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Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें कथा, मंत्र और महत्त्व

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नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों को धैर्य, शक्ति और स्थिरता की प्रेरणा मिलती है।

मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव के अपमान से दुखी होकर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं।

मां शैलपुत्री का स्वरूप और महत्त्व

  • मां के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल होता है।
  • उनका वाहन वृषभ यानी बैल है।
  • उनकी पूजा को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल पर मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. दीपक जलाकर रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें।
  4. मां के मंत्र का जाप कर आरती करें।

मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।

भोग: मां को परंपरागत रूप से गाय के घी का भोग अर्पित किया जाता है।

Nikhil

catalystbpl@gmail.com

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CJP Protest

CJP Protest अभिजीत दिपके समेत 3 नेताओं को Bail, कोर्ट ने रिहाई का दिया आदे

दिल्ली में CJP प्रदर्शन (CJP Protest) से पहले हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने तीनों को जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों को 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचने के दौरान हिरासत में लिया गया था। वे विमान से दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और उनकी हिरासत को लेकर सवाल उठने लगे। CJP Protest से पहले क्यों हिरासत में लिए गए थे तीनों? अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से जोड़कर हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किया जाना था। प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आपत्तियां शामिल थीं। संगठन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और उनसे जुड़े तथ्यों को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। विमान से दिल्ली पहुंचते ही हुई कार्रवाई रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों नेता विमान से दिल्ली पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद CJP के प्रदर्शन को लेकर हलचल बढ़ गई। संगठन की ओर से यह भी संकेत दिया गया था कि यदि प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लिया जाता है, तो दूसरे सदस्य प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई और विरोध दर्ज कराने के अधिकार को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया। Court से मिली राहत, रिहाई का आदेश हिरासत में लिए गए तीनों नेताओं के लिए कोर्ट का आदेश राहत लेकर आया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत और रिहाई से जुड़ी शर्तों की जानकारी के लिए कोर्ट के आधिकारिक आदेश को देखना जरूरी है। इस आदेश को मामले का अंतिम फैसला मानना भी सही नहीं होगा। CJP Protest और SIR का मुद्दा फिर चर्चा में CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों के बीच तीन सदस्यों की हिरासत और फिर कोर्ट से मिली राहत ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। फिलहाल, इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से राहत मिली है। मामले से जुड़ी आगे की जानकारी और कोर्ट के आदेश की शर्तें सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां शैलपुत्री पूजा, Navratri 2026, मां शैलपुत्री कथा, नवरात्रि पूजा विधि, शैलपुत्री मंत्र।

Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें कथा, मंत्र और महत्त्व

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों को धैर्य, शक्ति और स्थिरता की प्रेरणा मिलती है। मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव के अपमान से दुखी होकर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं। मां शैलपुत्री का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भोग: मां को परंपरागत रूप से गाय के घी का भोग अर्पित किया जाता है।
Elon Musk

Elon Musk vs Ambani: ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर मस्क का तंज, Starlink का License क्यों अटका?

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर Elon Musk और Mukesh Ambani के बीच बहस तेज हो गई है। SpaceX की इंटरनेट कंपनी Starlink की भारत में एंट्री में हो रही देरी पर मस्क ने सोशल मीडिया के जरिए मुकेश अंबानी पर निशाना साधा। उन्होंने अंबानी को ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर संबोधित किया। इस टिप्पणी के बाद भारत के टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा और Starlink की मंजूरी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मस्क का कहना है कि Starlink दुनिया के कई देशों में अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन भारत में कंपनी को कारोबार शुरू करने के लिए अभी भी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। उन्होंने भारत में प्रभावशाली कारोबारी हितों को लेकर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली सभी कंपनियों को सुरक्षा और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। Elon Musk ने Mukesh Ambani को क्यों कहा ‘Dear Prime Minister’? एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुकेश अंबानी को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर भारत में अंबानी के कारोबारी प्रभाव पर तंज कसा। मस्क की इस पोस्ट को Starlink की भारत में एंट्री और टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। मस्क लंबे समय से भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि Starlink के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ब्रॉडबैंड की सुविधा सीमित है। हालांकि, मस्क की टिप्पणी और कारोबारी हितों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे मामले को सरकार की मंजूरी प्रक्रिया और संबंधित तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है। Starlink India Launch में देरी की असली वजह क्या है? Starlink को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं देने के लिए जरूरी टेलीकॉम लाइसेंस मिल चुका है। लेकिन लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी तुरंत अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू कर सकती है। इसके लिए सुरक्षा संबंधी शर्तों, तकनीकी आवश्यकताओं और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क से अलग तकनीक पर काम करता है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी का नेटवर्क देश के सुरक्षा मानकों और दूरसंचार नियमों के अनुरूप काम करे। यही वजह है कि Starlink की व्यावसायिक शुरुआत के लिए जरूरी औपचारिकताएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। मंजूरी में देरी को केवल किसी एक कारोबारी समूह के दबाव से जोड़ने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। Jio और Starlink के बीच क्यों हो रही है चर्चा? भारत में इंटरनेट सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। रिलायंस जियो पहले से मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। दूसरी ओर, एलन मस्क की Starlink सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराने पर काम करती है। इस क्षेत्र में भारती समूह समर्थित Eutelsat OneWeb भी एक प्रमुख नाम है। इन कंपनियों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में अपनी सेवाओं का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, तीनों कंपनियों की तकनीक और कारोबारी रणनीति अलग-अलग है। मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ब्रॉडबैंड जहां शहरी और अन्य नेटवर्क-कवर्ड क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं, वहीं सैटेलाइट इंटरनेट दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी का विकल्प बन सकता है। Starlink की सेवाएं शुरू होने पर भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक कीमत, नेटवर्क की उपलब्धता और उपकरणों की लागत पर निर्भर करेगी। सरकार ने एकाधिकार के आरोपों पर क्या कहा? Starlink की मंजूरी को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार का रुख है कि किसी भी कंपनी को सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित सुरक्षा और नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी। संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना व्यावसायिक संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या Starlink को सभी जरूरी मंजूरियां समय पर मिल पाएंगी। फिलहाल, मस्क के आरोपों और मंजूरी में देरी के बीच किसी सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भारत में Starlink शुरू होने से आम लोगों को क्या फायदा होगा? अगर Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करती है, तो इसका फायदा खासकर उन क्षेत्रों में हो सकता है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। सैटेलाइट तकनीक के जरिए दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना संभव हो सकता है। इसके कुछ संभावित फायदे हैं: हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब सेवा उपलब्ध होगी और उसकी कीमत आम ग्राहकों की पहुंच में होगी। Starlink License पर अब सबकी नजर एलन मस्क की ‘Dear Prime Minister Ambani’ वाली टिप्पणी ने भारत के टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक तरफ Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ सरकार सुरक्षा और नियामकीय प्रक्रियाओं को जरूरी बता रही है। फिलहाल, Starlink की व्यावसायिक शुरुआत के लिए जरूरी मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब देखना होगा कि कंपनी भारत में अपनी सेवाएं कब शुरू कर पाती है और इससे इंटरनेट बाजार में कितनी नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Trump

Trump on Nobel Prize नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला तो ट्रंप ने नॉर्वे पर उठाए सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। 2026 में यह सम्मान नहीं मिलने पर Trump ने नाराजगी जताई और दावा किया कि उन्होंने दुनिया के आठ संघर्षों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि ऐसे में उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे। ट्रंप ने 9 अक्टूबर को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक रैली के दौरान यह बात कही। उन्होंने नोबेल पुरस्कार के चयन पर सवाल उठाते हुए नॉर्वे की आलोचना की। उनके बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को खत्म करने में उनकी भूमिका कितनी रही और उन्हें यह सम्मान क्यों नहीं मिला। Nobel Peace Prize नहीं मिलने पर ट्रंप ने क्या कहा? Trump का मानना है कि उन्होंने कई देशों के बीच तनाव कम कराने और संघर्षों को रोकने में योगदान दिया है। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि आठ संघर्षों के लिए उन्हें आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे। ट्रंप ने पुरस्कार नहीं मिलने पर निराशा जाहिर की और चयन प्रक्रिया की आलोचना की। उनका कहना था कि उनके प्रयासों को वह अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं मिली, जिसके वे हकदार हैं। हालांकि, जिन संघर्षों को सुलझाने का श्रेय ट्रंप खुद को देते हैं, उनमें उनकी भूमिका और हासिल किए गए नतीजों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। नवी पिल्लई को मिला Nobel Peace Prize 2026 इस साल नोबेल शांति पुरस्कार नवी पिल्लई को दिया गया है। वह दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायविद हैं और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख रह चुकी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक काम किया है। पिल्लई के काम को न्याय और जवाबदेही को मजबूत करने के प्रयासों के लिए पहचाना जाता है। नोबेल पुरस्कार के इस फैसले के बाद ट्रंप ने चयन प्रक्रिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिल्लई के बारे में पहले नहीं सुना था। नोबेल शांति पुरस्कार का चयन स्वतंत्र नोबेल समिति करती है। ऐसे में ट्रंप की आलोचना के बावजूद इस साल का सम्मान पिल्लई को दिया गया है। India-Pakistan Conflict पर भी ट्रंप ने किया दावा ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य टकराव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों से दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ और एक बड़ा युद्ध टल गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके कदमों से करोड़ों लोगों की जान बची। हालांकि, भारत सरकार ने दोनों देशों के बीच तनाव कम होने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज किया है। इसलिए ट्रंप के बयान और भारत के आधिकारिक रुख को अलग-अलग समझना जरूरी है। भारत-पाकिस्तान के मुद्दे पर ट्रंप पहले भी कई बार इसी तरह के दावे कर चुके हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। Iran और Russia-Ukraine War पर भी कही बात अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वह इन संघर्षों को समाप्त कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। हालांकि, किसी संघर्ष में तनाव कम होना और स्थायी शांति स्थापित होना अलग-अलग बातें हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। Barack Obama को Nobel Prize मिलने पर भी उठा चुके हैं सवाल डोनाल्ड ट्रंप पहले भी नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में मिले नोबेल शांति पुरस्कार पर भी सवाल उठा चुके हैं। ओबामा को राष्ट्रपति बनने के पहले ही साल यह सम्मान दिया गया था। ट्रंप कई बार अपने प्रयासों की तुलना में इस फैसले पर सवाल उठाते रहे हैं। अब आठ नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए थे, वाला उनका बयान इसी बहस को फिर सामने ले आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Noida

Section 163 in Noida: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किन गतिविधियों पर लगी रोक? जानें Rules

Noida और ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। गौतमबुद्ध नगर जिले में 20 अक्टूबर 2026 तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर सभा, जुलूस और धरना-प्रदर्शन करने को लेकर सख्ती बरती जाएगी। त्योहारों, परीक्षाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इन आदेशों का मकसद जिले में शांति बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है। ऐसे में अगर आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा में रहते हैं या यहां किसी कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो प्रशासन की गाइडलाइन जानना जरूरी है। Noida News: आखिर क्यों लागू की गई धारा 163? गौतमबुद्ध नगर में त्योहारों, सार्वजनिक आयोजनों और परीक्षाओं के दौरान लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा विभिन्न संगठनों की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। पुलिस का जोर सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। Section 163 Guidelines: किन गतिविधियों पर रहेगी रोक? धारा 163 के तहत जारी आदेशों में कई गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं। लोगों को इन नियमों का पालन करना होगा। 1. बिना अनुमति जुलूस और प्रदर्शन नहीं सार्वजनिक स्थानों पर जुलूस निकालने, धरना देने या सभा आयोजित करने से पहले संबंधित अधिकारियों की अनुमति लेना जरूरी हो सकता है। आदेश में निर्धारित प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 2. भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध जहां आदेश के तहत लोगों के जमावड़े पर रोक लागू है, वहां निर्धारित संख्या में लोगों के एकत्र होने की अनुमति नहीं होगी। किसी भी कार्यक्रम से पहले संबंधित क्षेत्र में लागू शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है। 3. भड़काऊ संदेश और अफवाहों से बचें सोशल मीडिया पर ऐसी भ्रामक जानकारी या संदेश साझा करने से बचें, जिनसे तनाव या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। किसी भी खबर को आगे भेजने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। 4. Drone और Loudspeaker के इस्तेमाल पर नियम ड्रोन से फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करने वालों को संबंधित प्रतिबंधों और अनुमति संबंधी नियमों का पालन करना होगा। वहीं, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल भी निर्धारित समय और ध्वनि सीमा के अनुसार ही किया जा सकेगा। 5. हथियारों के प्रदर्शन और हर्ष फायरिंग पर सख्ती सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन और जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग जैसी गतिविधियों पर लागू प्रतिबंधों का पालन करना होगा। सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। 6. परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष सतर्कता परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ नियंत्रित रखने और परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष नियम लागू रहेंगे। परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को परीक्षा से संबंधित निर्देशों का पालन करना चाहिए। धारा 163 तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई? प्रशासन की ओर से जारी वैध आदेशों का उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 भी लोक सेवक के वैध आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। हालांकि, कार्रवाई मामले की परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार तय होगी। Noida News Today: 20 अक्टूबर तक रहें सतर्क गौतमबुद्ध नगर में जारी प्रतिबंधात्मक आदेश 20 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहने के लिए बताए गए हैं। इस दौरान किसी जुलूस, सार्वजनिक सभा या प्रदर्शन में शामिल होने से पहले स्थानीय पुलिस और प्रशासन से नियमों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। ध्यान रखें कि धारा 163 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि हर सार्वजनिक गतिविधि पर पूरी तरह रोक लग गई है। प्रतिबंध आदेश में लिखी शर्तों, संबंधित अनुमति और लागू अपवादों के अनुसार गतिविधियों की स्थिति तय होगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए सलाह है कि वे प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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