Kishtwar, जम्मू-कश्मीर: 14 अगस्त 2025 को Kishtwar जिले के चशोटी गांव में भीषण Cloudburst (बादल फटना) ने इलाके में तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 56 लोगों की मौत, 250 से अधिक लोग लापता और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं।
पीड़ितों ने सुनाई अपनी डरावनी कहानी
स्थानीय लोग और मचैल माता यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने आपदा के दौरान के भयावह अनुभव साझा किए। एक पीड़ित ने कहा, “हमें लगा कि दुनिया खत्म हो गई।”
सेना, पुलिस, NDRF और स्थानीय लोग मलबे में दबे लोगों को बचाने और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
प्रभावित क्षेत्र और श्रद्धालु
चशोटी गांव मचैल माता यात्रा का अंतिम पड़ाव है। यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु लंगर में भोजन कर रहे थे, जो अचानक आई बाढ़ में बह गया। प्रशासन ने तुरंत यात्रा स्थगित कर दी।
प्रशासनिक और सरकारी प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और राहत कार्यों के लिए सभी कदम उठाने का आश्वासन दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना climate change (जलवायु परिवर्तन) और अनियंत्रित विकास के कारण बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को दर्शाती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
Kishtwar बादल फटना यह दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और त्वरित राहत कार्य कितने महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, सेना और स्थानीय समुदाय की सक्रियता से अब भी कई लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा सकता है।
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