दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ सामने आईं दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अपराध करने वालों के मन में कानून का डर हो, ताकि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सामने आईं रेप की तीन घटनाओं का Suo Motu Cognizance लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा और अपराधों की रोकथाम को लेकर कई सवाल पूछे।
अपराधियों में कानून का डर होना जरूरी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए प्रभावी Deterrence जरूरी है। यानी अपराध करने वाले व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि कानून तोड़ने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कोर्ट की चिंता सिर्फ आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रही। सवाल यह भी है कि पुलिस ऐसी व्यवस्था कैसे बनाए कि अपराध की संभावना को पहले ही कम किया जा सके।
CCTV लगाने से ही नहीं रुकेगा Crime
कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर लगे CCTV कैमरों और उनकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने जानना चाहा कि अगर किसी इलाके में कैमरे लगे हैं, तो क्या उनकी लगातार निगरानी भी की जाती है?
दरअसल, CCTV किसी घटना के बाद आरोपी की पहचान करने में मदद कर सकता है, लेकिन अपराध को होने से पहले रोकने के लिए Active Police Monitoring और तेज Response System जरूरी है।
महिलाओं को हर जगह महसूस होनी चाहिए Safety
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली में महिलाओं को दिन हो या रात, सड़क पर चलने से लेकर मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित महसूस होना चाहिए।
अदालत ने माना कि सिर्फ घटना के बाद जांच और गिरफ्तारी से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। पुलिस की मौजूदगी, संवेदनशील इलाकों में निगरानी और समय पर कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
3 रेप मामलों पर Supreme Court की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-NCR में हाल में सामने आईं रेप की घटनाओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा।
कोर्ट की सुनवाई में मुख्य सवाल यही रहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को रोकने के लिए जमीन पर किस तरह की व्यवस्था काम कर रही है और उसमें कहां सुधार की जरूरत है।
Prevention पर Court का फोकस
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू अपराध होने के बाद की कार्रवाई के बजाय Crime Prevention पर जोर देना है। अदालत का कहना है कि कानून का डर तभी प्रभावी होगा, जब पुलिस की निगरानी मजबूत हो और अपराध की आशंका वाले स्थानों पर समय रहते कार्रवाई हो।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोर्ट की यह सुनवाई एक बार फिर यह सवाल सामने लाती है कि सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के स्तर पर कितनी प्रभावी तैयारी है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
