दिल्ली में CJP प्रदर्शन (CJP Protest) से पहले हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने तीनों को जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों को 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचने के दौरान हिरासत में लिया गया था। वे विमान से दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और उनकी हिरासत को लेकर सवाल उठने लगे।
CJP Protest से पहले क्यों हिरासत में लिए गए थे तीनों?
अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से जोड़कर हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किया जाना था। प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आपत्तियां शामिल थीं।
संगठन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और उनसे जुड़े तथ्यों को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
विमान से दिल्ली पहुंचते ही हुई कार्रवाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों नेता विमान से दिल्ली पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद CJP के प्रदर्शन को लेकर हलचल बढ़ गई। संगठन की ओर से यह भी संकेत दिया गया था कि यदि प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लिया जाता है, तो दूसरे सदस्य प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई और विरोध दर्ज कराने के अधिकार को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया।
Court से मिली राहत, रिहाई का आदेश
हिरासत में लिए गए तीनों नेताओं के लिए कोर्ट का आदेश राहत लेकर आया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, जमानत और रिहाई से जुड़ी शर्तों की जानकारी के लिए कोर्ट के आधिकारिक आदेश को देखना जरूरी है। इस आदेश को मामले का अंतिम फैसला मानना भी सही नहीं होगा।
CJP Protest और SIR का मुद्दा फिर चर्चा में
CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों के बीच तीन सदस्यों की हिरासत और फिर कोर्ट से मिली राहत ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से राहत मिली है। मामले से जुड़ी आगे की जानकारी और कोर्ट के आदेश की शर्तें सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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