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सीजफायर के बीच America का Iran पर बड़ा हमला, 80 से ज्यादा ठिकाने बने निशाना

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America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सीजफायर लागू होने के बावजूद अमेरिका ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इस हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।

हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी तक हमलों में हुए नुकसान और हताहतों के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के दौरान इस तरह की सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे न केवल मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के कई देशों की सुरक्षा और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील कर रहा है। यदि यह तनाव आगे बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह तनाव शांत होगा या फिर क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष देखने को मिलेगा।

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Neha Pandey

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LAC

China के साथ LAC पर बड़ा कदम! Boundary Delimitation से क्या बदल सकता है सीमा विवाद?

India और China के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है LAC (Line of Actual Control) को लेकर चल रही बातचीत और Boundary Delimitation की दिशा में बढ़ते कदम। सवाल सीधा है—क्या भारत और चीन अब सीमा रेखा को नए सिरे से तय करने की तैयारी कर रहे हैं? फिलहाल इसका जवाब है—नहीं, अभी कोई नई सीमा रेखा तय नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत अब केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं रह गई है। सीमा के अंतिम समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिशें भी दिखाई दे रही हैं। 25वीं Special Representatives Meeting में क्या हुआ? 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर Special Representatives की 25वीं बैठक हुई। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत में हिस्सा लिया। बैठक में दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ Boundary Question के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और सीमा विवाद का ऐसा समाधान खोजने की बात कही, जो दोनों देशों को स्वीकार्य हो। यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी तनाव पैदा हुआ था। पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिश की गई है। Delimitation का मतलब क्या है? सीमा विवाद को समझने के लिए Delimitation और Demarcation का अंतर जानना जरूरी है। Delimitation में दोनों देश बातचीत और नक्शों के आधार पर यह तय करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा कहां होनी चाहिए। वहीं Demarcation का मतलब जमीन पर उस सीमा को चिन्हित करना होता है। इसलिए मौजूदा बातचीत को सीधे नई LAC बनाने की प्रक्रिया कहना सही नहीं होगा। अभी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान को लेकर बातचीत चल रही है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बातचीत? भारत की सबसे बड़ी चिंता LAC पर लंबे समय से बनी अस्पष्टता रही है। दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं कई बार पेट्रोलिंग के दौरान तनाव की वजह बनती रही हैं। यदि भविष्य में दोनों पक्ष किसी इलाके को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सीमा प्रबंधन पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो इससे सैनिकों के बीच टकराव की आशंका कम हो सकती है। हालिया बातचीत में communication mechanism मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। पूर्वी और मध्य सेक्टर में अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन और बैठक बिंदु बनाए जाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसका मकसद है कि सीमा पर किसी भी अप्रिय स्थिति में दोनों सेनाओं के अधिकारी सीधे संपर्क कर सकें। गलवान के बाद बदली तस्वीर भारत और चीन के रिश्तों में 2020 का गलवान संघर्ष एक बड़ा मोड़ साबित हुआ था। इसके बाद कई इलाकों में सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। अक्टूबर 2024 में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर बनी सहमति के बाद स्थिति को सामान्य करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इसके बाद नेताओं और अधिकारियों के बीच संवाद भी धीरे-धीरे बढ़ा। अब Boundary Delimitation को लेकर बातचीत आगे बढ़ना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों देश सीमा विवाद को केवल तत्काल तनाव के नजरिए से नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान के रूप में भी देखने की कोशिश कर रहे हैं। क्या जल्द खत्म होगा भारत-चीन Border Dispute? यह उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। भारत और चीन का सीमा विवाद कई दशक पुराना है और इसमें पश्चिमी, मध्य तथा पूर्वी सेक्टर से जुड़े जटिल मुद्दे शामिल हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रीय दावों और सुरक्षा हितों के बीच ऐसी जमीन तलाशें, जिस पर राजनीतिक सहमति बन सके। इसलिए आने वाले महीनों में असली नजर इस बात पर रहेगी कि बातचीत सिर्फ बैठकों और बयानों तक रहती है या किसी खास क्षेत्र में ground-level progress भी दिखाई देती है। आगे क्या उम्मीद? दोनों देशों ने Special Representatives के स्तर पर बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति जताई है। अगर संवाद का यह सिलसिला कायम रहता है और सीमा पर शांति बनी रहती है, तो भविष्य में बड़े समाधान की जमीन तैयार हो सकती है। फिलहाल सबसे व्यावहारिक उम्मीद यही है कि LAC पर स्पष्टता बढ़े, पेट्रोलिंग से जुड़े विवाद कम हों और दोनों देशों के बीच भरोसा धीरे-धीरे वापस आए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal-Tibet

Nepal-Tibet Flood: पहाड़ टूटा, नदी बनी काल; 165 मौतें, सैकड़ों अब भी लापता

नेपाल-तिब्बत (Nepal-Tibet) बॉर्डर पर आई विनाशकारी Flash Flood ने तबाही मचा दी है। ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और उसके बाद मलबे के साथ आई तेज बाढ़ ने कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं बहा दीं। नेपाल और तिब्बत में मृतकों का आंकड़ा 165 तक पहुंच गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। अचानक आई बाढ़ ने मचाई भारी तबाही नेपाल के रसुवा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बुधवार को अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। देखते ही देखते नदी का जलस्तर बढ़ा और कई इलाकों में पानी के साथ चट्टान और मिट्टी भी पहुंच गई। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखा गया। शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण में संकेत मिला कि ग्लेशियर के बर्फ और चट्टान वाले हिस्से के टूटने से पैदा हुए मलबे ने नदी के बहाव को बेहद खतरनाक बना दिया। 165 लोगों की मौत, लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ी ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 165 शव बरामद किए जा चुके हैं। दूसरी ओर, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर करीब 1,500 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों की ओर से जारी आंकड़ों में अंतर है और राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ संख्या बदल सकती है। तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी हालात गंभीर हैं। चीनी अधिकारियों के मुताबिक वहां 558 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारतीयों को लेकर भी बढ़ी चिंता इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल में लापता विदेशी नागरिकों की सूची में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निकले थे। तमिलनाडु और कोलकाता से गए श्रद्धालुओं के कुछ समूहों से भी संपर्क टूटने की खबर सामने आई है। कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 लोगों का एक समूह भी संपर्क से बाहर बताया गया है। Rescue Operation जारी, हेलिकॉप्टर से निकाले जा रहे लोग नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार Search and Rescue Operation चला रही हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण हेलिकॉप्टरों की मदद से लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। कई इलाकों में राहत सामग्री, भोजन और जरूरी सामान हेलिकॉप्टर के जरिए पहुंचाया जा रहा है। बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार खराब मौसम, मलबे और पहाड़ी इलाकों में दोबारा भूस्खलन का खतरा है। भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। भारत की ओर से मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की गई है। कई राज्यों ने अपने नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की है। फिर आ सकती है बाढ़, बढ़ी चिंता बचाव अभियान के बीच एक और खतरा विशेषज्ञों और अधिकारियों की चिंता बढ़ा रहा है। तिब्बत की ओर मलबे के कारण पानी का अवरोध बनने से अचानक दोबारा तेज बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। इसी वजह से राहत दलों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है। फिलहाल नेपाल-तिब्बत बॉर्डर का यह इलाका भारी तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान का केंद्र बना हुआ है। परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और रेस्क्यू टीमें मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले घंटों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े में बदलाव संभव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold-Silver

Gold-Silver Price Today: चांदी ₹2,299 उछली, सोना ₹610 सस्ता; जानें आज के ताजा भाव

सोने-चांदी (Gold-Silver) के बाजार में बुधवार, 26 अगस्त को तस्वीर थोड़ी अलग रही। जहां चांदी के भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली, वहीं सोना हल्का सस्ता हुआ। IBJA के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी ₹2,299 प्रति किलो उछलकर करीब ₹2.44 लाख प्रति किलो पहुंच गई। दूसरी ओर 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹610 की गिरावट आई और भाव करीब ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम रहा। Silver Price Today: चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार चांदी की कीमत में एक दिन में ₹2,299 की बढ़ोतरी ने बाजार का ध्यान खींचा है। 999 शुद्धता वाली चांदी अब करीब ₹2.44 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। साल की शुरुआत के मुकाबले भी चांदी महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को इसका भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था, जो अब बढ़कर लगभग ₹2.44 लाख हो गया है। यानी साल के दौरान करीब ₹14 हजार प्रति किलो की बढ़त देखने को मिली है। हालांकि, इस साल चांदी इससे भी कहीं ऊंचा स्तर देख चुकी है। 29 जनवरी 2026 को इसका भाव करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गया था। ऐसे में मौजूदा कीमत उस रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है। Gold Price Today: ₹610 की गिरावट से राहत चांदी के उलट सोने में बुधवार को नरमी रही। 24 कैरेट सोने का भाव ₹610 घटकर करीब ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम रह गया। लेकिन एक दिन की गिरावट के बावजूद सोना इस साल की शुरुआत की तुलना में काफी महंगा है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.33 लाख थी। मौजूदा भाव करीब ₹1.61 लाख होने का मतलब है कि 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹29 हजार की बढ़ोतरी हो चुकी है। आखिर क्यों बदल रहे हैं Gold-Silver Rates? सोने-चांदी की कीमतों पर सिर्फ घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद, महंगाई और वैश्विक तनाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को सोने में करीब 0.6% की गिरावट दर्ज हुई। निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आगामी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर है। यही वजह है कि बुलियन मार्केट में एक दिन तेजी तो दूसरे दिन गिरावट देखने को मिल सकती है। इस साल Gold ने भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड सोना भी 2026 में कई बार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी को सोने का भाव करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले महीनों में कीमती धातुओं में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि किसी भी अनुमान को निश्चित कीमत नहीं माना जा सकता। Jewellery खरीदने वालों के लिए जरूरी बात यहां बताए गए भाव बुलियन/IBJA के indicative rates हैं। ज्वेलरी खरीदते समय दुकान पर मिलने वाला अंतिम बिल अलग हो सकता है। इसमें सोने की purity के अलावा GST, making charges और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं। IBJA के प्रकाशित रेट भी GST और making charges से अलग होते हैं। इसलिए अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो दुकान पर भुगतान करने से पहले purity, प्रति ग्राम भाव, making charges और GST का पूरा हिसाब जरूर देख लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: भोटेकोशी नदी बनी काल, पुल और गाड़ियां बहीं; 9 पुलिसकर्मियों की तलाश जारी

नेपाल (Nepal) के रसुवा जिले से आई तस्वीरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तिब्बत की ओर से अचानक आए तेज पानी ने भोटेकोशी नदी का रुख बेहद खतरनाक कर दिया। देखते ही देखते नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया और टिमुरे समेत कई जगहों पर भारी नुकसान की खबर सामने आई है। इस हादसे में टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट पर तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक बढ़ा भोटेकोशी नदी का जलस्तर बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बहाव आया। स्थानीय स्तर पर हालात इतने तेजी से बदले कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में तेजी से फैल गया। बाढ़ के कारण टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में पानी और मलबा पहुंच गया। कई वाहन इसकी चपेट में आए हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी रही, क्योंकि कुछ ही समय में सामान्य नदी का बहाव खतरनाक सैलाब में बदल गया। 9 पुलिसकर्मी हुए लापता इस बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता 9 सशस्त्र पुलिसकर्मियों के लापता होने को लेकर है। ये जवान टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट में तैनात थे। बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने की वजह से स्थिति की पूरी जानकारी जुटाने में परेशानी आ रही है। अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि कुछ जवान सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हों और नेटवर्क नहीं होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा हो। तीन Police Posts को भी नुकसान बाढ़ का असर केवल आम आबादी तक सीमित नहीं रहा। टिमुरे एरिया पुलिस ऑफिस, स्याफ्रुबेसी पुलिस पोस्ट और रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है। तेज पानी के साथ मलबा आने से सड़क और आसपास के दूसरे बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है। कई जगहों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। पुल टूटा, गाड़ियां और सामान बहा भोटेकोशी नदी का बहाव इतना तेज था कि एक पुल के क्षतिग्रस्त होने और बहने की जानकारी सामने आई है। टिमुरे बाजार में कई वाहन भी बाढ़ के पानी की चपेट में आए। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बाढ़ की भयावहता साफ नजर आ रही है। बाजार और सड़क के आसपास पानी का तेज बहाव देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ ही देर में हालात कितने बिगड़ गए। Rescue Operation में जुटी Nepal Army हादसे के बाद नेपाल सरकार ने Rescue Operation तेज कर दिया है। Nepal Army, Armed Police Force और Nepal Police की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। बचाव अभियान में हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। सुरक्षा बलों का मुख्य फोकस लापता पुलिसकर्मियों की तलाश और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है। निचले इलाकों के लिए भी Alert भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ने की वजह से नदी किनारे बसे दूसरे इलाकों में भी खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और नालों के पास जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। बारिश से ज्यादा Tibet से आए पानी ने बढ़ाई मुश्किल? बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी में तिब्बत क्षेत्र में हुई भारी बारिश को अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नेपाल के रसुवा इलाके में हुई बारिश इस अचानक आई बाढ़ की पूरी वजह नहीं लगती। हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण और पानी के अचानक बढ़ने की स्थिति का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है। अभी कितना नुकसान हुआ, तस्वीर साफ नहीं फिलहाल बाढ़ से हुए कुल नुकसान और संभावित जनहानि का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है। प्रभावित इलाकों में संचार और सड़क संपर्क प्रभावित होने से प्रशासन को भी सही जानकारी जुटाने में समय लग रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लापता 9 पुलिसकर्मियों को लेकर है। राहत और बचाव दल लगातार Search Operation चला रहे हैं। आने वाले घंटों में बाढ़ से हुए नुकसान और लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rekha Gupta

Rekha Gupta का बड़ा तोहफा: Delhi Lakshmi Yojana में महिलाओं को हर महीने ₹2500, जानें Payment Date

रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली की महिलाओं के लिए जिस Lakshmi Yojana को लेकर काफी उम्मीदें थीं, उसे लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने जा रही है। हालांकि, पहली किस्त को लेकर पहले अलग-अलग तारीखों की चर्चा थी, लेकिन अब सरकार की ओर से भुगतान शुरू करने की तारीख 1 सितंबर 2026 बताई गई है। यानी जिन महिलाओं का आवेदन जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में सही पाया गया है, उन्हें जल्द ही इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो सकता है। 26 अगस्त से Approval Letter देने की शुरुआत सरकार की ओर से 26 अगस्त को योजना से जुड़े लाभार्थियों को Approval Letter देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए दिल्ली में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। इस पत्र का मतलब यह होगा कि संबंधित महिला का आवेदन तय प्रक्रिया के तहत मंजूर हो चुका है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए यह चरण काफी अहम माना जा रहा है। हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500 Delhi Lakshmi Yojana के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रावधान है। पूरे साल की रकम देखें तो यह सहायता ₹30,000 तक पहुंचती है। सरकार का कहना है कि योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए थोड़ी अतिरिक्त वित्तीय मदद मिल सके। इस योजना के लिए दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹5,110 करोड़ का प्रावधान किया है। कौन महिलाएं ले सकती हैं योजना का लाभ? योजना की घोषित शर्तों के मुताबिक, दिल्ली की 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाएं इसका लाभ ले सकती हैं। इसके साथ दिल्ली का निवासी होना और सरकार द्वारा तय आय संबंधी मानदंडों को पूरा करना जरूरी है। कुछ ऐसी श्रेणियां भी हैं जिन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। इसलिए सिर्फ उम्र पूरी होना ही पर्याप्त नहीं है। आवेदन की जांच के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित महिला योजना के लिए पात्र है या नहीं। रक्षाबंधन पर पहली किस्त की थी उम्मीद Lakshmi Yojana को लेकर शुरुआत में रक्षाबंधन के आसपास पहली किस्त आने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसी वजह से दिल्ली की बड़ी संख्या में महिलाएं भुगतान का इंतजार कर रही थीं। बाद में भुगतान की तारीख को लेकर बदलाव हुआ और अब 1 सितंबर 2026 से पहली किस्त जारी करने की तैयारी है। ऐसे में लाभार्थियों को पुरानी तारीखों के बजाय सरकार के ताजा अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। Delhi Lakshmi Yojana Status कैसे चेक करें? अगर आपने इस योजना के लिए आवेदन किया है तो अपने आवेदन का Status चेक करने के लिए दिल्ली सरकार के संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Status चेक करने का तरीका: ध्यान रखें कि OTP, बैंक PIN, ATM PIN या पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी माध्यमों पर भरोसा करें। महिलाओं के लिए क्यों खास है ₹2,500 की मदद? हर महीने मिलने वाली ₹2,500 की राशि भले ही किसी परिवार की पूरी आर्थिक जरूरत पूरी न करे, लेकिन घरेलू खर्चों में यह मददगार जरूर हो सकती है। खासकर उन महिलाओं के लिए जो आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भर हैं, नियमित सहायता का अपना महत्व है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 सितंबर से भुगतान कितनी तेजी से लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में इसी पर महिलाओं की नजर रहेगी। Delhi Lakshmi Yojana: एक नजर में जानकारी विवरण योजना का नाम Delhi Lakshmi Yojana लाभ ₹2,500 प्रति माह सालाना सहायता ₹30,000 तक आयु सीमा 21 से 60 वर्ष Approval Letter 26 अगस्त 2026 पहली किस्त 1 सितंबर 2026 से लाभार्थी पात्र दिल्ली निवासी महिलाएं जरूरी बात: योजना की पात्रता, किस्त और आवेदन Status से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए दिल्ली सरकार के आधिकारिक अपडेट को ही मानें। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट तारीखों या दावों पर भरोसा न करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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