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Gold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे

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Gold-Silver Rate में गिरावट ने सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। बीते दो दिनों में सोना करीब ₹2,300 सस्ता होने की खबर है। वहीं, चांदी के दाम में भी लगभग ₹5,000 की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में जो लोग त्योहारों या शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उनकी नजर अब सोने-चांदी के नए भाव पर है।

आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब ₹1.44 लाख रह गई है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आए ताजा बाजार अपडेट में सोने और चांदी के भाव अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। इसलिए खरीदारी से पहले आज का रेट जरूर जांच लें।

Gold Price Today: 10 ग्राम सोने का भाव कितना है?

21 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11:25 बजे उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम सोना ₹669 सस्ता होकर ₹1,45,850 पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹1,46,519 था।

वहीं, एक अन्य बाजार अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों का अंतर अपडेट के समय और बाजार के आधार पर हो सकता है।

सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से गहने खरीदने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक-दो दिन के भाव देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा।

Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती

सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव ₹2,11,485 से घटकर ₹2,09,050 पर आ गया। यानी कीमत में ₹2,435 की कमी दर्ज की गई।

वहीं, कुछ खुदरा बाजारों में चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो बताया गया। यह अंतर बाजार और कीमत अपडेट के तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने शहर के सर्राफा बाजार से ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है।

चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि बर्तन, सिक्के और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। यही वजह है कि इसके दाम में होने वाले बदलाव पर खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी रहती है।

Gold-Silver Rate क्यों गिर रहे हैं?

सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक हालात कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।

21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से मिलने वाले संकेतों का भी इंतजार कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

हालांकि, सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह केवल एक कारक नहीं है। बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भी कीमतों की दिशा तय करती हैं।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?

अगर आप त्योहार, शादी या किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आज कीमत कम हुई है तो आने वाले दिनों में भी गिरावट जारी रहेगी।

खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • सोने की शुद्धता: 22 और 24 कैरेट के बीच का अंतर समझें।
  • हॉलमार्क: सोने के आभूषणों की शुद्धता से जुड़ी जानकारी जांचें।
  • मेकिंग चार्ज: गहने की कीमत में जुड़ने वाले अतिरिक्त शुल्क पूछें।
  • अंतिम बिल: लागू टैक्स और अन्य शुल्कों सहित कुल कीमत जानें।
  • ताजा बाजार भाव: खरीदारी के दिन अपने शहर का रेट जरूर पता करें।

Gold-Silver Price: अलग-अलग शहरों में भाव क्यों बदलते हैं?

दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की परिस्थितियां, कारोबारी मार्जिन और आभूषण बनाने के शुल्क अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।

इसके अलावा, ऑनलाइन दिखाई देने वाला बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप पर मिलने वाली कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

आज के Gold-Silver Rate पर एक नजर

21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध अलग-अलग बाजार अपडेट के अनुसार:

  • 24 कैरेट सोना: करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास।
  • चांदी: कुछ बाजार अपडेट में करीब ₹2.09 लाख प्रति किलो, जबकि कुछ खुदरा बाजारों में करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो।

ये दरें अलग-अलग बाजारों और अपडेट के समय के आधार पर हैं। इन्हें एक ही बाजार की समान दर न मानें।

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Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे। रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया। इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया। इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे। ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया। आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई। विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं। दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं। सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
Gold-Silver Rate

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Gold-Silver Rate में गिरावट ने सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। बीते दो दिनों में सोना करीब ₹2,300 सस्ता होने की खबर है। वहीं, चांदी के दाम में भी लगभग ₹5,000 की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में जो लोग त्योहारों या शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उनकी नजर अब सोने-चांदी के नए भाव पर है। आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब ₹1.44 लाख रह गई है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आए ताजा बाजार अपडेट में सोने और चांदी के भाव अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। इसलिए खरीदारी से पहले आज का रेट जरूर जांच लें। Gold Price Today: 10 ग्राम सोने का भाव कितना है? 21 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11:25 बजे उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम सोना ₹669 सस्ता होकर ₹1,45,850 पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹1,46,519 था। वहीं, एक अन्य बाजार अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों का अंतर अपडेट के समय और बाजार के आधार पर हो सकता है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से गहने खरीदने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक-दो दिन के भाव देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव ₹2,11,485 से घटकर ₹2,09,050 पर आ गया। यानी कीमत में ₹2,435 की कमी दर्ज की गई। वहीं, कुछ खुदरा बाजारों में चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो बताया गया। यह अंतर बाजार और कीमत अपडेट के तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने शहर के सर्राफा बाजार से ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि बर्तन, सिक्के और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। यही वजह है कि इसके दाम में होने वाले बदलाव पर खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी रहती है। Gold-Silver Rate क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक हालात कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। 21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से मिलने वाले संकेतों का भी इंतजार कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह केवल एक कारक नहीं है। बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भी कीमतों की दिशा तय करती हैं। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप त्योहार, शादी या किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आज कीमत कम हुई है तो आने वाले दिनों में भी गिरावट जारी रहेगी। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: Gold-Silver Price: अलग-अलग शहरों में भाव क्यों बदलते हैं? दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की परिस्थितियां, कारोबारी मार्जिन और आभूषण बनाने के शुल्क अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन दिखाई देने वाला बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप पर मिलने वाली कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। आज के Gold-Silver Rate पर एक नजर 21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध अलग-अलग बाजार अपडेट के अनुसार: ये दरें अलग-अलग बाजारों और अपडेट के समय के आधार पर हैं। इन्हें एक ही बाजार की समान दर न मानें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को करना होगा स्ट्रेस मैनेजमेंट का ऑनलाइन कोर्स, 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तनाव कम करने और काम करने के तरीके में सुधार के लिए ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य किया गया है। राज्य शासन ने मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर उपलब्ध दो कोर्स 31 अक्टूबर तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों को आदेश जारी किया है। इन कोर्स का उद्देश्य कर्मचारियों को कामकाज के दौरान होने वाले तनाव को संभालने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करना है। दो ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दो कोर्स निर्धारित किए हैं। दोनों कोर्स iGOT पोर्टल पर उपलब्ध हैं। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा करना होगा। 3 नवंबर तक शासन को देनी होगी रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से समय पर दोनों कोर्स पूरे करवाएं। किसी भी कर्मचारी का कोर्स लंबित नहीं रहना चाहिए। विभागों को कोर्स पूरा होने की जानकारी 3 नवंबर तक शासन को भेजनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी दफ्तरों में कामकाज सुधारने पर जोर सरकारी कार्यालयों में कामकाज की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को कई बार शिकायतों के निराकरण में देरी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे आम लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने ये कोर्स पूरे नहीं किए हैं। इसी को देखते हुए शासन ने 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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