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PM Modi Mann Ki Baat: दिवाली पर Vocal for Local की अपील, Global Market में छा रहे भारतीय Products

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त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। कोई घर सजाने के लिए सामान खरीदता है, तो कोई अपनों के लिए खास तोहफे तलाशता है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 139वें एपिसोड में लोगों से स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने बताया कि ‘Vocal for Local’ की भावना अब भारतीय उत्पादों को देश से बाहर भी पहचान दिला रही है।

प्रधानमंत्री ने बिहार के मखाने से लेकर कर्नाटक की अरहर दाल तक के उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए दुनिया के बाजारों में नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने खादी, पारंपरिक बुनाई और आदिवासी समुदायों के उत्पादों का भी जिक्र किया।

Vocal for Local: छोटी खरीदारी से स्थानीय कारोबार को मिल सकता है सहारा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि त्योहारों पर खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को महत्व देना चाहिए। उनकी अपील का मकसद छोटे कारोबारियों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाना है।

अक्सर बाजार में खरीदारी करते समय हम ब्रांड और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन किसी स्थानीय कारीगर के लिए हर बिक्री उसकी मेहनत को आगे बढ़ाने का अवसर होती है। मिट्टी के दीये, हाथ से बनी सजावटी चीजें, स्थानीय कपड़े और पारंपरिक उपहार खरीदने से ऐसे कारोबारियों को सीधे मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने ‘Vocal for Local’ को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से देश की आर्थिक मजबूती में भी योगदान मिलता है।

बिहार का मखाना Greece पहुंचा, कर्नाटक की अरहर दाल Maldives में

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशों तक पहुंच का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव के बाजार में अपनी जगह बना रही है।

ये उदाहरण भारतीय किसानों के लिए नए बाजारों की संभावनाओं को सामने रखते हैं। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली चीजों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और मार्केटिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।

इससे किसानों और उत्पादकों को अपने सामान के लिए नए खरीदार मिलने के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, ऐसे अवसरों का वास्तविक लाभ उत्पाद की मांग, कीमत और बाजार तक पहुंच जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है।

आदिवासी उत्पादों की Packaging को मिला Good Design Award

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों से जुड़े उत्पादों और उनकी पैकेजिंग की भी चर्चा की। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को बाजार में पहुंचाया जा रहा है।

इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और पारंपरिक पहचान को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘Good Design Award’ मिला है।

यह उदाहरण दिखाता है कि किसी उत्पाद को बाजार में पहचान दिलाने के लिए उसकी गुणवत्ता के साथ-साथ पैकेजिंग और प्रस्तुति भी अहम होती है। स्थानीय परंपराओं को आधुनिक डिजाइन से जोड़कर छोटे उत्पादकों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

Khadi की बिक्री में बढ़ोतरी, कारीगरों को मिल रही पहचान

मन की बात में खादी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि गांधी जयंती के दिन खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। यह पिछले साल की तुलना में करीब 1.5 करोड़ रुपये ज्यादा बताई गई।

खादी और हस्तशिल्प से जुड़े उत्पाद केवल खरीदारी का सामान नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कारीगरों का हुनर और वर्षों पुरानी परंपराएं भी जुड़ी हैं। इन उत्पादों की मांग बढ़ने से उन्हें तैयार करने वाले लोगों को काम के नए अवसर मिल सकते हैं।

त्योहारी सीजन में खादी के कपड़े, हाथ से बने उपहार और स्थानीय हस्तशिल्प खरीदना इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के कारोबार को सहारा देने का एक तरीका हो सकता है।

Punjab में पारंपरिक बुनाई और Natural Cotton पर जोर

प्रधानमंत्री ने पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’ से जुड़ी पहल का भी उल्लेख किया। इसके तहत मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से कपास की खेती को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक बुनाई के हुनर को आगे बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

इस पहल से जुड़ी ‘नव-त्रिंजन’ परियोजना में महिलाओं को बुनाई का प्रशिक्षण देने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कौशल को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

ऐसी पहलें यह भी दिखाती हैं कि स्थानीय हुनर को आधुनिक जरूरतों से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं।

स्वच्छता और e-Sanjeevani सेवा का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बात की। उन्होंने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को फिर से बेहतर स्थिति में लाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। इस पहल में जल संरक्षण, वर्षा के पानी को रोकने और पौधारोपण जैसे काम शामिल रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उन्होंने e-Sanjeevani टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस सेवा के माध्यम से अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह सेवा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को डॉक्टरों से परामर्श लेने में मदद करती है।

‘मन की बात’ के 12 साल: आम लोगों की कहानियों पर रहा जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने का भी जिक्र किया। उन्होंने ‘मन की बात’ को देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे लोगों की मेहनत, सेवा और नवाचार की कहानियां सामने लाने का माध्यम बताया।

इस बार के संबोधन में भी स्थानीय कारोबार, किसानों, महिलाओं, कारीगरों, स्वच्छता और तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा में रहे।

दिवाली Shopping में Local Products को दें प्राथमिकता

त्योहारों के दौरान खरीदारी हर परिवार की तैयारियों का अहम हिस्सा होती है। ऐसे में स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों से सामान खरीदना उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

दीये, सजावटी सामान, कपड़े या उपहार खरीदते समय स्थानीय विकल्पों पर भी ध्यान दिया जा सकता है। इससे पारंपरिक कला को बनाए रखने और छोटे व्यवसायों को बाजार उपलब्ध कराने में योगदान मिलता है।

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘Vocal for Local’ का संदेश एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया। बिहार के मखाने और कर्नाटक की अरहर दाल जैसे उदाहरणों के जरिए उन्होंने बताया कि स्थानीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अवसर बन सकते हैं। त्योहारों पर स्वदेशी सामान को प्राथमिकता देने की उनकी अपील का मकसद स्थानीय कारोबार, किसानों और कारीगरों को प्रोत्साहन देना है।

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Arunachal Pradesh

Arunachal Pradesh Protest: बांध परियोजना के विरोध में तोड़फोड़, प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती

अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में बांध परियोजना को लेकर चल रहा विरोध अब हिंसक हो गया है। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शन के दौरान NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आगजनी की घटना सामने आई। कई पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, BJP के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और कुछ विधायकों के आवासों में तोड़फोड़ की खबर है। इस घटना में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। इस पूरे विवाद की वजह सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) है। सरकार इस परियोजना को बिजली उत्पादन और भारत की जल सुरक्षा के लिहाज से अहम मान रही है। दूसरी तरफ, स्थानीय संगठनों को डर है कि बांध बनने से उनके गांव, जमीन, पर्यावरण और पारंपरिक जीवन पर असर पड़ सकता है। हिंसा के बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों में प्रतिबंध लागू किए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इस परियोजना को लेकर इतना विरोध क्यों हो रहा है और चीन से आने वाले पानी का इससे क्या संबंध है? 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Siang Upper Multipurpose Project अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इसकी क्षमता करीब 11,200 मेगावाट बताई गई है। इस परियोजना को लेकर सरकार की ओर से बिजली उत्पादन, पानी के भंडारण और बाढ़ प्रबंधन जैसी संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। भारत-चीन के बीच नदी के पानी को लेकर रणनीतिक चिंताओं के कारण भी इस परियोजना को अहम माना जाता है। फिलहाल परियोजना के शुरुआती अध्ययन और सर्वेक्षण को लेकर विवाद जारी है। स्थानीय संगठनों की मांग है कि उनकी सहमति और पर्यावरण से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जाए। Pema Khandu का रुख: बातचीत से निकलेगा समाधान? हिंसा की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की निंदा की। उन्होंने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पासीघाट, मेबो और रुक्सिन के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और संभावित हिंसा को रोकना है। अब प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनने की चुनौती भी है। परियोजना से जुड़े सवालों पर पारदर्शी जानकारी और प्रभावित समुदायों के साथ संवाद इस विवाद को आगे बढ़ने से रोकने में अहम हो सकते हैं। Siang Dam Controversy: आगे क्या होगा? अरुणाचल प्रदेश में Siang Dam Project को लेकर बढ़ता विरोध कई अहम सवाल खड़े करता है। क्या सरकार स्थानीय लोगों की आशंकाओं का समाधान निकाल पाएगी? क्या परियोजना से जुड़े सर्वे और अन्य गतिविधियों पर कोई नया फैसला होगा? और चीन से जुड़ी जल सुरक्षा की चिंताओं के बीच भारत इस परियोजना को किस तरह आगे बढ़ाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं। फिलहाल, इस विवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के अधिकार तीनों महत्वपूर्ण हैं। सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी। इतना साफ है कि इस मामले का समाधान केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि भरोसा कायम करने और लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने से ही निकल सकता है। हर ख़बर, हर...
Mann Ki Baat

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त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। कोई घर सजाने के लिए सामान खरीदता है, तो कोई अपनों के लिए खास तोहफे तलाशता है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 139वें एपिसोड में लोगों से स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने बताया कि ‘Vocal for Local’ की भावना अब भारतीय उत्पादों को देश से बाहर भी पहचान दिला रही है। प्रधानमंत्री ने बिहार के मखाने से लेकर कर्नाटक की अरहर दाल तक के उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए दुनिया के बाजारों में नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने खादी, पारंपरिक बुनाई और आदिवासी समुदायों के उत्पादों का भी जिक्र किया। Vocal for Local: छोटी खरीदारी से स्थानीय कारोबार को मिल सकता है सहारा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि त्योहारों पर खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को महत्व देना चाहिए। उनकी अपील का मकसद छोटे कारोबारियों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाना है। अक्सर बाजार में खरीदारी करते समय हम ब्रांड और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन किसी स्थानीय कारीगर के लिए हर बिक्री उसकी मेहनत को आगे बढ़ाने का अवसर होती है। मिट्टी के दीये, हाथ से बनी सजावटी चीजें, स्थानीय कपड़े और पारंपरिक उपहार खरीदने से ऐसे कारोबारियों को सीधे मदद मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने ‘Vocal for Local’ को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से देश की आर्थिक मजबूती में भी योगदान मिलता है। बिहार का मखाना Greece पहुंचा, कर्नाटक की अरहर दाल Maldives में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशों तक पहुंच का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव के बाजार में अपनी जगह बना रही है। ये उदाहरण भारतीय किसानों के लिए नए बाजारों की संभावनाओं को सामने रखते हैं। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली चीजों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और मार्केटिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। इससे किसानों और उत्पादकों को अपने सामान के लिए नए खरीदार मिलने के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, ऐसे अवसरों का वास्तविक लाभ उत्पाद की मांग, कीमत और बाजार तक पहुंच जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है। आदिवासी उत्पादों की Packaging को मिला Good Design Award प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों से जुड़े उत्पादों और उनकी पैकेजिंग की भी चर्चा की। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को बाजार में पहुंचाया जा रहा है। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और पारंपरिक पहचान को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘Good Design Award’ मिला है। यह उदाहरण दिखाता है कि किसी उत्पाद को बाजार में पहचान दिलाने के लिए उसकी गुणवत्ता के साथ-साथ पैकेजिंग और प्रस्तुति भी अहम होती है। स्थानीय परंपराओं को आधुनिक डिजाइन से जोड़कर छोटे उत्पादकों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। Khadi की बिक्री में बढ़ोतरी, कारीगरों को मिल रही पहचान मन की बात में खादी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि गांधी जयंती के दिन खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। यह पिछले साल की तुलना में करीब 1.5 करोड़ रुपये ज्यादा बताई गई। खादी और हस्तशिल्प से जुड़े उत्पाद केवल खरीदारी का सामान नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कारीगरों का हुनर और वर्षों पुरानी परंपराएं भी जुड़ी हैं। इन उत्पादों की मांग बढ़ने से उन्हें तैयार करने वाले लोगों को काम के नए अवसर मिल सकते हैं। त्योहारी सीजन में खादी के कपड़े, हाथ से बने उपहार और स्थानीय हस्तशिल्प खरीदना इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के कारोबार को सहारा देने का एक तरीका हो सकता है। Punjab में पारंपरिक बुनाई और Natural Cotton पर जोर प्रधानमंत्री ने पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’ से जुड़ी पहल का भी उल्लेख किया। इसके तहत मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से कपास की खेती को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक बुनाई के हुनर को आगे बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इस पहल से जुड़ी ‘नव-त्रिंजन’ परियोजना में महिलाओं को बुनाई का प्रशिक्षण देने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कौशल को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। ऐसी पहलें यह भी दिखाती हैं कि स्थानीय हुनर को आधुनिक जरूरतों से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। स्वच्छता और e-Sanjeevani सेवा का भी किया जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बात की। उन्होंने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को फिर से बेहतर स्थिति में लाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। इस पहल में जल संरक्षण, वर्षा के पानी को रोकने और पौधारोपण जैसे काम शामिल रहे। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उन्होंने e-Sanjeevani टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस सेवा के माध्यम से अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह सेवा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को डॉक्टरों से परामर्श लेने में मदद करती है। ‘मन की बात’ के 12 साल: आम लोगों की कहानियों पर रहा जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने का भी जिक्र किया। उन्होंने ‘मन की बात’ को देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे लोगों की मेहनत, सेवा और नवाचार की कहानियां सामने लाने का माध्यम बताया। इस बार के संबोधन में भी स्थानीय कारोबार, किसानों, महिलाओं, कारीगरों, स्वच्छता और तकनीक के 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PM Modi

PM Modi Varanasi Visit: काशी में Textile Factory का उद्घाटन, महिलाओं से किया संवाद

PM Modi रविवार, 25 अक्टूबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। काशी (Varanasi) दौरे के दौरान उन्होंने मिर्जामुराद के खोचवां में अरविंद लिमिटेड की नई कपड़ा निर्माण इकाई का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की और उनके काम व अनुभवों के बारे में जानकारी ली। वहीं, दौरे का एक और बड़ा आकर्षण भारतीय वायुसेना का ‘Wings Over Ganges’ Air Show रहा, जिसे देखने के लिए लोगों में खास उत्साह था। इस दौरे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा में रही। फैक्ट्री का उद्घाटन और एयर शो, दोनों कार्यक्रमों ने काशी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। काशी में नई Textile Factory की शुरुआत वाराणसी के मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां में शुरू हुई यह कपड़ा निर्माण इकाई पूर्वांचल में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम मानी जा रही है। अरविंद लिमिटेड की इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर कपड़ों के उत्पादन को बढ़ाने और लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की उम्मीद है। कंपनी की इस इकाई में टी-शर्ट, स्पोर्ट्स वियर और दूसरे परिधानों का निर्माण किया जाना है। इससे क्षेत्र में टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को नई गति मिल सकती है। स्थानीय लोगों के लिए सबसे अहम बात यह है कि उद्योग के विस्तार से आसपास के इलाकों में काम के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। महिलाओं से मिले PM मोदी, जाना काम का अनुभव फैक्ट्री के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां काम करने वाली महिलाओं से भी बातचीत की। इस मुलाकात में महिलाओं के काम और रोजगार से जुड़े अनुभव चर्चा का हिस्सा रहे। किसी भी औद्योगिक परियोजना का फायदा तभी व्यापक माना जाता है, जब उससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और उनकी आमदनी के नए रास्ते खुलें। ऐसे में इस फैक्ट्री से महिलाओं को काम के अवसर मिलना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, परियोजना से लंबे समय में कितने लोगों को रोजगार मिलेगा, इसका आकलन वास्तविक भर्ती और उत्पादन बढ़ने के बाद ही किया जा सकेगा। ‘Wings Over Ganges’ Air Show बना आकर्षण काशी दौरे का एक प्रमुख आकर्षण भारतीय वायुसेना का ‘Wings Over Ganges’ एयर शो रहा। नमो घाट के आसपास आयोजित इस कार्यक्रम में आसमान में लड़ाकू विमानों और हवाई प्रदर्शन को लेकर लोगों में उत्सुकता रही। इस तरह के एयर शो का उद्देश्य सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की क्षमता, आधुनिक तकनीक और पायलटों के कौशल को भी प्रदर्शित करना है। कार्यक्रम में तेजस, राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के साथ सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर टीम की भागीदारी को लेकर भी चर्चा रही। हालांकि, वास्तविक प्रदर्शन में शामिल विमानों और टीमों की पुष्टि आधिकारिक कार्यक्रम विवरण से की जानी चाहिए। सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम प्रधानमंत्री के दौरे और एयर शो को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम स्थलों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की गई। एयर शो के दौरान घाटों और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित रखना प्रशासन के लिए अहम रहा। ऐसे बड़े आयोजन में सुरक्षा के साथ दर्शकों की सुविधा सुनिश्चित करना भी जरूरी होता है। काशी दौरे का पूर्वांचल को क्या फायदा होगा? इस दौरे के दो अहम पहलू हैं। पहला, नई कपड़ा निर्माण इकाई के जरिए पूर्वांचल में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने की उम्मीद। दूसरा, भारतीय वायुसेना के एयर शो के जरिए देश की रक्षा क्षमताओं को लोगों के सामने प्रदर्शित करना। काशी में औद्योगिक निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को अपने क्षेत्र में काम के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन इस पहल का वास्तविक असर आने वाले समय में रोजगार, उत्पादन और कंपनी के विस्तार के आंकड़ों से साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather Update: राजस्थान के चूरू में ओले, तमिलनाडु-केरल में भारी बारिश का Alert

देश के कई राज्यों में मौसम (Weather) ने अचानक करवट ले ली है। राजस्थान के चूरू में ओलावृष्टि की खबर है, तो दक्षिण भारत में भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। तमिलनाडु और केरल में तेज बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। वहीं, मध्य प्रदेश में भी मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। इस बीच बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। अगर यह सिस्टम मजबूत होता है, तो आने वाले दिनों में पूर्वी तट के कई राज्यों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम की इस हलचल के बीच किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर मौसम विभाग के अगले अपडेट पर है। आइए जानते हैं राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और संभावित Cyclone को लेकर क्या जानकारी सामने आई है। राजस्थान के चूरू में ओलावृष्टि, किसानों की बढ़ी चिंता राजस्थान के चूरू में ओले गिरने की खबर सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि से स्थानीय मौसम में बदलाव देखने को मिला। ऐसे मौसम में खेतों में खड़ी फसलों और खुले में रखी कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। हालांकि, ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों और नुकसान की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है। किसानों को सलाह है कि वे स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखें और फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। Tamil Nadu Weather: तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए कई जिलों में सतर्कता बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, थेनी, डिंडीगुल और मदुरै में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। राज्य के दूसरे हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। लगातार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी लेनी चाहिए। बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़कों पर जाने से बचना भी जरूरी है। Kerala Rain Alert: केरल के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी केरल में भी बारिश का दौर चिंता बढ़ा रहा है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई है। 25 अक्टूबर को मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड के लिए रेड अलर्ट की जानकारी सामने आई थी, जबकि 26 अक्टूबर को इडुक्की और पलक्कड़ में भारी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को नदी-नालों के पास जाने से बचना चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। MP Weather Update: मध्य प्रदेश में भी बदल सकता है मौसम मध्य प्रदेश में भी मौसम की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल, गरज-चमक और बारिश की संभावना हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम का असर पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। हालांकि, पूरे मध्य प्रदेश में एक साथ भारी बारिश होने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। भोपाल, जबलपुर, रीवा और अन्य शहरों के लिए मौसम की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए लोगों को अपने जिले का ताजा पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए। किसानों के लिए भी मौसम का यह बदलाव अहम है। बारिश की संभावना को देखते हुए फसलों की कटाई, अनाज के भंडारण और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। Cyclone Alert: बंगाल की खाड़ी में बन सकता है चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम को लेकर मौसम विभाग की निगरानी जारी है। इस सिस्टम के मजबूत होकर चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना जताई गई है। 26 अक्टूबर इसके संभावित चक्रवाती रूप लेने के लिहाज से अहम बताया गया है। पूर्वानुमान के अनुसार, सिस्टम आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों के मौसम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, तूफान की दिशा, उसकी गति और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम तस्वीर मौसम विभाग के अगले बुलेटिन से ही स्पष्ट होगी। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक चेतावनियों पर भरोसा करना चाहिए। मछुआरों के लिए भी समुद्र की स्थिति और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। Odisha और Andhra Pradesh में बढ़ सकती है बारिश संभावित चक्रवाती तूफान के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की आशंका है। 27 और 28 अक्टूबर के आसपास कुछ इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण तटीय क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका रहती है। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाना लोगों के लिए अहम होगा। पूर्वी भारत के दूसरे राज्यों में भी मौसमी सिस्टम के असर से बारिश हो सकती है। हालांकि, किस जिले में कितनी बारिश होगी, इसकी जानकारी के लिए ताजा जिला-वार पूर्वानुमान देखना जरूरी है। Weather Update: लोगों को अभी क्या सावधानी रखनी चाहिए? मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगले कुछ दिनों में कैसा रहेगा मौसम? फिलहाल दक्षिण भारत में भारी बारिश और बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान पर नजर बनी हुई है। तमिलनाडु और केरल में बारिश का असर जारी रह सकता है, जबकि आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 27-28 अक्टूबर के आसपास मौसम ज्यादा सक्रिय होने की आशंका है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहना चाहिए। राजस्थान के चूरू में ओलावृष्टि की खबर से लेकर दक्षिण भारत में भारी बारिश तक, मौसम का यह बदलाव बताता है कि आने वाले दिनों में स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा। किसी भी यात्रा, खेती या बाहरी गतिविधि की योजना बनाने से पहले अपने जिले का ताजा Weather Update जरूर जांचें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
France Protest

France Protest: महंगाई के खिलाफ फ्रांस में लाखों लोग सड़कों पर, करीब 1,000 गिरफ्तार

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के महंगे होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इसी नाराजगी के बीच शनिवार, 24 अक्टूबर को देश के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। France Protest प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हुए? France Protest को लेकर सरकार और ट्रेड यूनियन के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में करीब 4.10 लाख लोग सड़कों पर उतरे। वहीं, ट्रेड यूनियन CGT ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। राजधानी पेरिस में भी बड़ी संख्या में लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शन में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और ट्रेड यूनियन से जुड़े लोग शामिल हुए। लोगों ने महंगाई से राहत देने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और सार्वजनिक सेवाओं के लिए ज्यादा बजट उपलब्ध कराने की मांग उठाई। Paris में पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस, कई जगह तनाव पेरिस में प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर वस्तुएं और पटाखे फेंके। इसके बाद भीड़ को पीछे हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। मार्सेई समेत फ्रांस के दूसरे शहरों में भी तनाव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। कुछ स्थानों पर कचरे के डिब्बों में आग लगाने और पुलिस पर पत्थर फेंकने की खबरें मिलीं। लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। अधिकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और हिंसा पर रोक लगाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। France Protest: क्यों सड़कों पर उतरे लोग? फ्रांस में विरोध की मुख्य वजह बढ़ती जीवन-यापन लागत और शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष है। महंगे ईंधन, ऊर्जा और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों ने आम परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ाया है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्चों को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी छात्र और शिक्षक कई मांगें उठा रहे हैं। इनमें स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना, विश्वविद्यालयों में बेहतर सुविधाएं देना और शिक्षा के लिए बजट बढ़ाना शामिल है। छात्र संगठनों ने छात्रवृत्ति और आवास से जुड़ी राहत की मांग भी की है। इन मुद्दों के कारण आंदोलन में अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं। अब यह विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें आर्थिक दबाव और सरकारी नीतियों को लेकर नाराजगी भी दिखाई दे रही है। सुरक्षा के लिए 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए फ्रांस में बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों को तैनात किया गया। पेरिस समेत कई शहरों में संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी गई। कुछ जगहों पर मार्च को लेकर प्रतिबंध भी लगाए गए। प्रशासन का कहना था कि इन कदमों का मकसद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना है। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े कुछ समूहों ने प्रतिबंधों और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। Emmanuel Macron सरकार के सामने बढ़ी चुनौती लगातार हो रहे प्रदर्शनों से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ लोगों की आर्थिक परेशानियों और शिक्षा से जुड़ी मांगों का समाधान निकालने की चुनौती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्याएं दूर नहीं होंगी। उन्हें महंगाई से राहत, बेहतर शिक्षा सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम चाहिए। फिलहाल, इन मांगों पर सरकार की ओर से किसी व्यापक समाधान की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शन आयोजकों की रणनीति अहम होगी। France Protest Latest Update: आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन फ्रांस में विरोध प्रदर्शन थमने के संकेत फिलहाल साफ नहीं हैं। प्रदर्शन से जुड़े कुछ समूहों ने आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही है। इससे आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। महंगाई, शिक्षा का बजट और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां अब फ्रांस की राजनीति में अहम मुद्दे बन गए हैं। सरकार इन समस्याओं से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है, इसका असर आंदोलन की दिशा पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार लोगों की मांगों पर ठोस फैसला लेकर हालात सामान्य कर पाएगी, या फ्रांस में विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और तेज होंगे? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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