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Stock Market Rally: सेंसेक्स में 700 अंकों का उछाल, FII की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक

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भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) के लिए शुक्रवार, 6 नवंबर का दिन काफी शानदार रहा। पिछले कई दिनों से जारी तेजी ने बाजार को एक बार फिर नई ऊंचाई के करीब पहुंचा दिया। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 80,000 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी 24,600 का आंकड़ा पार कर लिया। खास बात यह है कि पिछले सात कारोबारी सत्रों में बाजार में 8% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

एक तरफ भारतीय निवेशक बाजार की इस तेजी से उत्साहित हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार का मजबूती से आगे बढ़ना निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

Sensex 80,000 के करीब, Nifty में भी जोरदार उछाल

शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने करीब 735 अंकों की छलांग लगाई और 79,959 के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, 80,000 का आंकड़ा पार करने से यह कुछ अंक दूर रह गया। दूसरी ओर निफ्टी 50 भी बढ़त के साथ 24,600 के पार पहुंच गया।

इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में जबरदस्त खरीदारी हुई थी। सेंसेक्स 2,008 अंक यानी 2.60% की तेजी के साथ 79,310 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में करीब 576 अंकों का उछाल आया था।

लगातार दूसरे दिन बाजार में मजबूत खरीदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

7 दिनों में 8% से ज्यादा चढ़ा Share Market

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से तेजी का सिलसिला जारी है। बीते छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 6,064 अंक चढ़ चुका है। इस दौरान निफ्टी में भी लगभग 8% की बढ़त दर्ज की गई।

इस तेजी का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। लंबे समय बाद बाजार में ऐसी खरीदारी देखने को मिली है, जिसने निवेशकों के बीच फिर से सकारात्मक माहौल बनाया है।

FII की वापसी से बाजार को मिली नई ताकत

शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की वापसी मानी जा रही है।

5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 14,975 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। सितंबर 2024 के बाद यह उनकी सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी बताई गई है।

दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 10,445 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी से बाजार में तेजी बनी रही।

FII की वापसी को भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

अमेरिकी Stock Market में क्यों मची बिकवाली?

भारत में जहां शेयर बाजार ऊपर चढ़ रहा था, वहीं अमेरिका के बाजारों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली।

अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। निवेशकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों की बढ़ती वैल्यूएशन और भारी निवेश खर्च को लेकर चिंता सता रही है।

अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:

  • Dow Jones में करीब 3.44% की गिरावट।
  • S&P 500 करीब 4.36% टूटा।
  • Nasdaq में लगभग 5.52% की बड़ी गिरावट आई।

टेक कंपनियों में मुनाफावसूली और AI सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंताओं ने अमेरिकी बाजार का माहौल बिगाड़ दिया।

जापान और दक्षिण कोरिया के बाजार भी टूटे

अमेरिका में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। शुक्रवार को जापान का Nikkei 225 शुरुआती कारोबार में 5% से ज्यादा गिर गया। वहीं दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 8% तक टूट गया।

दक्षिण कोरिया के बाजार में तेज गिरावट के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी।

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने इन बाजारों पर दबाव बढ़ाया। इस तरह एक ही दिन में दुनिया के कई बड़े बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि भारतीय बाजार तेजी के साथ कारोबार करता रहा।

इन 5 वजहों से भारतीय बाजार में आई तेजी

1. विदेशी निवेशकों की खरीदारी: FII की वापसी ने बाजार को बड़ा सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों की ओर से हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स में तेजी आई।

2. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए राहत की खबर है। इससे देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है।

3. कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे: कई बड़ी कंपनियों के नतीजों ने निवेशकों को आकर्षित किया है। खासकर बैंकिंग, ऑटो और IT सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली।

4. बड़े शेयरों में खरीदारी: सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार को ऊपर पहुंचाने में मदद की।

5. निवेशकों का बढ़ता भरोसा: लगातार तेजी और विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।

किन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा हलचल?

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 4% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों ने निवेशकों का ध्यान खींचा।

इसके अलावा टाइटन, HCL टेक्नोलॉजीज, TCS, इंफोसिस और भारती एयरटेल के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।

वहीं एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में कमजोरी रही।

आगे कहां तक जाएगा सेंसेक्स?

सेंसेक्स का 80,000 के करीब पहुंचना भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम घटनाक्रम है। हालांकि, लगातार सात दिनों की तेजी के बाद निवेशकों को कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।

आने वाले दिनों में FII की खरीदारी, अमेरिकी बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल भारतीय बाजार ने वैश्विक कमजोरी के बीच अपनी मजबूती दिखाई है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स 80,000 के स्तर को पार कर पाता है या नहीं।

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Yukta

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Iran

Iran का नया Proposal: अमेरिका को भेजीं 7 शर्तें, होर्मुज खोलने से किया इनकार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ दोनों देशों के बीच शांति की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ शर्तों को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तों वाला नया प्रस्ताव रख दिया है। तेहरान का साफ कहना है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। इतना ही नहीं, ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापारिक रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने से भी इनकार कर दिया है। रॉयटर्स की 5 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को अपना नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने रूस दौरे के दौरान कहा कि अमेरिका को पहले उसकी सात शर्तें माननी होंगी। इसके बाद ही बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर विचार किया जाएगा। ईरान की 7 शर्तें क्या हैं? 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दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत आज 6 नवंबर को Dhanteras के साथ हो गई है। हिंदू धर्म में Dhanteras का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। यही वजह है कि इस दिन बाजारों में सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। इस बार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। ऐसे में दोनों दिन खरीदारी के लिए शुभ समय मिल रहा है। धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ चौघड़िया में खरीदारी करना अच्छा माना जाता है। भोपाल के पंचांग के अनुसार खरीदारी के कुछ प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं। 6 नवंबर, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त: 7 नवंबर, शनिवार के शुभ मुहूर्त: ध्यान दें कि ये समय भोपाल के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों में समय में कुछ अंतर हो सकता है। धनतेरस पर पूजा का शुभ समय धनतेरस के दिन शाम को भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भोपाल में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 5:39 बजे से रात 8:13 बजे तक है। इस दौरान घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने की परंपरा है। धनतेरस पर आखिर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन? धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता भगवान धन्वंतरि से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से कलश और धातु के बर्तनों को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नया बर्तन घर लाने से सुख-समृद्धि आती है। लोग अपनी सुविधा और बजट के अनुसार पीतल, तांबे, चांदी और स्टील के बर्तन खरीदते हैं। धनतेरस पर क्या-क्या खरीदना माना जाता है शुभ? धनतेरस पर कई चीजें खरीदने की परंपरा है। इनमें प्रमुख हैं: धनतेरस का क्या है धार्मिक महत्व? धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा विशेष रूप से की जाती है। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस केवल धन और संपत्ति से जुड़ा त्योहार नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना का भी प्रतीक है। कुल मिलाकर, धनतेरस का संदेश सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह त्योहार परिवार में खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मकता का स्वागत करने का अवसर भी है। आप भी अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करें और परिवार के साथ इस पर्व की खुशियां मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Rally: सेंसेक्स में 700 अंकों का उछाल, FII की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) के लिए शुक्रवार, 6 नवंबर का दिन काफी शानदार रहा। पिछले कई दिनों से जारी तेजी ने बाजार को एक बार फिर नई ऊंचाई के करीब पहुंचा दिया। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 80,000 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी 24,600 का आंकड़ा पार कर लिया। खास बात यह है कि पिछले सात कारोबारी सत्रों में बाजार में 8% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। एक तरफ भारतीय निवेशक बाजार की इस तेजी से उत्साहित हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार का मजबूती से आगे बढ़ना निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। Sensex 80,000 के करीब, Nifty में भी जोरदार उछाल शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने करीब 735 अंकों की छलांग लगाई और 79,959 के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, 80,000 का आंकड़ा पार करने से यह कुछ अंक दूर रह गया। दूसरी ओर निफ्टी 50 भी बढ़त के साथ 24,600 के पार पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में जबरदस्त खरीदारी हुई थी। सेंसेक्स 2,008 अंक यानी 2.60% की तेजी के साथ 79,310 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में करीब 576 अंकों का उछाल आया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में मजबूत खरीदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। 7 दिनों में 8% से ज्यादा चढ़ा Share Market भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से तेजी का सिलसिला जारी है। बीते छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 6,064 अंक चढ़ चुका है। इस दौरान निफ्टी में भी लगभग 8% की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। लंबे समय बाद बाजार में ऐसी खरीदारी देखने को मिली है, जिसने निवेशकों के बीच फिर से सकारात्मक माहौल बनाया है। FII की वापसी से बाजार को मिली नई ताकत शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की वापसी मानी जा रही है। 5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 14,975 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। सितंबर 2024 के बाद यह उनकी सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी बताई गई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 10,445 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी से बाजार में तेजी बनी रही। FII की वापसी को भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है। अमेरिकी Stock Market में क्यों मची बिकवाली? भारत में जहां शेयर बाजार ऊपर चढ़ रहा था, वहीं अमेरिका के बाजारों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। निवेशकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों की बढ़ती वैल्यूएशन और भारी निवेश खर्च को लेकर चिंता सता रही है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा: टेक कंपनियों में मुनाफावसूली और AI सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंताओं ने अमेरिकी बाजार का माहौल बिगाड़ दिया। जापान और दक्षिण कोरिया के बाजार भी टूटे अमेरिका में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। शुक्रवार को जापान का Nikkei 225 शुरुआती कारोबार में 5% से ज्यादा गिर गया। वहीं दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 8% तक टूट गया। दक्षिण कोरिया के बाजार में तेज गिरावट के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी। टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने इन बाजारों पर दबाव बढ़ाया। इस तरह एक ही दिन में दुनिया के कई बड़े बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि भारतीय बाजार तेजी के साथ कारोबार करता रहा। इन 5 वजहों से भारतीय बाजार में आई तेजी 1. विदेशी निवेशकों की खरीदारी: FII की वापसी ने बाजार को बड़ा सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों की ओर से हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स में तेजी आई। 2. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए राहत की खबर है। इससे देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है। 3. कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे: कई बड़ी कंपनियों के नतीजों ने निवेशकों को आकर्षित किया है। खासकर बैंकिंग, ऑटो और IT सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। 4. बड़े शेयरों में खरीदारी: सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार को ऊपर पहुंचाने में मदद की। 5. निवेशकों का बढ़ता भरोसा: लगातार तेजी और विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। किन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा हलचल? शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 4% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों ने निवेशकों का ध्यान खींचा। इसके अलावा टाइटन, HCL टेक्नोलॉजीज, TCS, इंफोसिस और भारती एयरटेल के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में कमजोरी रही। आगे कहां तक जाएगा सेंसेक्स? सेंसेक्स का 80,000 के करीब पहुंचना भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम घटनाक्रम है। हालांकि, लगातार सात दिनों की तेजी के बाद निवेशकों को कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में FII की खरीदारी, अमेरिकी बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल भारतीय बाजार ने वैश्विक कमजोरी के बीच अपनी मजबूती दिखाई है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स 80,000 के स्तर को पार कर पाता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhanteras Gold-Silver Price: धनतेरस पर सोना ₹2,300 और चांदी ₹3,000 से ज्यादा सस्ती

धनतेरस पर सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। त्योहार के मौके पर कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सोने का भाव 2,300 रुपये से ज्यादा टूटकर करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमत में भी 3,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव करीब 1.84 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। इस साल सोने-चांदी की कीमतों ने निवेशकों और आम खरीदारों को कई बार चौंकाया है। जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब दोनों धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट आई है। ऐसे में धनतेरस पर खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या सोना-चांदी खरीदने का यह सही मौका है? Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,300 से ज्यादा की गिरावट MCX पर शुक्रवार को दिसंबर डिलीवरी वाले सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। सोने का पिछला बंद भाव 1,44,095 रुपये प्रति 10 ग्राम था। शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही भाव नीचे आ गया। कारोबार के दौरान सोना करीब 2,339 रुपये यानी 1.62% गिरकर 1,41,756 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दिन के कारोबार में इसका निचला स्तर 1,41,718 रुपये दर्ज किया गया। इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो धनतेरस पर सोने के गहने या सिक्के खरीदने का इंतजार कर रहे थे। Silver Price Today: चांदी भी ₹3,000 से ज्यादा सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी रही। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का पिछला बंद भाव 1,87,140 रुपये प्रति किलो था। शुक्रवार को यह 1,85,499 रुपये पर खुली। इसके बाद चांदी करीब 3,139 रुपये गिरकर 1,84,001 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। कारोबार के दौरान इसका निचला स्तर 1,83,700 रुपये दर्ज किया गया। चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट से त्योहार के लिए चांदी के सिक्के, बर्तन और अन्य सामान खरीदने वालों को राहत मिल सकती है। जनवरी के रिकॉर्ड से कितना नीचे आ गया सोना-चांदी? साल 2026 की शुरुआत सोने और चांदी के लिए काफी शानदार रही थी। दोनों धातुओं ने लगातार तेजी दिखाते हुए नए रिकॉर्ड बनाए। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। यानी इस साल रिकॉर्ड तेजी देखने के बाद अब सोने-चांदी के बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। Gold-Silver Price क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। 1. डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से सोने और चांदी की मांग पर दबाव पड़ता है। डॉलर महंगा होने पर दूसरी मुद्राओं में इन धातुओं को खरीदना मुश्किल हो जाता है। 2. निवेशकों की मुनाफावसूली: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कई निवेशक मुनाफा निकाल रहे हैं। लगातार बिकवाली से कीमतों में गिरावट बढ़ी है। 3. अमेरिकी ब्याज दरों का असर: निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। 4. कच्चे तेल और महंगाई की चिंता: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई से जुड़े संकेत भी निवेशकों की रणनीति बदल रहे हैं। आगे Gold और Silver के भाव का क्या रहेगा रुख? आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों की दिशा काफी हद तक डॉलर की चाल, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी। MCX में सोने के लिए 1,41,760 रुपये के आसपास सपोर्ट और 1,45,690 रुपये के आसपास रेजिस्टेंस का स्तर अहम माना जा रहा है। वहीं, चांदी के लिए 1,84,230 रुपये का सपोर्ट और 1,90,500 रुपये का रेजिस्टेंस महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, ये तकनीकी स्तर हैं, कीमतों में आगे तेजी या गिरावट की गारंटी नहीं देते। Dhanteras Shopping: सोना-चांदी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में कीमतों में गिरावट देखकर खरीदारी का मन बन रहा है, तो जल्दबाजी करने के बजाय कुछ जरूरी बातें जरूर जांच लें। कुल मिलाकर, धनतेरस पर सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत की खबर है। हालांकि, जनवरी के रिकॉर्ड भाव से नीचे आने के बावजूद कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में खरीदारी करने से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर पता कर लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Omar Abdullah

Omar Abdullah Government Crisis: उमर सरकार पर संकट के बादल, 25 विधायक नाराज; फारूक अब्दुल्ला ने बुलाई बैठक

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के अंदर चल रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं, क्योंकि पार्टी के कई विधायक सरकार के कामकाज और कैबिनेट में हुए बदलावों से खुश नहीं हैं। करीब 25 विधायकों ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी है कि बात नहीं बनी तो विधायक सरकार से समर्थन वापस लेने या इस्तीफे जैसे कदम उठा सकते हैं। इस बीच 6 नवंबर को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित आवास पर नाराज विधायकों की अहम बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए। हालांकि, सभी 25 विधायक बैठक में मौजूद नहीं थे। India Today के मुताबिक, बैठक में 15 असंतुष्ट विधायक पहुंचे थे। वहीं, Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 18 नाराज विधायकों ने अलग बैठक की थी। अब सवाल सिर्फ पार्टी के अंदर मतभेद का नहीं, बल्कि उमर अब्दुल्ला सरकार के बहुमत का भी है। 25 विधायकों ने क्यों खोला मोर्चा? नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की सबसे बड़ी वजह 27 अक्टूबर 2026 को हुआ कैबिनेट विस्तार बताया जा रहा है। इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने चार नए मंत्रियों को कैबिनेट में जगह दी। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। इस फेरबदल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद नहीं मिला। इनमें मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लारमी जैसे अनुभवी विधायक भी शामिल हैं। इसके बाद पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ने लगी। विधायकों का आरोप है कि सरकार के बड़े फैसले लेने में उनकी राय नहीं ली जाती। कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी और सरकार के फैसले सीमित लोगों के बीच ही लिए जा रहे हैं। यही वजह है कि अब विधायक नेतृत्व से जवाब मांग रहे हैं। नाराज विधायकों की 3 बड़ी मांगें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। 1. पूरी कैबिनेट में बदलाव: विधायक मौजूदा मंत्रियों के विभागों और कामकाज की समीक्षा चाहते हैं। उनकी मांग है कि कैबिनेट का नए सिरे से गठन हो और विधायकों की सलाह को महत्व दिया जाए। 2. CM के सलाहकार को हटाने की मांग: विधायक मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार के कामकाज में कुछ सलाहकारों का प्रभाव जरूरत से ज्यादा है। 3. विधायकों की शिकायतों का समाधान: असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि निर्वाचित विधायकों को सम्मान मिलना चाहिए। सरकार के फैसलों, विभागों के बंटवारे और विकास कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा मंत्रियों की नियुक्ति में पारदर्शिता, वरिष्ठ नेताओं को प्रतिनिधित्व और जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का मजबूत रुख भी उनकी मांगों में शामिल है। फारूक अब्दुल्ला के घर बैठक, 15 विधायक पहुंचे 6 नवंबर को श्रीनगर के गुपकर रोड स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर हुई बैठक को पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। नाराज विधायक अपनी मांगों को लेकर पार्टी अध्यक्ष से मिले। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी बातचीत में शामिल हुए। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में 15 असंतुष्ट विधायक पहुंचे। उनके साथ एक निर्दलीय विधायक भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा हुआ बताया गया है। हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने निर्दलीय विधायक से बातचीत करने से इनकार करते हुए केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों से चर्चा करने की बात कही। इससे पहले 5 नवंबर को भी नाराज विधायकों ने बंद कमरे में बैठक कर अपनी रणनीति पर चर्चा की थी। पार्टी के अंदर इस तरह लगातार बैठकें होना बताता है कि मामला केवल कुछ नेताओं की नाराजगी तक सीमित नहीं रह गया है। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं ने बगावत की खबरों को खारिज किया है। उनका कहना है कि विधायकों के बीच मतभेद हैं, लेकिन इसे पार्टी में टूट कहना सही नहीं होगा। Aga Syed Ruhullah Mehdi के इस्तीफे से बढ़ी परेशानी नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और बड़ा झटका तब लगा, जब श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया। रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उनके प्रमुख मुद्दों में अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा, संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और राजनीतिक बंदियों की रिहाई शामिल हैं। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। करीब 24 साल तक नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहने के बाद उनका यह फैसला पार्टी के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम बन गया। रुहुल्लाह के इस्तीफे और विधायकों की नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ संगठन के अंदर असंतोष है, तो दूसरी तरफ चुनावी वादों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या गिर सकती है उमर अब्दुल्ला सरकार? समझिए पूरा Number Game इस विवाद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत के आंकड़ों को लेकर हो रही है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 निर्वाचित सीटें हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास फिलहाल 41 विधायक हैं। कांग्रेस के 6, निर्दलीय के 6 और CPM के एक विधायक के समर्थन से सत्ताधारी गठबंधन की संख्या 54 तक पहुंचती है। विधानसभा में बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। अब अगर 20 नाराज NC विधायक इस्तीफा दे देते हैं और उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष स्वीकार कर लेते हैं, तो विधानसभा की प्रभावी संख्या घटकर 70 रह सकती है। ऐसी स्थिति में बहुमत का आंकड़ा 36 हो जाएगा। वहीं, अगर एक निर्दलीय विधायक भी समर्थन वापस लेता है, तो सत्ताधारी गठबंधन की संख्या 33 तक आ सकती है। इस स्थिति में उमर अब्दुल्ला सरकार बहुमत से नीचे पहुंच सकती है। यही वजह है कि 25 विधायकों की नाराजगी को पार्टी के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। हालांकि, यह पूरा गणित संभावित स्थिति पर आधारित है। अभी तक विधायकों के सामूहिक इस्तीफे या समर्थन वापसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Anti-Defection Law भी बन सकता है बड़ी चुनौती अगर नाराज विधायक पार्टी छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो...

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