अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में बांध परियोजना को लेकर चल रहा विरोध अब हिंसक हो गया है। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शन के दौरान NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आगजनी की घटना सामने आई। कई पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, BJP के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और कुछ विधायकों के आवासों में तोड़फोड़ की खबर है। इस घटना में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।
इस पूरे विवाद की वजह सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) है। सरकार इस परियोजना को बिजली उत्पादन और भारत की जल सुरक्षा के लिहाज से अहम मान रही है। दूसरी तरफ, स्थानीय संगठनों को डर है कि बांध बनने से उनके गांव, जमीन, पर्यावरण और पारंपरिक जीवन पर असर पड़ सकता है।
हिंसा के बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों में प्रतिबंध लागू किए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इस परियोजना को लेकर इतना विरोध क्यों हो रहा है और चीन से आने वाले पानी का इससे क्या संबंध है?
Arunachal Pradesh कैसे बिगड़े हालात?
23 अक्टूबर को सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग के कुछ इलाकों में प्रस्तावित बांध परियोजना के विरोध में बंद बुलाया गया था। शुरुआत में प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें रखने की कोशिश हुई, लेकिन बाद में पासीघाट में हालात बिगड़ गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आगजनी की गई। कई पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। BJP प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और विधायकों निनोंग एरिंग तथा ओनी पानयांग के आवासों में तोड़फोड़ की खबर सामने आई।
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और दोबारा हिंसा रोकने के लिए कदम उठाए।
Siang Dam Project का विरोध क्यों कर रहे हैं स्थानीय लोग?
स्थानीय संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी बांध परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले वहां रहने वाले लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख मांगों में गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित गांव प्रमुखों की बहाली और परियोजना से जुड़े सर्वे कार्यों पर रोक शामिल है। प्रदर्शनकारी क्षेत्र में तैनात केंद्रीय और अर्धसैनिक बलों को हटाने की मांग भी कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि परियोजना के कारण उनकी पुश्तैनी जमीन और गांव प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा खेती, आजीविका, पर्यावरण और आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
यही वजह है कि Siang Dam Project अब केवल बिजली उत्पादन की परियोजना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और विकास के बीच संतुलन का मुद्दा भी बन गया है।
China Water Security: चीन से आने वाले पानी का क्या है कनेक्शन?
सियांग नदी अरुणाचल प्रदेश से होकर आगे ब्रह्मपुत्र नदी का हिस्सा बनती है। तिब्बत में इस नदी को यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है।
चीन की ओर से नदी के ऊपरी हिस्से में बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं विकसित किए जाने की योजनाओं के कारण भारत में जल सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। आशंका है कि भविष्य में नदी के बहाव में बड़े बदलाव होने पर भारत के निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत के लिए Siang Upper Multipurpose Project को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ पानी के भंडारण और जल प्रवाह के प्रबंधन की संभावनाओं पर काम करना है।
हालांकि, बांध बनने से चीन से आने वाला पानी पूरी तरह रोक दिया जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा। परियोजना से जल प्रवाह को किस हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा, यह उसकी तकनीकी संरचना, भंडारण क्षमता और संचालन पर निर्भर करेगा।
11,200 MW का Siang Dam Project क्या है?
Siang Upper Multipurpose Project अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इसकी क्षमता करीब 11,200 मेगावाट बताई गई है।
इस परियोजना को लेकर सरकार की ओर से बिजली उत्पादन, पानी के भंडारण और बाढ़ प्रबंधन जैसी संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। भारत-चीन के बीच नदी के पानी को लेकर रणनीतिक चिंताओं के कारण भी इस परियोजना को अहम माना जाता है।
फिलहाल परियोजना के शुरुआती अध्ययन और सर्वेक्षण को लेकर विवाद जारी है। स्थानीय संगठनों की मांग है कि उनकी सहमति और पर्यावरण से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जाए।
Pema Khandu का रुख: बातचीत से निकलेगा समाधान?
हिंसा की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की निंदा की। उन्होंने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पासीघाट, मेबो और रुक्सिन के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और संभावित हिंसा को रोकना है।
अब प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनने की चुनौती भी है। परियोजना से जुड़े सवालों पर पारदर्शी जानकारी और प्रभावित समुदायों के साथ संवाद इस विवाद को आगे बढ़ने से रोकने में अहम हो सकते हैं।
Siang Dam Controversy: आगे क्या होगा?
अरुणाचल प्रदेश में Siang Dam Project को लेकर बढ़ता विरोध कई अहम सवाल खड़े करता है। क्या सरकार स्थानीय लोगों की आशंकाओं का समाधान निकाल पाएगी? क्या परियोजना से जुड़े सर्वे और अन्य गतिविधियों पर कोई नया फैसला होगा? और चीन से जुड़ी जल सुरक्षा की चिंताओं के बीच भारत इस परियोजना को किस तरह आगे बढ़ाएगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं। फिलहाल, इस विवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के अधिकार तीनों महत्वपूर्ण हैं।
सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी। इतना साफ है कि इस मामले का समाधान केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि भरोसा कायम करने और लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने से ही निकल सकता है।
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