देश हरपल ब्यूरो | नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025
India-US Trade Deal को लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, लेकिन वाशिंगटन में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। भारत का डेलिगेशन अमेरिका से लौट चुका है और अब अमेरिका के डेलिगेशन के अगस्त के दूसरे हफ्ते भारत आने की उम्मीद है। लेकिन बड़ा सवाल ये है – क्या 1 अगस्त से भारत को 26% टैरिफ देना पड़ेगा?
अमेरिकी चेतावनी: “1 अगस्त से टैरिफ तय हैं”
US Commerce Secretary हॉवर्ड लुटनिक ने 20 जुलाई को दिए गए एक इंटरव्यू में साफ कर दिया:
“1 अगस्त से नई टैरिफ दरें लागू होंगी। उसके बाद भी बात हो सकती है, लेकिन टैरिफ देना ही होगा।”
इस बयान के बाद भारत में एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर से जुड़े करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यही दो क्षेत्र अमेरिका के मुख्य दबाव बिंदु हैं।
भारत का रुख: “डेयरी और मक्का पर नहीं होगा समझौता”
सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिका की उन मांगों को मानने से इनकार कर दिया है जिनका सीधा असर देश के कृषि ढांचे और 8 करोड़ डेयरी वर्कर्स की आजीविका पर पड़ता। भारत न तो मक्का (corn) और न ही सोयाबीन पर टैरिफ में कटौती को लेकर राजी है।
बातचीत में देरी: अमेरिका ने क्यों नहीं भेजा टैरिफ नोटिस?
अब तक अमेरिका ने कम से कम 14 देशों को 25% से 40% टैरिफ को लेकर चिट्ठी भेज दी है। लेकिन भारत को ऐसी कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, जिससे ये उम्मीद बनी हुई है कि बातचीत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
ट्रंप की BRICS चेतावनी और रूस फैक्टर
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि BRICS देश डॉलर का विकल्प तलाशते हैं, तो उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। साथ ही, रूसी वस्तुओं पर 100% टैरिफ और रूसी तेल खरीदने वालों पर सख्ती के संकेत भी दिए हैं।
भारत इस समय रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, ऐसे में यह चेतावनी भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष: क्या है अगला कदम?
अब सबकी निगाहें अगस्त के दूसरे हफ्ते पर हैं, जब अमेरिकी ट्रेड डेलीगेशन भारत आएगा। अगर तब तक समाधान नहीं निकला, तो भारत को बड़ी आर्थिक चोट झेलनी पड़ सकती है, खासतौर पर एक्सपोर्ट और कृषि-आधारित उद्योगों में।
