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31 मई 2025 (शनिवार)का पंचांग (Panchang)

Table of Content

तिथि: शुक्ल पंचमी

पक्ष: शुक्ल पक्ष

सूर्योदय: 05:45 AM

सूर्यास्त: 07:04 PM

चंद्रोदय: 09:41 AM

चंद्रास्त: 11:27 PM

राहुकाल: 09:04 AM – 10:44 AM

शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त – 11:57 AM – 12:51 PM

सूर्य राशि: वृषभ

चंद्र राशि: कर्क

योग: मित्र

नक्षत्र: पुष्य

पर्व: सीतल षष्ठी

शक संवत: 1947

विक्रम संवत: 2082

ऋतु: ग्रीष्म

Yukta

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Meta

Meta Action पर मचा बवाल: PM Modi Video हटाने के बाद Zuckerberg ने मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद मामला अब तूल पकड़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो हटाए जाने को लेकर सरकार ने Meta के सामने नाराजगी जताई और कंपनी को तीन दिन के भीतर मामले पर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद Meta की ओर से इस मामले में माफी मांगे जाने की बात सामने आई है। मामला उस समय का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। कुछ समय बाद यह वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। वीडियो हटने के बाद सवाल उठे कि आखिर इसे किस आधार पर हटाया गया और इसके पीछे Meta की क्या वजह थी। Jantar Mantar Protest के दौरान पोस्ट हुआ था Video बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। प्रदर्शन से जुड़े इस वीडियो के हटने के बाद मामला सरकारी स्तर तक पहुंच गया। सरकार की ओर से Meta से इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। Government के Ultimatum के बाद Meta ने मांगी माफी सरकार की ओर से समयसीमा दिए जाने के बाद Meta की तरफ से मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने वीडियो हटाए जाने को लेकर माफी मांगी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि Social Media Platforms पर राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट को हटाने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। किसी वीडियो को हटाने से पहले प्लेटफॉर्म की नीतियों और परिस्थितियों का आकलन किस तरह किया जाता है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है। PM Modi से जुड़े Content पर क्यों बढ़ी चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी किसी भी पोस्ट या वीडियो पर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। ऐसे में किसी वीडियो का अचानक हटना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचता है। इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप और उसके बाद Meta की ओर से माफी की खबर ने पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है। हालांकि, वीडियो हटाने की सटीक वजह और Meta की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। Social Media Companies की Accountability पर सवाल यह घटना केवल एक वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं है। इससे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और Content Moderation Policy पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज करोड़ों लोग सोशल मीडिया को खबरों और सूचनाओं के प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण वीडियो या पोस्ट को हटाए जाने पर प्लेटफॉर्म की ओर से स्पष्ट कारण बताना और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सरकार के तीन दिन के अल्टीमेटम और उसके बाद Meta की ओर से आई माफी को लेकर है। आने वाले समय में कंपनी की ओर से इस मामले पर और स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

RBI On Plastic Currency: ₹10-₹20 के Plastic Notes को लेकर सामने आया नया Update

अगर आपके बटुए में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कुछ ही दिनों में पुराने और मुड़े-तुड़े नजर आने लगते हैं, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹10 और ₹20 के Plastic यानी Polymer Notes को लेकर RBI की तैयारी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इन नोटों को लाने की बात चल रही है और अब इसके संभावित लॉन्च को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि Polymer Notes को लेकर प्रक्रिया अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले इनका ट्रायल और जरूरी तकनीकी जांच होगी। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का फैसला किया जाएगा। क्यों जरूरी महसूस हो रहे हैं Plastic Notes? भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए खूब होता है। चाय की दुकान से लेकर ऑटो का किराया और छोटे-मोटे सामान की खरीदारी तक, इन नोटों का इस्तेमाल लगातार होता रहता है। यही वजह है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। Polymer Notes इसी समस्या का एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं। ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर भी बेहतर तरीके से टिक सकते हैं। ₹10 और ₹20 के नोटों से क्यों हो सकती है शुरुआत? Plastic Currency को लेकर शुरुआती फोकस ₹10 और ₹20 denomination पर रहने की संभावना है। इन दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का सर्कुलेशन काफी ज्यादा है। ऐसे में इनके Polymer Version को इस्तेमाल में लाकर इसकी व्यावहारिकता को बेहतर तरीके से परखा जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहता है और लोगों के इस्तेमाल से जुड़े पहलू संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आगे चलकर दूसरे मूल्यवर्ग की करेंसी पर भी विचार हो सकता है। कब लॉन्च होंगे Polymer Notes? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹10 और ₹20 के Plastic Notes आम लोगों के हाथ में कब पहुंचेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले field trial और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद RBI इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर फैसला करेगा। इसलिए अभी इसे ऐसी योजना नहीं माना जा सकता जिसमें कोई निश्चित तारीख तय हो चुकी हो। यानी लोगों को फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा नोट सामान्य रूप से चलन में बने रहेंगे, जब तक RBI की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया जाता। नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम Polymer Currency का एक अहम फायदा इसकी security features से भी जुड़ा है। इन नोटों में ऐसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कॉपी करना नकली नोट बनाने वालों के लिए मुश्किल हो। हालांकि, किसी नए नोट को जारी करने से पहले RBI को उसकी सुरक्षा के साथ-साथ ATM, cash counting machines और दूसरे banking systems के साथ compatibility भी जांचनी होती है। क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। Polymer Notes आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अगर नए नोट जारी होते हैं तो RBI की ओर से उनकी वैधता और पुराने नोटों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चलने वाली ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा करने से बचें जिसमें पुराने ₹10 या ₹20 के नोटों को अचानक बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। भारत में Currency का बदलता रूप भारत में समय के साथ करेंसी में कई बदलाव हुए हैं। सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने से लेकर नोटों के डिजाइन और आकार में बदलाव तक, RBI लगातार करेंसी सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। अब अगर Polymer Notes का प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारतीय करेंसी के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर छोटे नोटों की durability बढ़ाने में इसका फायदा मिल सकता है। RBI के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल ₹10 और ₹20 के Plastic Notes को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है और अंतिम लॉन्च से पहले ट्रायल व जरूरी जांच पूरी की जाएगी। इसलिए निश्चित लॉन्च डेट को लेकर RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही सही रहेगा। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट चलते रहेंगे। Polymer Notes आते हैं तो RBI उनकी उपलब्धता, इस्तेमाल और पुराने नोटों को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक करेगा।
Supreme Court

Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
परिसीमन Bill

Parliament Special Session: परिसीमन Bill पर सरकार का बड़ा प्लान, जल्द हो सकता है फैसला

देश की राजनीति में एक बार फिर Delimitation (परिसीमन) का मुद्दा चर्चा में है। केंद्र सरकार परिसीमन Bill को आगे बढ़ाने के लिए संसद का Special Session बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। अगर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो संसद के साथ-साथ राज्यों की राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। परिसीमन का मामला सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं और राज्यों को मिलने वाले राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों और राज्यों की भी नजर बनी हुई है। Special Session क्यों बुलाने की चर्चा? परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को संसद में लाने के लिए सरकार विशेष सत्र का रास्ता अपना सकती है। हालांकि, अभी तक विशेष सत्र की तारीख या बिल के अंतिम प्रारूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार अगर विशेष सत्र बुलाती है, तो इस दौरान परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। साथ ही राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी की जा सकती है। आखिर Delimitation क्या होता है? सरल भाषा में समझें तो Delimitation यानी परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण है। इसका उद्देश्य जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना होता है। देश में आखिरी बड़े परिसीमन की प्रक्रिया 1970 के दशक में हुई थी। इसके बाद लोकसभा सीटों के राज्यों के बीच आवंटन को लेकर एक निश्चित व्यवस्था लागू रही। अब 2026 के बाद होने वाली प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। किन राज्यों पर पड़ सकता है असर? परिसीमन की चर्चा में सबसे बड़ा सवाल राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का है। जिन राज्यों में पिछले दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, वहां लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जाती रही है। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इन राज्यों में यह चिंता रही है कि अगर सिर्फ मौजूदा जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष के सामने भी बड़ा मुद्दा अगर Delimitation Bill संसद में पेश होता है, तो विपक्ष इस पर सरकार से कई सवाल पूछ सकता है। राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या नियंत्रण और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रह सकते हैं। विपक्षी दलों की कोशिश होगी कि परिसीमन की प्रक्रिया में राज्यों के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं सरकार की ओर से जनसंख्या के बदलते आंकड़ों और समान प्रतिनिधित्व की जरूरत को आधार बनाया जा सकता है। क्या बदल सकती है लोकसभा की तस्वीर? परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के साथ सीटों की संख्या में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी। इसके लिए परिसीमन आयोग की प्रक्रिया, जनगणना के आंकड़े और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के अगले कदम पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परिसीमन को लेकर कब और किस रूप में कदम उठाती है। अगर संसद का Special Session बुलाया जाता है और Bill पेश होता है, तो यह मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक बड़ा घटनाक्रम होगा। परिसीमन का असर लंबे समय तक देश की चुनावी राजनीति पर रह सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा के साथ-साथ विपक्ष और राज्यों की प्रतिक्रिया भी काफी महत्वपूर्ण होगी।
Stock Market

Stock Market सेंसेक्स 100 अंक मजबूत, Nifty 50 कमजोर; Realty और Auto Sector में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में बुधवार को कारोबार की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ हुई। Sensex करीब 100 अंक चढ़कर 78,550 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 50 अंक की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। बाजार में जहां कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव रहा, वहीं Realty और Auto सेक्टर के Stocks में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। Realty और Auto Stocks बने बाजार की पसंद बुधवार के कारोबार में Realty और Auto सेक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। दोनों सेक्टर के कई शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। रियल्टी कंपनियों में आई मजबूती से संकेत मिलता है कि निवेशक इस सेक्टर के चुनिंदा Stocks को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, Auto सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। बाजार की मौजूदा चाल में इन दोनों सेक्टर्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। Sensex ने दिखाई मजबूती, Nifty में गिरावट कारोबार के दौरान Sensex करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 78,550 के आसपास पहुंचा। हालांकि, Nifty 50 में लगभग 50 अंकों की कमजोरी देखने को मिली। यानी बाजार में फिलहाल एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय मिला-जुला रुख बना हुआ है। इस तरह की स्थिति में निवेशक पूरे बाजार के बजाय खास सेक्टर और चुनिंदा कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। बुधवार को भी यही तस्वीर दिखाई दी, जहां Realty और Auto Stocks में खरीदारी ने बाजार की हलचल बढ़ाई। Investors की नजर आगे के संकेतों पर बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, आर्थिक आंकड़े और विदेशी बाजारों की चाल भी भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकती है। फिलहाल Sensex की बढ़त और Nifty की कमजोरी से बाजार में सावधानी का माहौल नजर आ रहा है। हालांकि Realty और Auto Stocks में खरीदारी यह बताती है कि निवेशक चुनिंदा सेक्टर्स में मौके तलाश रहे हैं। Market में आगे क्या रहेगा फोकस? आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन, ग्लोबल मार्केट के संकेत और निवेशकों के सेंटीमेंट पर रहेगी। ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी की आगे की चाल के साथ-साथ सेक्टरवार प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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