अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के कुलपति शिवदयाल पांडे को पद से हटाने की मांग की है। परिषद ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया है।
मानसिक उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव के आरोप
ABVP का कहना है कि कुलपति पर मानसिक उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। परिषद के मुताबिक विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से मर्यादित और निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे आरोप उच्च शिक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया
परिषद के अनुसार छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुलपति के आचरण को अव्यावसायिक और पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपों को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया है।
राज्यपाल से की गई कार्रवाई की मांग
ABVP ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। परिषद ने उन्हें पद से हटाने के साथ ही विश्वविद्यालय में महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है।
छात्र नेताओं ने उठाए सवाल
प्रदेश सहमंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा कि जब जांच समिति गंभीर आरोपों की पुष्टि कर चुकी है, तो विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। वहीं जिला संयोजक रूपेश कुर्रे ने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के भी केंद्र होते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
कुम्हारी-पाटन भाग संयोजक डे साहब साहू ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिला सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
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