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राहुल गांधी के आवास पर दिवाली मिलन में कांग्रेस का BJP पर हमला, SIR और प्रदूषण को लेकर उठाए सवाल

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दिवाली से पहले शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुनहरी बाग स्थित आवास पर दिवाली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। त्योहार के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। हालांकि, मुलाकात और शुभकामनाओं के बीच नेताओं ने केंद्र की BJP सरकार पर शासन, नागरिकता, मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और दिल्ली-NCR के प्रदूषण को लेकर निशाना साधा।

कार्यक्रम का उद्देश्य नेताओं के बीच त्योहार के मौके पर मेल-मिलाप करना था, लेकिन इस दौरान राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने BJP के प्रदर्शनों और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी के आवास पर हुए इस दिवाली मिलन कार्यक्रम की तस्वीरें फिलहाल कांग्रेस या किसी नेता की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई हैं। बताया जा रहा है कि यह पहला मौका है, जब राहुल गांधी ने दिवाली के अवसर पर इस तरह की पार्टी आयोजित की है। इससे पहले 13 अक्टूबर को उन्होंने INDIA ब्लॉक के नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था।

दिवाली मिलन में कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?

कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर BJP और सरकार की नीतियों की आलोचना की।

अशोक गहलोत: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने BJP के सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “80 साल में पहली बार भूमिकाएं बदलती दिख रही हैं। विपक्ष के बजाय सत्तारूढ़ पार्टी ‘लोकतंत्र बचाओ’ और ‘अराजकता खत्म करो’ के नारे लगा रही है।”

पवन खेड़ा: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने स्पेशल समरी रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया मतदाताओं को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में ही मान्यता नहीं मिलेगी, तो उसके अधिकारों का क्या होगा।

उदित राज: कांग्रेस नेता उदित राज ने दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण और मौसमी धुंध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब BJP सत्ता में नहीं थी, तब वह हर जिम्मेदारी विपक्ष पर डालती थी। अब केंद्र, राज्य सरकार, उपराज्यपाल के अधीन प्रशासन और स्थानीय नगर निकायों पर BJP का नियंत्रण है, इसलिए प्रदूषण की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।

कार्यक्रम में नेताओं के बयानों से साफ रहा कि कांग्रेस ने दिवाली मिलन के मौके पर भी केंद्र और BJP सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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इंदौर में पति ने पत्नी की हत्या के बाद लगाई फांसी, घर लौटे बच्चों ने देखा खौफनाक मंजर

इंदौर के राऊ इलाके में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। साईं विहार कॉलोनी में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी और इसके बाद खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी। मृतकों की पहचान पवन सोनी (40) और उसकी पत्नी वर्षा (35) के रूप में हुई है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाए। शुरुआती जांच में मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़े विवाद का बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घर लौटे बच्चों ने देखा माता-पिता का शव एसीपी निधि सक्सेना के मुताबिक, रविवार शाम करीब 4 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि साईं विहार कॉलोनी में रहने वाले पवन सोनी ने घर के कमरे में फांसी लगा ली है। कमरे में ही उसकी पत्नी वर्षा का शव भी पड़ा था। वर्षा के गले पर चाकू से वार किए जाने के निशान मिले। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि पवन ने पहले पत्नी की हत्या की और फिर खुद फांसी लगा ली। बताया जा रहा है कि दंपती के 15 साल का बेटा और 7 साल की बेटी है। रविवार दोपहर पवन ने दोनों बच्चों को पास के गार्डन में खेलने भेज दिया था। शाम करीब 4 बजे जब बच्चे घर लौटे तो उन्होंने माता-पिता को इस हालत में देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पराठे की दुकान चलाता था पवन जानकारी के मुताबिक, पवन सोनी पराठे की दुकान लगाता था। वह मूल रूप से रीवा का रहने वाला था और इंदौर में किराए के मकान में परिवार के साथ रहता था। रेहान नाम के युवक को लेकर विवाद की चर्चा प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पवन ने कुछ समय पहले रेहान नाम के युवक को घर पर वेल्डिंग का काम करने के लिए बुलाया था। इसके बाद रेहान और वर्षा के बीच बातचीत होने लगी थी। बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर पवन और रेहान के बीच विवाद था। यह भी दावा किया जा रहा है कि रेहान पवन को धमकाता था। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रेम-प्रसंग और विवाद से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है।
Congress

Congress Donation: कांग्रेस के चंदे में 75% की गिरावट, ₹517 करोड़ से घटकर मिले सिर्फ ₹130 करोड़

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस (Congress) को मिलने वाले चंदे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली थी, लेकिन अब पार्टी की फंडिंग को लेकर सामने आए नए आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कांग्रेस को मिलने वाला बड़ा चंदा करीब 75 फीसदी घट गया है। चुनाव आयोग को सौंपी गई योगदान रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी को इस दौरान ₹130.69 करोड़ मिले, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह रकम ₹517.39 करोड़ थी। यानी महज एक साल में कांग्रेस के घोषित चंदे में करीब ₹386.70 करोड़ की कमी आई है। पिछले 10 वर्षों में यह सबसे बड़ी सालाना गिरावट बताई जा रही है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस की फंडिंग, बड़े दानदाताओं और इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाले पैसे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ₹517 करोड़ से ₹130 करोड़ पर पहुंचा Congress Donation Congress को मिलने वाले चंदे के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में पार्टी को ₹281.48 करोड़ मिले थे। इसके बाद 2024-25 में लोकसभा चुनाव के दौरान यह रकम बढ़कर ₹517.39 करोड़ पहुंच गई। लेकिन 2025-26 में पार्टी को सिर्फ ₹130.69 करोड़ का घोषित चंदा मिला। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कांग्रेस की फंडिंग में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, यह आंकड़ा मुख्य रूप से ₹20,000 से अधिक के घोषित योगदान से जुड़ा है, इसलिए इसे पार्टी की कुल कमाई में गिरावट नहीं माना जा सकता। Prudent Electoral Trust से मिलने वाला चंदा भी घटा Congress को मिलने वाले चंदे में कमी की एक बड़ी वजह Prudent Electoral Trust से प्राप्त योगदान में गिरावट है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस ट्रस्ट ने कांग्रेस को ₹216.34 करोड़ दिए थे। वहीं, 2025-26 में यह रकम घटकर सिर्फ ₹25 करोड़ रह गई। यानी इस स्रोत से मिलने वाले योगदान में करीब 88 फीसदी की कमी आई है। पिछले वित्त वर्ष में प्रूडेंट ट्रस्ट से मिला पैसा कांग्रेस की कुल घोषित फंडिंग का बड़ा हिस्सा था। ऐसे में इस योगदान में आई कमी का असर पार्टी के कुल चंदे पर भी दिखाई दिया। इन कंपनियों और कारोबारियों ने दिया करोड़ों का चंदा चंदे में बड़ी गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों और कारोबारियों ने कांग्रेस को अच्छा-खासा योगदान दिया। रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख नामों में शामिल हैं: इसके अलावा एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के कुल नौ योगदानों से पार्टी को करीब ₹43 करोड़ मिले। वहीं, पांच लाख रुपये या उससे कम के 1,321 छोटे योगदानों से कांग्रेस को कुल ₹37.2 करोड़ प्राप्त हुए। इससे पता चलता है कि पार्टी को बड़े दानदाताओं के साथ छोटे योगदानों से भी पैसा मिला है। BJP और Congress के चंदे में कितना अंतर? राजनीतिक दलों की फंडिंग की तुलना करें तो बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2024-25 में बीजेपी को ₹6,074.02 करोड़ का घोषित चंदा मिला था। वहीं, कांग्रेस को इसी अवधि में ₹517.39 करोड़ प्राप्त हुए थे। इस तरह बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले करीब 12 गुना ज्यादा चंदा मिला था। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बीजेपी की समान अवधि वाली योगदान रिपोर्ट उपलब्ध हुए बिना दोनों पार्टियों के ताजा आंकड़ों की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा। चुनावी साल के बाद कांग्रेस की Funding में क्यों आई गिरावट? Congress के चंदे में आई इस गिरावट को समझने के लिए पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों पर भी नजर डालना जरूरी है। 2024-25 में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को बड़े दानदाताओं और अन्य स्रोतों से अच्छा योगदान मिला था। उस साल कांग्रेस को कूपन की बिक्री से भी ₹350.12 करोड़ प्राप्त हुए थे। लेकिन 2025-26 में पार्टी के घोषित बड़े चंदे में भारी कमी दर्ज की गई। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाली रकम में गिरावट भी इस बदलाव की अहम वजह रही। हालांकि, पार्टी की कुल फंडिंग में कमी के पीछे दूसरे कारणों का पता ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद ही चल सकेगा। क्या कांग्रेस का खजाना खाली हो गया? चंदे में 75 फीसदी की गिरावट के बाद कांग्रेस की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन सिर्फ इस रिपोर्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पार्टी का खजाना खाली हो गया है। दरअसल, चुनाव आयोग में जमा योगदान रिपोर्ट में ₹20,000 से अधिक के चंदे का विवरण दिया जाता है। पार्टी की कुल आय में छोटे चंदे, सदस्यता शुल्क, कूपन की बिक्री और बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज भी शामिल होता है। इसलिए कांग्रेस की वास्तविक आर्थिक स्थिति समझने के लिए उसकी पूरी ऑडिट रिपोर्ट देखना जरूरी होगा। इसमें पार्टी की कुल आय के साथ खर्च और उपलब्ध फंड की जानकारी भी मिलती है। अब कांग्रेस की नजर अगले वित्तीय आंकड़ों पर फिलहाल कांग्रेस के सामने पार्टी की फंडिंग को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। एक तरफ बड़े दानदाताओं से मिलने वाले योगदान में कमी आई है, तो दूसरी तरफ प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाली रकम भी काफी घट गई है। अब सबकी नजर पार्टी की वित्त वर्ष 2025-26 की पूरी ऑडिट रिपोर्ट पर रहेगी। उससे यह साफ हो सकेगा कि चंदे में आई गिरावट का पार्टी की कुल आर्थिक स्थिति पर कितना असर पड़ा है। कुल मिलाकर, कांग्रेस के लिए 2025-26 चंदा जुटाने के लिहाज से पिछले साल जैसा नहीं रहा। ₹517 करोड़ से घटकर ₹130.69 करोड़ पर पहुंचा योगदान पार्टी की फंडिंग में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। हालांकि, पार्टी की पूरी आर्थिक तस्वीर सामने आने के लिए ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Lal Krishna Advani

Lal Krishna Advani Birthday: आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर PM मोदी का खास संदेश, बोले- शून्य से खड़ी की जिंदगी

भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) आज 8 नवंबर को अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके लंबे राजनीतिक सफर और देश के लिए दिए गए योगदान को याद किया। आडवाणी आज 99 साल पूरे कर अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उनका जन्मदिन इस बार दीपावली के दिन पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष लेख भी लिखा, जिसमें उन्होंने आडवाणी के संघर्ष से लेकर BJP के गठन और उसके राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार तक की कहानी साझा की। मोदी ने लिखा कि विभाजन के समय अपना घर छोड़ने के बाद भी आडवाणी ने बिना किसी कड़वाहट के शून्य से अपनी जिंदगी खड़ी की। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। PM मोदी ने याद किया आडवाणी का संघर्ष, बोले- शून्य से खड़ी की जिंदगी नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के शुरुआती जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान) में हुआ था। साल 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान उन्हें अपना घर और परिचित माहौल छोड़कर भारत आना पड़ा। यह उनके जीवन का बड़ा बदलाव था। एक नई जगह पर उन्हें दोबारा जिंदगी शुरू करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने मुश्किलों को अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। PM मोदी के मुताबिक, आडवाणी ने बिना किसी कड़वाहट के अपनी जिंदगी नए सिरे से बनाई। यही धैर्य और संगठन के प्रति समर्पण आगे चलकर उनके राजनीतिक सफर की पहचान बना। भारत आने के बाद आडवाणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और प्रचारक के रूप में राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में काम किया। इसके बाद दिल्ली आकर उन्होंने भारतीय जनसंघ को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई। Atal Advani की जोड़ी ने BJP को दिलाई नई पहचान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक साझेदारी को खास तौर पर याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ऐसे उदाहरण कम मिलते हैं, जहां दो बड़े नेता कई दशकों तक साथ काम करें और एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय सहयोगी बने रहें। अटल जी और आडवाणी जी ने मिलकर ऐसा उदाहरण पेश किया। दोनों नेताओं ने भारतीय जनसंघ से लेकर BJP के गठन और विस्तार तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अटल बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों और नेतृत्व के लिए जाने गए, वहीं आडवाणी ने संगठन को मजबूत करने और देशभर में पार्टी का आधार बढ़ाने पर काम किया। मोदी ने अपने लेख में 1989 और 1996 के लोकसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1989 में कांग्रेस की सीटें 400 से घटकर 200 से नीचे आ गई थीं, जबकि 1996 में BJP पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। प्रधानमंत्री ने आडवाणी को पार्टी में कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियां तैयार करने और ‘Nation First’ की सोच को मजबूत आधार देने का श्रेय दिया। Emergency से Ram Rath Yatra तक, आडवाणी के राजनीतिक सफर के बड़े पड़ाव लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक जीवन कई ऐसे घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है, जिन्होंने देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। साल 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की बहाली के लिए आवाज उठाई। इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौर को आडवाणी के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। इसके बाद 1990 में आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा शुरू की। इस यात्रा ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस को नई दिशा दी। यात्रा के दौरान बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। मोदी ने अपने लेख में बताया कि उन्हें भी इस यात्रा की योजना बनाने से लेकर उसके आयोजन तक जुड़े रहने का अवसर मिला था। उन्होंने सोमनाथ में यात्रा की शुरुआत के समय मौजूद रहने को अपने लिए खास अनुभव बताया। आडवाणी ने केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री, गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया। वह 2002 से 2004 तक देश के उप प्रधानमंत्री रहे। BJP मुख्यालय में पूजा और हवन, Nitin Nabin समेत कई नेता हुए शामिल आडवाणी के जन्मदिन पर नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी समेत कई नेता शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा और हवन से हुई। इसके बाद आडवाणी के जीवन, राजनीतिक सफर और उनके महत्वपूर्ण भाषणों पर आधारित करीब 20 मिनट की विशेष वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने आडवाणी को पार्टी के लिए मार्गदर्शक बताते हुए उनके संगठनात्मक योगदान और विचारधारा के प्रति समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अमित शाह और राजनाथ सिंह ने भी दी जन्मदिन की बधाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, संगठन निर्माण और राष्ट्रसेवा में योगदान को याद किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आडवाणी के राजनीतिक जीवन और उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आडवाणी के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि आडवाणी ने कई मौकों पर उनका मार्गदर्शन किया और राजनीति की बारीकियां समझने में मदद की। मोदी ने उन्हें अपने लिए अभिभावक जैसा बताया। किताबें पढ़ने और सिनेमा के शौकीन भी हैं आडवाणी आडवाणी की पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर ही नहीं रही है। उन्हें किताबें पढ़ने, अखबार देखने और देश-दुनिया की घटनाओं पर नजर रखने का भी शौक है। PM मोदी ने अपने लेख में बताया कि आडवाणी भारतीय संस्कृति, सिनेमा और थिएटर में भी गहरी दिलचस्पी रखते हैं। वह फिल्मों की समीक्षा करने में भी रुचि रखते थे। उनकी चर्चित किताब ‘My Country My Life’ उनके राजनीतिक अनुभवों और जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं...
Ethanol

Ethanol Blending Controversy: पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल का आरोप, राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा

देश में Ethanol पेट्रोल को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा कितनी होनी चाहिए और क्या तेल कंपनियां तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिला रही हैं? इन सवालों ने अब राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। कर्नाटक सरकार ने दावा किया है कि राज्य में जांच के दौरान कुछ पेट्रोल सैंपल में 30 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल मिला। वहीं, केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए 893 सैंपल की जांच रिपोर्ट जारी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जांचे गए सभी 893 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच मिली। कर्नाटक में भी 56 सैंपल की जांच में औसतन 19.30 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया। इस बीच राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए E20 को ‘420’ बताया और पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठाए। Karnataka की रिपोर्ट में 31.2% तक Ethanol मिलने का दावा इस पूरे विवाद की शुरुआत कर्नाटक सरकार की पेट्रोल जांच रिपोर्ट से हुई। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने 6 नवंबर को जांच के नतीजे सार्वजनिक किए थे। कर्नाटक सरकार के मुताबिक, सात जिलों से पेट्रोल के 63 सैंपल इकट्ठा किए गए थे। इन्हें जांच के लिए मान्यता प्राप्त लैब में भेजा गया। रिपोर्ट में कुछ सैंपल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से काफी ज्यादा होने का दावा किया गया। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार: कर्नाटक सरकार ने इन नतीजों के आधार पर सवाल उठाया कि जब पेट्रोल को E20 के नाम पर बेचा जा रहा है, तो उसमें 25 से 31 प्रतिशत तक एथेनॉल कैसे मिल सकता है? केंद्र सरकार ने 893 Samples की जांच में क्या पाया? कर्नाटक की रिपोर्ट सामने आने के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 7 नवंबर को अपना पक्ष रखा। मंत्रालय ने बताया कि देशभर में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल सैंपल की जांच कराई गई है। इसमें तीन सरकारी तेल कंपनियों के सैंपल शामिल थे: इस तरह कुल 893 सैंपल की जांच हुई। ये सैंपल 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए थे। मंत्रालय के मुताबिक, सभी सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच मिली। यानी जांच में किसी भी सैंपल में निर्धारित सीमा से ज्यादा एथेनॉल नहीं पाया गया। कर्नाटक को लेकर भी मंत्रालय ने अलग आंकड़े जारी किए। सरकार के अनुसार, राज्य में तीनों सरकारी तेल कंपनियों के 56 सैंपल जांचे गए। इनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत 19.30 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस तरह केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार की रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है। Rahul Gandhi ने E20 को बताया ‘420’ E20 पेट्रोल को लेकर राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘E20 बना 420’ लिखते हुए इस मामले को आम लोगों की गाड़ियों और उनकी जेब से जुड़ा मुद्दा बताया। राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 14 में से 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई। उन्होंने सवाल किया कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल की तय सीमा 20 प्रतिशत है, तो कुछ सैंपल में यह मात्रा 30 प्रतिशत से ऊपर कैसे पहुंच गई? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि देश में पेट्रोल के साथ वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी? Oil Companies ने कर्नाटक की जांच पर उठाए सवाल केंद्र सरकार के साथ सरकारी तेल कंपनियों ने भी कर्नाटक की जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। IOCL, BPCL और HPCL का कहना है कि पेट्रोल की गुणवत्ता जांचने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। कंपनियों के मुताबिक, नियमों के तहत छह एक-लीटर सैंपल लेने की प्रक्रिया होती है। इनमें से दो सैंपल पेट्रोल पंप डीलर को दिए जाते हैं, दो कंपनी या संबंधित विभाग के पास सुरक्षित रखे जाते हैं और बाकी दो अधिकृत लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं। कंपनियों का आरोप है कि कर्नाटक में हुई जांच के दौरान उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं थी। उन्हें पूरी लैब रिपोर्ट और सुरक्षित रखे गए सैंपल की जानकारी भी नहीं दी गई। इसी वजह से तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से पूरी रिपोर्ट और सैंपल उपलब्ध कराने की मांग की है। कंपनियों ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में अधिकृत लैब से दोबारा जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा है। Karnataka सरकार ने केंद्र से की ये मांगें पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर कर्नाटक सरकार ने केंद्र के सामने कई मांगें रखी हैं। राज्य सरकार चाहती है कि पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी आम लोगों को मिले। मुख्य मांगों में शामिल हैं: राज्य सरकार का कहना है कि ग्राहक को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी गाड़ी में किस गुणवत्ता का ईंधन डलवा रहा है। E20 Petrol से गाड़ी का Mileage कितना कम होता है? E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है। यही वजह है कि इसके इस्तेमाल से कुछ गाड़ियों के माइलेज पर असर पड़ सकता है। सरकारी तकनीकी जानकारी के मुताबिक, E20 के लिए तैयार गाड़ियों में माइलेज लगभग 1 से 2 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, कुछ पुराने या E20 के अनुकूल नहीं बने वाहनों में यह कमी लगभग 3 से 6 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर गाड़ी में एक जैसा नहीं होता। यह वाहन के मॉडल, इंजन और फ्यूल सिस्टम की तकनीक पर निर्भर करता है। यही चिंता पुराने वाहन मालिकों को सबसे ज्यादा है। लोगों के मन में सवाल है कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से ज्यादा हुई तो उनकी गाड़ियों के प्रदर्शन और रखरखाव पर क्या असर पड़ेगा? भारत में E20 Petrol क्यों लागू किया गया? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने...
Diwali

Diwali Celebration: बाबा केदार का फूलों से हुआ श्रृंगार, राहुल गांधी ने दी शुभकामनाएं; PM मोदी ने की फडणवीस की तारीफ

देशभर में आज 8 नवंबर को दीपावली (Diwali) का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। कहीं घरों में दीप जल रहे हैं, तो कहीं मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। इस बीच उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से आई तस्वीरें लोगों का ध्यान खींच रही हैं। बाबा केदारनाथ का मंदिर करीब 20 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। वहीं, राहुल गांधी ने देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि यह त्योहार हर घर में खुशियों और नई उम्मीदों की रोशनी लेकर आए। दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बार किसानों के बीच पहुंचकर दिवाली मनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके इस कदम की सराहना की है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित लाखों किसानों के लिए दिवाली से पहले आर्थिक सहायता भी जारी की है। Kedarnath Temple Decoration: 20 क्विंटल फूलों से सजा बाबा केदार का दरबार दीपावली के मौके पर केदारनाथ धाम में इस बार खास रौनक देखने को मिल रही है। बाबा केदारनाथ के मंदिर को करीब 20 क्विंटल गेंदे और दूसरे रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच फूलों से सजे मंदिर की खूबसूरती देखते ही बन रही है। मंदिर परिसर में की गई इस भव्य सजावट को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं। मंदिर समिति की ओर से हर साल की तरह इस बार भी दीपावली पर बाबा के दरबार का विशेष श्रृंगार किया गया है। वहीं, शीतकालीन प्रवास की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल भगवान भुकुंड भैरवनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब 11 नवंबर 2026 को सुबह 8:30 बजे बाबा केदारनाथ के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद बाबा की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल की ओर रवाना होगी। Rahul Gandhi Diwali Wishes: राहुल गांधी बोले- हर घर में जलें खुशियों के दीप दीपावली के अवसर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। राहुल गांधी ने अपने संदेश में कामना की कि हर घर में खुशियों और समृद्धि के दीप जलें। यह पावन त्योहार पूरे भारत में सुख, शांति, सौहार्द और नई उम्मीदों की रोशनी लेकर आए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी देशवासियों को दिवाली की बधाई दी। उन्होंने समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि अन्याय, अज्ञान और भेदभाव का अंधेरा दूर हो और हर व्यक्ति तक न्याय व समानता की रोशनी पहुंचे। किसानों के घर पहुंचे CM देवेंद्र फडणवीस, साथ बैठकर किया भोजन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बार दिवाली किसानों के बीच मनाने का फैसला किया। इसी सिलसिले में वह नागपुर जिले के नरखेड़ तालुका स्थित लोहारी सावंगा गांव पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री किसान रामभाऊ बालपांडे के घर पहुंचे। परिवार ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। फडणवीस ने किसान परिवार के साथ समय बिताया और उनके घर पर बैठकर महाराष्ट्र का पारंपरिक भोजन भी किया। इसके बाद उन्होंने गांव के करीब 100 लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने फसल खराब होने, सिंचाई के लिए पानी की कमी और सूखे की स्थिति से जुड़ी परेशानियां सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे का तत्काल समाधान आसान नहीं है, लेकिन राज्य सरकार किसानों को हरसंभव सहायता देने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि त्योहार के मौके पर किसानों के साथ समय बिताने का मकसद उनका हौसला बढ़ाना और उनकी समस्याओं को करीब से समझना है। Maharashtra Farmers Relief: 87 लाख से ज्यादा किसानों को मिले 4,372 करोड़ रुपये महाराष्ट्र में इस साल कम बारिश और सूखे की स्थिति ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कई इलाकों में कपास, सोयाबीन और तुअर जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में राज्य सरकार ने दिवाली से पहले प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत देने का ऐलान किया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में 87,45,669 किसानों के बैंक खातों में कुल 4,372.83 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी गई है। पात्र किसानों को 5,000 रुपये की अंतरिम सहायता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, कुछ किसानों के भुगतान में बैंक खातों की तकनीकी गड़बड़ियों और गलत जानकारी के कारण देरी हुई है। सरकार के मुताबिक, बाकी पात्र किसानों तक भी सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। PM Modi ने की फडणवीस की तारीफ, किसानों के बीच दिवाली मनाने को बताया खास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के किसानों के साथ दिवाली मनाने के फैसले की तारीफ की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि लोहारी सावंगा गांव में किसानों के साथ दिवाली मनाना और किसान परिवार के घर समय बिताना दिल को छूने वाला कदम है। उन्होंने इसे किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनके कल्याण की भावना से जुड़ा बताया। दरअसल, महाराष्ट्र में सूखे और फसल नुकसान से जूझ रहे किसानों के बीच त्योहार मनाने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि इस समय ग्रामीण इलाकों में खेती और पानी से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। Diwali 2026: आस्था, खुशियों और एकजुटता का त्योहार इस बार दिवाली पर देश के अलग-अलग हिस्सों से कई खास तस्वीरें सामने आई हैं। केदारनाथ में बाबा के दरबार की भव्य सजावट श्रद्धालुओं का मन मोह रही है, तो राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के शुभकामना संदेशों में शांति, भाईचारे और खुशहाली की कामना दिखाई दे रही है। वहीं, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का किसानों के घर पहुंचना और उनके साथ त्योहार मनाना भी चर्चा में है। सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए आर्थिक सहायता जारी करना इस मौके पर एक अहम खबर है। दिवाली सिर्फ दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं, बल्कि खुशियां साझा करने और मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देने का भी संदेश देती है। इस बार देशभर से आई ये तस्वीरें इसी भावना को सामने रखती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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