मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला उस सॉफ्टवेयर से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची में रिकॉर्ड की जांच और गड़बड़ियों की पहचान के लिए किया जाता है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जब चुनाव आयोग से इस सॉफ्टवेयर की तकनीकी जानकारी मांगी गई, तो आयोग ने इसे सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। आयोग का कहना है कि यह जानकारी ‘Trade Secret’ यानी व्यावसायिक गोपनीयता से जुड़ी है।
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना सीधे तौर पर किसी नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। ऐसे में सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है, रिकॉर्ड में गड़बड़ी की पहचान कैसे होती है और गलत तरीके से किसी मतदाता का नाम हटने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था है, इन सवालों पर चर्चा तेज हो गई है।
RTI में SIR Software को लेकर क्या सवाल पूछे गए?
तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एमए मुजीब अय्यूब ने चुनाव आयोग से RTI के जरिए सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी मांगी थी। आवेदन में यह जानने की कोशिश की गई कि मतदाता सूची की जांच के दौरान तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।
आवेदन में प्रमुख रूप से ये सवाल शामिल थे:
- मतदाता सूची में गलतियों और विसंगतियों की पहचान के लिए किस सॉफ्टवेयर या एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया?
- क्या इस प्रक्रिया में Artificial Intelligence (AI) या Machine Learning (ML) का उपयोग किया गया?
- क्या सॉफ्टवेयर अपने आप किसी मतदाता के रिकॉर्ड को संदिग्ध मानकर जांच के लिए चिह्नित करता है?
- अगर किसी पात्र मतदाता का रिकॉर्ड गलती से चिह्नित हो जाए, तो उसे ठीक करने की क्या व्यवस्था है?
- रिकॉर्ड की जांच कौन करता है और नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम फैसला किस अधिकारी के पास होता है?
इन सवालों का मकसद यह समझना था कि SIR के दौरान मतदाता सूची की जांच किस प्रक्रिया से होती है और संभावित तकनीकी गलतियों को कैसे रोका जाता है।
Election Commission ने क्यों नहीं दी Software की जानकारी?
चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर 2026 को दिए गए जवाब में सॉफ्टवेयर से जुड़ी कुछ तकनीकी जानकारियां साझा करने से इनकार कर दिया। आयोग ने RTI Act की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी व्यावसायिक गोपनीयता, Trade Secret और बौद्धिक संपदा से संबंधित है।
AI और Machine Learning के इस्तेमाल तथा सॉफ्टवेयर के काम करने के तरीके पर पूछे गए कुछ सवालों के जवाब में आयोग ने RTI Act की धारा 2(f) का उल्लेख किया। इस प्रावधान के तहत सूचना के अधिकार में वही जानकारी शामिल होती है, जो संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध हो या उसके नियंत्रण में हो। आयोग का कहना था कि मांगे गए कुछ सवाल स्पष्टीकरण से संबंधित हैं।
रिकॉर्ड की जांच करने वाले अधिकारियों की पहचान से जुड़े सवाल पर आयोग ने धारा 8(1)(g) का भी हवाला दिया। यह प्रावधान कुछ परिस्थितियों में ऐसी जानकारी साझा करने से छूट देता है, जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
क्या SIR के लिए नया सॉफ्टवेयर बनाया गया था?
RTI के जवाब में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया था। आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने की जिम्मेदारी Electoral Registration Officer (ERO) की भूमिका से भी जोड़ी।
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। मतदाता सूची में किसी रिकॉर्ड को जांच के लिए चिह्नित करना और किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम निर्णय लेना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। नाम जोड़ने या हटाने का फैसला लागू चुनावी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अधिकारी को करना होता है।
इसलिए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों के साथ यह जानना भी जरूरी है कि मानवीय जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया किस तरह काम करती है।
SIR और ECINET को लेकर पहले भी उठे सवाल
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान तकनीकी प्रणालियों की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल सामने आए हैं। सितंबर 2026 में The Indian Express की एक रिपोर्ट में ECINET सिस्टम और अधिकारियों की निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने सॉफ्टवेयर तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर कुछ आपत्तियां दर्ज की थीं।
इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया था। आयोग ने कहा था कि अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
26 सितंबर 2026 को आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला घोषित किया था। इसमें एक स्वतंत्र IIT या IIIT विशेषज्ञ को शामिल करने की बात कही गई थी। आयोग ने यह भी बताया था कि SIR के दौरान रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकता है।
हालांकि, ECINET की समीक्षा और SIR सॉफ्टवेयर से जुड़ी RTI का मामला अलग-अलग पहलुओं से संबंधित है। दोनों को एक ही जांच या निर्णय का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा।
मतदाता सूची में नाम गलत होने पर क्या करें?
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम छूटने, विवरण गलत होने या रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने की स्थिति में संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।
मतदाता इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- अपना नाम जांचें: आधिकारिक मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
- गलती होने पर आवेदन करें: नाम जोड़ने या विवरण में सुधार के लिए लागू नियमों के अनुसार संबंधित फॉर्म भरें।
- दस्तावेज तैयार रखें: जरूरत पड़ने पर पहचान और पते से संबंधित मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें।
- निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करें: नाम हटाने या रिकॉर्ड पर आपत्ति होने की स्थिति में संबंधित ERO से प्रक्रिया और उपलब्ध उपायों की जानकारी लें।
नाम छूटने की स्थिति में Form 6 सहित संबंधित आवेदन का इस्तेमाल लागू नियमों और प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है। आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी या चुनाव आयोग के आधिकारिक निर्देशों से इसकी पुष्टि कर लेना बेहतर है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त OP Rawat ने क्या सुझाव दिया?
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने आवेदक को सक्षम प्राधिकारी के पास अपील करने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक, अपील के जरिए मांगी गई जानकारी पर दोबारा विचार कराया जा सकता है।
RTI के तहत जानकारी नहीं मिलने पर आवेदक निर्धारित समयसीमा और प्रक्रिया के अनुसार प्रथम अपील कर सकता है। इसके बाद भी समाधान नहीं मिलने पर कानून में उपलब्ध अन्य उपाय अपनाए जा सकते हैं।
SIR Software Controversy: पारदर्शिता पर क्यों हो रही चर्चा?
SIR सॉफ्टवेयर से जुड़ा विवाद केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है। इसका संबंध इस बात से भी है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट है और गलतियों को सुधारने के लिए नागरिकों को कितनी प्रभावी व्यवस्था मिलती है।
इस मामले में तीन सवाल सबसे अहम हैं। पहला, मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों की पहचान किस आधार पर होती है। दूसरा, AI या अन्य स्वचालित तकनीक का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। तीसरा, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।
फिलहाल चुनाव आयोग ने मांगी गई तकनीकी जानकारी साझा करने से इनकार किया है। आगे इस मामले में क्या जानकारी सामने आती है, यह अपील की प्रक्रिया और संबंधित आधिकारिक फैसलों पर निर्भर करेगा।
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