Delhi-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। सुबह घर से निकलते ही धुंध और स्मॉग का सामना करना पड़ रहा है। कहीं आंखों में जलन है तो कहीं सांस लेने में परेशानी। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने एक बार फिर दिल्ली की एयर क्वालिटी और सरकारी इंतजामों पर चर्चा तेज कर दी है।
6 नवंबर 2026 को प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पाबंदियां लगाने और एक के बाद एक आदेश जारी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। कोर्ट की टिप्पणी थी कि जितने ज्यादा आदेश दिए जाएंगे, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ सकती है। अदालत ने साफ किया कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल कागजी आदेश नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाले कदम जरूरी हैं।
Delhi AQI Today: 391 तक पहुंचा प्रदूषण का स्तर
दिल्ली की हवा की स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा AQI के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 6 नवंबर को राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 391 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है और गंभीर स्तर के काफी करीब है।
CPCB के मॉनिटरिंग आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। रोहिणी और IIT दिल्ली सहित कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा दर्ज किया गया।
इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के धुएं पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली को गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव भी प्रदूषण की बड़ी वजह है।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर काम करते हैं। इसलिए प्रदूषण रोकने के उपाय बनाते समय गरीब और मेहनतकश लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पराली जलाने पर किसानों को सिर्फ आदेश देना काफी नहीं
दिल्ली के प्रदूषण की चर्चा हो और पराली का मुद्दा न आए, ऐसा कम ही होता है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को आर्थिक विकल्प देने की जरूरत बताई।
कोर्ट का कहना था कि किसानों को केवल पराली न जलाने का निर्देश देने से बात नहीं बनेगी। उन्हें यह भी समझाना होगा कि पराली के दूसरे तरीके से प्रबंधन करने पर उन्हें क्या आर्थिक फायदा मिल सकता है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। हालांकि, प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वाहनों, उद्योगों और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल पर भी नियंत्रण जरूरी है।
Delhi NCR में GRAP-2 लागू, फिर भी राहत का इंतजार
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर को GRAP-2 के तहत प्रतिबंध लागू किए थे। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा।
GRAP-2 के तहत कई कदम उठाए गए हैं:
- सड़कों पर पानी का छिड़काव और मैकेनिकल सफाई बढ़ाना।
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन कराना।
- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई।
- खुले में कचरा जलाने पर रोक।
- पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के प्रयास।
इन कदमों का मकसद प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण करना है।
20 नवंबर तक Work From Home और Construction पर पाबंदी
दिल्ली-NCR में प्रदूषण को देखते हुए 5 से 20 नवंबर तक अतिरिक्त एहतियाती उपाय भी लागू किए गए हैं।
दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा NCR में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, अस्पताल, मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, जलापूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रोजेक्ट को कुछ छूट दी गई है।
पुराने वाहनों की Entry पर भी सख्ती
दिल्ली में बाहर से आने वाले पुराने वाहनों पर भी प्रतिबंध लागू किए गए हैं। 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
इलेक्ट्रिक, CNG और BS-VI मानक वाले वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की टीमें अलग-अलग बॉर्डर पर वाहनों की जांच कर रही हैं।
School बंद होंगे या Hybrid Mode में चलेंगे?
प्रदूषण का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से स्कूल बंद करने या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में उठा।
हालांकि, सुनवाई के दौरान सभी स्कूलों को बंद करने का कोई नया आदेश नहीं दिया गया। इस विषय पर विशेषज्ञों की राय और परिस्थितियों के आधार पर फैसला लेने की जरूरत बताई गई।
16 नवंबर को फिर होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के प्रदूषण का समाधान केवल नए प्रतिबंध लगाने में नहीं है। इसके लिए सरकारों को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी, जिसका असर लंबे समय तक दिखाई दे।
वाहनों का धुआं, पराली जलाना, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक प्रदूषण जैसे सभी कारणों पर एक साथ काम करना होगा। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की है।
फिलहाल दिल्ली के लोगों को साफ हवा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कितनी पाबंदियां लगाई गईं, बल्कि यह भी है कि जो नियम पहले से मौजूद हैं, उनका पालन आखिर कितनी गंभीरता से कराया जा रहा है।
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