US-Iran के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ताजा बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका 25 अक्टूबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, इस बीच ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच एक बड़ी डील होने की उम्मीद भी जताई है। एक तरफ अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपना रहा है, तो दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच क्या फैसला होता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर है। ट्रम्प ने ईरान को लेकर क्या कहा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया है। उनका कहना है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच एक बड़ी डील हो सकती है। ट्रम्प के बयान से यह साफ है कि अमेरिका दबाव बनाए रखने के साथ समझौते की संभावना पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, 25 अक्टूबर को हमला करने का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है। Iran Nuclear Program बना विवाद की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद चल रहा है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान ऐसा कोई कदम न उठाए, जिससे वह परमाणु हथियार विकसित कर सके। वहीं, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के आरोपों पर आपत्ति जताई है। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और शर्तों पर असहमति के कारण बातचीत आगे बढ़ाना आसान नहीं रहा है। परमाणु कार्यक्रम के अलावा आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इस विवाद को प्रभावित कर रहे हैं। ईरान भी बातचीत के लिए तैयार, लेकिन शर्तें अहम तनाव के बीच ईरान की ओर से भी बातचीत का रास्ता खुला रखने के संकेत मिले हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ समझौते की कोशिशों को दोबारा आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है। हालांकि, बातचीत को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर ठोस आश्वासन चाहता है, जबकि ईरान अपनी शर्तों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी अहम मानता है। यही वजह है कि बड़ी डील की उम्मीद के बावजूद अभी यह कहना मुश्किल है कि दोनों देश जल्द किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे। Strait of Hormuz पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल सैन्य और राजनीतिक मामलों तक सीमित नहीं है। Strait of Hormuz भी इस विवाद का एक अहम हिस्सा है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण पश्चिम एशिया के हालात को लेकर दुनिया के कई देश सतर्क हैं। भारत पर क्या पड़ सकता है असर? अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने पर आयात खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि, आम लोगों को कितना असर झेलना पड़ेगा, यह कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, किसी संभावित हमले के कारण भारत में तेल की कीमतें बढ़ने की निश्चित भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। US-Iran War Update: क्या आज हो सकता है हमला? 25 अक्टूबर को संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रम्प सैन्य विकल्प चुनेंगे या बातचीत को आगे बढ़ाएंगे। उनके बयान में दोनों संभावनाओं के संकेत हैं, लेकिन किसी नए हमले की अंतिम पुष्टि सामने नहीं आई है। अगर दोनों देश बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, बातचीत विफल होने पर हालात और जटिल हो सकते हैं। फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच अगला कदम क्या होगा, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। दुनिया की नजर अब ट्रम्प के अगले फैसले और दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!