Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के कई विपक्षी सांसदों ने ‘Save Democracy March’ निकाला। सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कई सांसद सड़क पर ही बैठ गए और विरोध जताने लगे।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे चुनाव आयोग तक जाकर मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं। मार्च के मद्देनजर संसद से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
जमीन पर बैठे विपक्षी सांसद
मार्च के दौरान जैसे ही सांसद आगे बढ़े, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। रास्ता बंद किए जाने के बाद विपक्षी नेता और सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए। इस दौरान SIR के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision में बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्षी दल इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
SIR में 13 करोड़ नाम हटने का दावा
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची से जुड़े करीब 13 करोड़ नामों का है। विपक्ष इस आंकड़े को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहा है और जानना चाहता है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर करने का आधार क्या रहा।
हालांकि, Election Commission ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सीधे तौर पर डिलीट किए जाने के दावे को भ्रामक बताया है। आयोग के अनुसार, यह आंकड़ा ऐसे मतदाताओं से जुड़ा है जिन्हें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है। आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
CEC के इस्तीफे की भी मांग
SIR को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कुछ विपक्षी दल CEC के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग लगातार SIR प्रक्रिया का बचाव कर रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
Form 6 को लेकर भी विवाद
SIR विवाद के बीच Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी सामने आया है। विपक्ष की ओर से इस पर सवाल उठाए गए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और कोर्ट ने Form 6 से जुड़े रिकॉर्ड को देखने की बात कही है।
इस मुद्दे ने विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से चल रही तनातनी को और बढ़ा दिया है।
आगे भी जारी रह सकता है विरोध
‘Save Democracy March’ को विपक्ष के SIR विरोधी अभियान की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों और जिलों में भी पदयात्रा, बैठक और प्रदर्शन करने की बात कही है।
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग प्रक्रिया को नियमों के तहत होने वाला revision बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और voter list का मुद्दा राजनीति के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है।
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