इजराइल (Israel) में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव (Election) के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता और विपक्षी नेता गैडी आइजनकोट की चुनौती पर पूरी दुनिया की नजर है। Election से पहले आए ओपिनियन पोल में आइजनकोट की यशार (Yashar) पार्टी को कई सर्वे में बढ़त मिली है, लेकिन सरकार कौन बनाएगा, इसे लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है।
यह चुनाव इजराइल के लिए कई मायनों में अहम है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में हुए युद्ध के बाद पहली बार देश में आम चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में मतदाताओं के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की भूमिका, सरकार की जवाबदेही और देश की आर्थिक स्थिति जैसे कई बड़े मुद्दे हैं।
Israel Election 2026: Opinion Polls में किसे कितनी सीटें?
चुनाव से पहले जारी चार प्रमुख सर्वे के औसत के मुताबिक, गैडी आइजनकोट की यशार पार्टी को करीब 22 से 23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को लगभग 20 सीटें मिल सकती हैं।
हालांकि, अलग-अलग सर्वे के नतीजों में अंतर है। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चार प्रमुख सर्वे के औसत में आइजनकोट की पार्टी को 22.5 और लिकुड को करीब 19.75 सीटें मिलने का अनुमान था।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी पार्टी का सबसे बड़ी पार्टी बनना और सरकार बनाना दो अलग-अलग बातें हैं। इजराइल में सरकार बनाने के लिए गठबंधन का समर्थन जरूरी होता है। इसलिए चुनाव के बाद छोटी पार्टियों की भूमिका भी काफी अहम हो सकती है।
Netanyahu के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से इजराइल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इस बार उनके नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इनमें 7 अक्टूबर 2023 के हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूक, गाजा युद्ध और सैन्य सेवा से जुड़े विवाद प्रमुख हैं।
विपक्षी नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था की विफलताओं की स्वतंत्र जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थक उनके सुरक्षा संबंधी फैसलों और युद्धकालीन नेतृत्व को महत्वपूर्ण मानते हैं।
इस चुनाव में मतदाता यह भी तय करेंगे कि देश की मौजूदा नीतियां जारी रहनी चाहिए या सरकार के नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है।
कौन हैं Gadi Eisenkot, जो Netanyahu को दे रहे चुनौती?
गैडी आइजनकोट इजराइल के पूर्व सैन्य प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान सुरक्षा और राष्ट्रीय जवाबदेही से जुड़े मुद्दों के जरिए बनाई है। उनकी यशार पार्टी इस चुनाव में विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल है।
आइजनकोट के सामने केवल अधिक सीटें जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि अलग-अलग विपक्षी दलों को साथ लाकर सरकार बनाने लायक समर्थन जुटाना भी जरूरी है। विपक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, यायर लैपिड और अन्य नेताओं से जुड़े दल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?
इजराइल की संसद को नेसेट (Knesset) कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
Isreal में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री को वोट नहीं देते, बल्कि राजनीतिक पार्टियों को चुनते हैं। चुनाव के बाद पार्टियां गठबंधन बनाकर सरकार बनाने का प्रयास करती हैं।
अगर नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत जुटा लेता है, तो वह सत्ता में बने रहने की कोशिश कर सकता है। दूसरी ओर, आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष पर्याप्त समर्थन हासिल करता है, तो नई सरकार बनने का रास्ता खुल सकता है।
यदि कोई भी पक्ष बहुमत नहीं जुटा पाता, तो सरकार गठन को लेकर लंबी बातचीत और राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बन सकती है।
Israel Election के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
इस चुनाव में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। हमास के हमले के बाद इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था, गाजा में युद्ध और क्षेत्रीय तनाव लगातार चर्चा में रहे हैं। ईरान के साथ टकराव और अमेरिका के साथ संबंध भी देश की विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के लिए सैन्य सेवा में छूट, न्यायिक व्यवस्था में बदलाव और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा हैं।
इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के विचार अलग-अलग हैं। चुनाव के बाद बनने वाली सरकार को सुरक्षा के साथ-साथ घरेलू राजनीतिक मतभेदों से भी निपटना होगा।
Israel Election Result 2026: कब साफ होगी तस्वीर?
मतदान के बाद एग्जिट पोल से शुरुआती संकेत मिल सकते हैं, लेकिन अंतिम नतीजों के लिए आधिकारिक मतगणना का इंतजार करना होगा। इसके बाद सरकार बनाने के लिए गठबंधन की बातचीत शुरू होगी।
फिलहाल ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को बढ़त मिलने के बावजूद किसी नेता के प्रधानमंत्री बनने की पुष्टि नहीं हुई है। असली तस्वीर इस बात से तय होगी कि कौन-सा राजनीतिक गठबंधन नेसेट में 61 सांसदों का समर्थन हासिल कर पाता है।
इजराइल के इस चुनाव का असर केवल देश की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। नई सरकार की नीतियां गाजा, ईरान, अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अब सबकी नजर चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाले सरकार गठन पर टिकी है।
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