं विपक्षी दलों ने इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत कई नेताओं ने SIR की प्रक्रिया की समीक्षा और पुराने मतदाता रिकॉर्ड को बहाल करने की मांग की है।
Election Commission के अंदर मतभेद की रिपोर्ट
मामला उस रिपोर्ट के बाद और गरमा गया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने इसके प्रावधानों में किए गए कुछ बदलावों को लेकर सवाल उठाए थे।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की। वहीं AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने SIR की पूरी प्रक्रिया को रद्द करने और पुराने मतदाता रिकॉर्ड को बहाल करने की मांग रखी।
TMC नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल में राज्यसभा में CEC को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव लाने के लिए 70 से अधिक सांसदों का समर्थन होने का दावा किया गया था।
चुनाव आयोग ने मतभेद की खबरों को खारिज किया
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर औपचारिक मतभेद की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है और प्रक्रिया के तहत अपात्र नामों को हटाने के साथ पात्र मतदाताओं को शामिल किया जा रहा है।
फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने और आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़े दावों को लेकर आगे की कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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