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Sensex Nifty Today Stock Market Movement, Gold Price और Rupee अपडेट

Table of Content

आज, 30 सितंबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में मिश्रित रुझान देखने को मिला। शुरुआती ट्रेडिंग में सेंसेक्स (Sensex) ने 100 से अधिक अंकों की तेजी दिखाई, जबकि निफ्टी (Nifty 50) 24,650 के ऊपर स्थिर रहा। इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से Metal Sector और Pharmaceutical Stocks की मजबूती रही।

धातु सेक्टर में जोरदार उछाल

ताम्र (Copper) की कीमतें तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जिससे धातु क्षेत्र (Metal Sector) के शेयरों में खरीदारी में बढ़ोतरी हुई। इससे सेंसेक्स में शुरुआती तेजी का बड़ा योगदान रहा।

सोना चांदी के भाव में तेजी

Gold Price आज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँच गया है और यह पिछले 14 वर्षों में अपने सबसे अच्छे मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी सरकार के संभावित शटडाउन और ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें सोने और चांदी (Silver Price) में निवेश को आकर्षक बना रही हैं।

रुपया मजबूत

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया (INR) 4 पैसे मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 88.71 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे निर्यात-आयात व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।

कंपनियों का प्रदर्शन

  • Bharat Electronics Limited (BEL) ने 1,092 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल करने की घोषणा की, जिससे कंपनी के शेयर में 1% से अधिक की बढ़त दर्ज हुई।
  • दूसरी ओर, Tata Motors के शेयर में गिरावट आई, क्योंकि Moody’s ने Jaguar Land Rover से जुड़े साइबर सुरक्षा मामले के कारण कंपनी का आउटलुक डाउनग्रेड कर दिया।

बाजार का समग्र मूड

दिन की शुरुआत में तेजी के बावजूद, सेंसेक्स ने कुछ समय के लिए अपनी बढ़त खो दी और फ्लैट ट्रेडिंग की स्थिति में आ गया। निवेशक आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

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Yukta

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Monsoon

Monsoon Update: बिहार में Flood से 27 लाख लोग प्रभावित, Maharashtra के Amboli में मूसलाधार बारिश

देश में मानसून (Monsoon) का असर अब भी अलग-अलग इलाकों में अलग तस्वीर दिखा रहा है। कहीं आसमान साफ हो रहा है तो कहीं लगातार बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Amboli में तेज बारिश ने पश्चिमी घाट के इस इलाके को फिर चर्चा में ला दिया है। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगह पानी घरों और सड़कों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। Bihar Flood: 13 जिलों में लाखों लोग प्रभावित बिहार में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 27 लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान के आस बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन ने राहत व्यवस्था बढ़ाई है। सामुदायिक रसोई के जरिए लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि नावों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही और राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। Ganga के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता गंगा का बढ़ता जलस्तर खास तौर पर चिंता का विषय बना हुआ है। नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हुई है। किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। Maharashtra के Amboli में भारी बारिश बिहार से हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में मानसून ने अलग रंग दिखाया है। सिंधुदुर्ग जिले का Amboli पश्चिमी घाट में स्थित है और अपनी भारी बारिश के लिए जाना जाता है। मानसून के दौरान अंबोली में लगातार बारिश, धुंध और तेज जलप्रवाह आम बात है। यहां के जंगल और पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर साफ दिखाई देता है। इस दौरान कई झरने भी तेज बहाव के साथ नजर आते हैं। अंबोली को महाराष्ट्र के सबसे अधिक बारिश वाले इलाकों में गिना जाता है और इसे कई बार महाराष्ट्र की ‘चेरापूंजी’ भी कहा जाता है। Satellite तस्वीरों में बदलती दिखी मौसम की तस्वीर मानसून के बीच देशभर के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। Satellite images में कई हिस्सों में बादलों की स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। कुछ क्षेत्रों में बादल छंट रहे हैं, जबकि पूर्वी भारत और अन्य हिस्सों में बारिश का असर अभी बना हुआ है। यही वजह है कि एक ही समय पर देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कहीं बाढ़ से लोग परेशान हैं तो कहीं बारिश के बाद मौसम सुहावना बना हुआ है। आगे भी मौसम पर रहेगी नजर बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और बारिश पर नजर रखना जरूरी होगा। प्रशासन राहत और बचाव अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहा है। वहीं महाराष्ट्र के अंबोली में भी बारिश का दौर इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए चुनौतियां लेकर आता है। फिलहाल मानसून पूरी तरह थमा नहीं है। ऐसे में Bihar Flood, Heavy Rainfall और Monsoon Update से जुड़ी स्थिति पर प्रशासन और मौसम विभाग की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tibet-Nepal

Tibet-Nepal Border पर भारी तबाही, 11 दिन बाद Foreign Journalists ने देखा Ground Reality

Tibet-Nepal की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद आखिरकार विदेशी मीडिया को तिब्बत के प्रभावित इलाके तक पहुंच मिली। चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत चुनिंदा International Journalists को Gyirong County ले जाया गया, जहां आपदा के बाद की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने ज्यादा साफ तौर पर आई हैं। यह आपदा इतनी भयावह थी कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद कभी व्यस्त रहने वाला Gyirong Border Crossing मलबे और कीचड़ में बदल गया। पांच मंजिला कस्टम बिल्डिंग समेत कई ढांचे बाढ़ की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर तबाही देखी, जबकि Rescue Teams अब भी मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। Nepal में 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या भी 1,300 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल में बड़ी संख्या में लापता लोग Hydropower Projects से जुड़े कर्मचारी हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है। मलबे से घिरी सुरंगों तक पहुंचना Rescue Teams के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तबाही के बीच जिंदा बचने की उम्मीद इतनी बड़ी त्रासदी के बीच कुछ घटनाओं ने उम्मीद भी जगाई है। नेपाल में दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को करीब नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। उनके बचने की कहानी ने उन परिवारों में भी उम्मीद पैदा की है, जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। बचाव अभियान में नेपाल के साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाका, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों में जमा पानी Rescue Operation को लगातार कठिन बना रहे हैं। Tibet में 43 मौतें, 519 लोग Missing चीन की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत के Gyirong इलाके में अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यही वजह है कि लापता लोगों के परिवार लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ विदेशी राजनयिकों और परिवारों ने चीन से राहत अभियान और Missing Persons को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की है। Foreign Media की पहुंच पर क्यों उठे सवाल? आपदा के शुरुआती दिनों में तिब्बत के प्रभावित हिस्से तक विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित रही। नेपाल की तरफ से आपदा की तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट लगातार सामने आती रहीं, लेकिन चीनी हिस्से की स्थिति को लेकर जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थी। अब 11 दिन बाद चीन की ओर से चुनिंदा विदेशी पत्रकारों को Gyirong ले जाने के बाद सीमा क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे वहां चल रहे Search and Rescue Operation और नुकसान के वास्तविक स्तर को समझने में मदद मिली है। भारत के नागरिक भी प्रभावित इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जबकि 166 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल के राहत अभियान में करीब 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीम भेजी है। भारतीय टीमों में Tunnel Rescue, Forensic और Medical Experts भी शामिल हैं। इन टीमों की मदद से मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ बाढ़ नहीं, Himalayan Disaster का बड़ा संकेत इस पूरी घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और Glacial Lake से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के लिए यह हादसा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में Infrastructure और Disaster Preparedness को लेकर बड़ी चेतावनी भी है। फिलहाल Nepal और Tibet में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार Search Operation चला रहे हैं। कुछ लोगों के कई दिनों बाद जिंदा मिलने से उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन 5,500 से ज्यादा लोगों का अब भी लापता होना इस आपदा की भयावहता को बयां करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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