मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था।
हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे।
रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया।
इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।
उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है।
इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे।
मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।
भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया।
इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे।
ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।
वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।
जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार
जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया।
आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।
खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें
खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई।
विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे।
शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं।
दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया।
रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया।
सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं।
सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
