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Israel

Israel Hamas War ट्रम्प का Peace Plan फेल, Gaza में फिर भड़की भीषण जंग

Israel और Hamas के बीच संघर्ष एक बार फिर भड़क गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में बना “Middle East Peace Plan” अब फेल साबित हो रहा है। इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ग़ाज़ा पट्टी में भारी एयरस्ट्राइक के आदेश दिए हैं, जिससे इलाके में हालात फिर बिगड़ गए हैं। Gaza में दोबारा शुरू हुई तबाही Hamas ने Israel की सीमा के पास कई रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इज़रायल ने ग़ाज़ा पर ज़ोरदार बमबारी की। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर Ceasefire तोड़ने का आरोप लगाया है। नेतन्याहू ने कहा — “हमास ने शांति का रास्ता छोड़ आतंक चुना है, अब उसे उसके कर्मों का परिणाम भुगतना होगा।” Trump Peace Plan क्यों हुआ नाकाम? ट्रम्प की यह योजना मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की कोशिश थी, लेकिन यह जमीन पर कारगर नहीं हो सकी।इस असफलता के पीछे कई बड़ी वजहें बताई जा रही हैं — इस कारण यह Peace Plan “कागज़ी शांति” बनकर रह गया। Arab देशों ने दिखाया सीमित सहयोग सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों ने ट्रम्प के प्लान को समर्थन दिया था, लेकिन उन्होंने ज़मीनी कदम नहीं उठाए। किसी ने शांति सेना नहीं भेजी और न ही आर्थिक मदद दी। इससे पूरी प्रक्रिया कमजोर पड़ गई। West Bank में भी बढ़ा तनाव ग़ाज़ा के अलावा वेस्ट बैंक में भी इज़रायली सेना और फ़िलिस्तीनी गुटों के बीच झड़पें जारी हैं। अब तक दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हो चुके हैं। इससे पूरे Middle East में instability बढ़ गई है। आगे की राह मुश्किल संयुक्त राष्ट्र (UN) और अमेरिका ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल हालात में सुधार के संकेत नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि — “जब तक राजनीतिक भरोसा और मानवीय संवाद नहीं बढ़ेगा, तब तक कोई भी Peace Deal टिक नहीं पाएगी।” Trump का Middle East Peace Plan अब इतिहास की एक और असफल कोशिश बन गया है। ग़ाज़ा में बढ़ता संघर्ष यह साबित करता है कि शांति केवल डिप्लोमेसी से नहीं, भरोसे से बनती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cyclone Montha

Cyclone Montha Landfall in Andhra Pradesh अब ओडिशा, एमपी और यूपी में भारी बारिश का खतरा

भारी तबाही मचाने वाला चक्रवाती तूफान Cyclone Montha मंगलवार शाम आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के तटीय इलाके में लैंडफॉल कर चुका है। काकीनाड़ा और कलिंगपट्टनम (Kakinada–Kalingapatnam) के बीच यह तूफान समुद्र तट से टकराया, जहां हवाओं की रफ्तार 90 से 110 km/h तक रही।भारत मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि Cyclone Montha अब कमजोर होकर “Cyclonic Storm” में तब्दील हो गया है, लेकिन इसके प्रभाव से Andhra, Odisha, Telangana, MP, UP और Rajasthan में भारी बारिश जारी है। Cyclone Montha Landfall के बाद स्थिति लैंडफॉल के बाद आंध्र प्रदेश के कई तटीय जिलों—पूर्वी गोदावरी, कृष्णा, पश्चिम गोदावरी और काकीनाड़ा—में बिजली आपूर्ति ठप है और पेड़ गिरने से सड़कों पर जाम लग गया।IMD ने कहा है कि तूफान के कमजोर पड़ने के बावजूद अगले 24 घंटे तक Heavy Rainfall और Thunderstorm का खतरा बना रहेगा। 1 की मौत, 40,000 से ज्यादा लोग शेल्टर में शिफ्ट आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के मकानगुडेम गांव में एक व्यक्ति की मौत तब हुई जब तेज़ हवाओं में पेड़ गिर गया।राज्य सरकार ने अब तक 40,000 से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों (Relief Camps) में पहुंचाया है।ओडिशा के गंजाम, गजपति, कोरापुट जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। Rain Alert: कई राज्यों में भारी बारिश Cyclone Montha का असर अब ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है।IMD ने चेतावनी दी है कि बुधवार और गुरुवार को इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) हो सकती है। किसानों को बड़ा नुकसान (Crop Damage Report) सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, Cyclone Montha से आंध्र प्रदेश में लगभग Power & Transport प्रभावित IMD Weather Update: अभी भी खतरा बरकरार IMD ने नए अपडेट में कहा है कि Cyclone Montha धीरे-धीरे कमजोर होकर Deep Depression में बदल सकता है, लेकिन इसके बाद भी कई राज्यों में बारिश और तूफान का असर रहेगा।Red Alert जारी किया गया है — Climate Change और Cyclone की बढ़ती आवृत्ति मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान की वजह से बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की संख्या और तीव्रता बढ़ी है।Cyclone Montha भी उसी का परिणाम है, जिसने कुछ ही घंटों में “Deep Depression” से “Severe Cyclone” का रूप ले लिया। Cyclone Montha ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत के तटीय इलाकों में आपदा प्रबंधन और Early Warning System को और मजबूत करने की जरूरत है।सरकारें राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन असली चुनौती अब फसलों के नुकसान और पुनर्वास की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सरकार

मोदी सरकार का बड़ा फैसला! Justice Ranjana Desai को सौंपी 8th Pay Commission की कमान

देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसके Terms of Reference (ToR) को भी हरी झंडी मिल गई है। Justice Ranjana Prakash Desai होंगी 8th Pay Commission की चेयरपर्सन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे इससे पहले Uniform Civil Code (UCC) कमेटी की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक समझ के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग में कुल तीन सदस्य होंगे —1️⃣ चेयरपर्सन (Chairperson)2️⃣ पार्ट-टाइम मेंबर (Part-time Member)3️⃣ मेंबर सेक्रेटरी (Member Secretary) 18 महीनों में रिपोर्ट, 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद कैबिनेट के फैसले के अनुसार, आयोग को अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर केंद्र सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में वेतन संरचना (Pay Structure), भत्तों (Allowances), बोनस और पेंशन सुधारों से जुड़ी सिफारिशें शामिल होंगी। सरकार की योजना है कि नई सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू की जाएं। 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को होगा फायदा 8th Pay Commission की सिफारिशों से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि कर्मचारियों के वेतन में 25% से 35% तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कर्मचारी संगठनों ने फैसले का स्वागत किया केंद्रीय कर्मचारी संघों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और खर्चों को देखते हुए वेतन में संशोधन जरूरी था। वहीं, कुछ आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा, लेकिन उपभोक्ता खर्च में वृद्धि से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। पिछले वेतन आयोगों की झलक वेतन आयोग लागू वर्ष चेयरपर्सन 6th Pay Commission 1 जनवरी 2006 Justice बी.एन. श्रीकृष्ण 7th Pay Commission 1 जनवरी 2016 Justice ए.के. माथुर 8th Pay Commission 1 जनवरी 2026 (संभावित) Justice रंजना प्रकाश देसाई हर 10 साल में केंद्र सरकार वेतन आयोग गठित करती है ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन-भत्तों की समीक्षा हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने से सरकारी खजाने पर बोझ तो बढ़ेगा, लेकिन मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता में सुधार आएगा। इससे Domestic Demand और Economic Growth दोनों को बल मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kenya

Kenya Air Tragedy मासीमारा जाते वक्त छोटा विमान गिरा, 12 लोगों की मौत की आशंका

Kenya से एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मासीमारा नेशनल रिजर्व (Maasai Mara National Reserve) के पास एक छोटे विमान के क्रैश होने की सूचना मिली है।रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान में 12 लोग सवार थे और सभी के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। हादसे में सवार ज्यादातर विदेशी पर्यटक बताए जा रहे हैं। हादसा कहां और कैसे हुआ यह दुखद घटना मंगलवार सुबह केन्या के क्वाले काउंटी (Kwale County) में हुई।विमान ने डियानी एयरस्ट्रिप (Diani Airstrip) से उड़ान भरी थी और उसका गंतव्य मासीमारा रिजर्व (Maasai Mara Reserve) था। उड़ान के कुछ समय बाद ही विमान का संपर्क टूट गया और बाद में पहाड़ी व घने जंगलों वाले क्षेत्र में उसका मलबा (Wreckage) बरामद किया गया। विमान में कौन सवार थे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान में 12 लोग (Passengers) सवार थे, जिनमें से अधिकांश पर्यटक थे।राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन (Search Operation) शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक किसी के जीवित बचने की खबर नहीं है। जांच में जुटी एजेंसियां Kenya सिविल एविएशन अथॉरिटी (Kenya Civil Aviation Authority – KCAA) ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि विमान दुर्घटना (Air Crash) की जांच शुरू कर दी गई है।फिलहाल हादसे की वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन तकनीकी खराबी (Technical Fault), मौसम की स्थिति (Bad Weather) या मानव त्रुटि जैसी संभावनाओं की जांच की जा रही है। अब तक क्या पता चला हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Rate

सोना हुआ सस्ता! Gold Rate Today 28 October 2025 में गिरावट चांदी के भाव भी गिरे

भारत में 28 अक्टूबर 2025, सोमवार को Gold Rate और Silver Rate में मामूली गिरावट देखने को मिली है। त्योहारी सीजन के बाद मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती के चलते कीमती धातुओं की चमक कुछ फीकी पड़ी है। आज का Gold Rate in India (सोने का रेट) देशभर में 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दामों में ₹100 से ₹250 तक की गिरावट दर्ज की गई है। 🔹 प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट सोना (₹/ग्राम) 22 कैरेट सोना (₹/ग्राम) दिल्ली ₹12,261 ₹11,230 मुंबई ₹12,240 ₹11,210 चेन्नई ₹12,310 ₹11,280 कोलकाता ₹12,230 ₹11,200 आज की Silver Price (चांदी का भाव) चांदी के रेट में भी गिरावट दर्ज की गई है। गिरावट के पीछे क्या है वजह? निवेशकों के लिए बड़ा मौका (Investment Opportunity) बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतरीन खरीदारी का समय है। नवंबर-दिसंबर में शादी का सीजन शुरू होते ही सोने की कीमतों में दोबारा तेजी आने की संभावना है। Gold Silver Price Today 28 October 2025 (भारत में सोना-चांदी का पूरा रेट) धातु कैरेट प्रति ग्राम/किलोग्राम कीमत सोना 24K ₹12,246/ग्राम सोना 22K ₹11,225/ग्राम सोना 18K ₹9,184/ग्राम चांदी — ₹1,54,900/किग्रा त्योहारी सीजन के बाद भले ही सोना-चांदी के दामों में थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन आने वाले समय में इनकी कीमतों में तेजी की उम्मीद है। अगर आप निवेश की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है थोड़ा-थोड़ा खरीदारी शुरू करने का। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amazon

Amazon Big Layoff 2025 AI Automation से हजारों कर्मचारियों की जाएगी नौकरी

टेक वर्ल्ड से बड़ी खबर सामने आई है। ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon अब अपने कॉर्पोरेट सेक्टर में AI-led restructuring के तहत करीब 30,000 कर्मचारियों की छंटनी (Layoffs) करने की तैयारी में है। यह कदम कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी job cuts में से एक माना जा रहा है। AI Technology के बढ़ते इस्तेमाल से घटेगी Workforce Amazon के CEO Andy Jassy ने हाल ही में अपने कर्मचारियों को भेजे आंतरिक संदेश में कहा कि कंपनी अब हर विभाग में Artificial Intelligence (AI) और Automation को तेजी से लागू कर रही है।उन्होंने कहा — “जैसे-जैसे AI हमारी प्रक्रियाओं का हिस्सा बनेगा, हमें अपने corporate workforce को lean बनाना होगा।” इसका सीधा मतलब है कि आने वाले महीनों में कंपनी में हजारों लोगों की नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। PXT Division में सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के अनुसार, छंटनी का सबसे बड़ा असर Amazon के PXT (People Experience and Technology) डिवीजन पर पड़ेगा, जो HR और भर्ती (Recruitment) से जुड़ा है।यहां लगभग 15% कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है। साथ ही Admin, Marketing और Support Departments में भी भारी कटौती की संभावना जताई जा रही है। Pandemic में बढ़ी हायरिंग अब बन गई बोझ कोविड-19 महामारी के दौरान अमेज़न ने ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लाखों कर्मचारियों की हायरिंग की थी।अब जबकि बाजार स्थिर हो चुका है और बिक्री की रफ्तार सामान्य हो गई है, कंपनी अपने खर्च घटाने (Cost Cutting) और Efficiency बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। AI Investment से बड़े बदलाव की तैयारी अमेज़न इस साल $100 Billion से अधिक निवेश AI, Machine Learning और Cloud Infrastructure में करने जा रही है।कंपनी का मानना है कि भविष्य में AI Tools की मदद से काम की Productivity कई गुना बढ़ाई जा सकती है, जिससे कम कर्मचारियों के साथ भी काम संभाला जा सकेगा। India में क्या असर दिखेगा? भले ही यह छंटनी मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के दफ्तरों में हो, लेकिन भारत की टेक और HR टीमों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।भारतीय विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में नई भर्तियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और AI-skilled professionals की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। Tech World में बढ़ रहा Layoffs Trend अमेज़न से पहले भी कई ग्लोबल कंपनियां जैसे Meta, Intel, Starbucks, Microsoft आदि ने भी AI Automation और Digital Transformation के चलते हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी।यह साफ संकेत है कि अब AI सिर्फ नया अवसर नहीं, बल्कि नौकरी के लिए चुनौती भी बन रहा है। Experts की सलाह – Skill Upgrade ही Solution Amazon Layoffs 2025 यह दिखाता है कि आने वाले समय में Artificial Intelligence कंपनियों के Hiring Structure को पूरी तरह बदल देगा।जो कर्मचारी समय रहते खुद को AI और Tech Skills से अपडेट कर लेंगे, वही भविष्य की job market में अपनी जगह बना पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jaipur

Jaipur Bus Accident मजदूरों से भरी Private Bus में दौड़ा करंट

राजस्थान के Jaipur जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह मजदूरों से भरी एक Private Bus अचानक High Voltage Electric Wire की चपेट में आ गई। कुछ ही सेकंड में Bus में करंट दौड़ गया, जिससे कई मजदूर झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। हादसा कैसे हुआ जानकारी के अनुसार, यह बस Jaipur से मजदूरों को लेकर पास के औद्योगिक इलाके की ओर जा रही थी। रास्ते में बस का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रहे High-Tension Electric Wire से टकरा गया। टकराते ही बस में ज़ोरदार करंट दौड़ गया और सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस के ऊपर रखे लोहे के पाइप बिजली के तार से छू गए, जिसके कारण करंट पूरे वाहन में फैल गया। Driver ने तुरंत बस रोकी, लेकिन तब तक कई मजदूर झुलस चुके थे। मौके पर अफरा-तफरी घटना के बाद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। पुलिस, बिजली विभाग और एंबुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। पहले भी हो चुके ऐसे हादसे Rajasthan में यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में बस बिजली के तार की चपेट में आई हो। इन हादसों के बावजूद कई इलाकों में बिजली के तार अब भी सड़क के बहुत पास हैं, जो किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकते हैं। प्रशासन की जांच शुरू जयपुर जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर इतने निचले स्तर पर हाई-वोल्टेज लाइन कैसे चल रही थी। वहीं, पुलिस ने बस चालक और मालिक से पूछताछ शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप – लापरवाही से गया हादसा घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने तारों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे मजदूरों की जान लेते रहेंगे। सुरक्षा को लेकर क्या कहना है विशेषज्ञों का सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और परिवहन विभाग दोनों को जॉइंट सेफ्टी ड्राइव चलानी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lukoil

Global Oil Market में हलचल Lukoil ने शुरू किया Assets बेचने का Mission

रूस की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी Lukoil ने एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने कहा है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां (International Assets) बेचने की तैयारी कर रही है। यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लगे अमेरिकी प्रतिबंधों (US Sanctions) की वजह से उठाया जा रहा है। इन प्रतिबंधों के कारण कंपनी का विदेशी कारोबार संभालना मुश्किल हो गया है। US Sanctions से बढ़ी मुश्किलें अमेरिका और यूरोप ने रूस की कई बड़ी तेल कंपनियों — जैसे Lukoil, Rosneft और Gazprom — पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इसके चलते रूस की कंपनियों को इंटरनेशनल लेन-देन, शिपिंग और बैंकिंग से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।Lukoil के कई प्रोजेक्ट्स अब वित्तीय बाधाओं (Financial Restrictions) और कानूनी अड़चनों की वजह से प्रभावित हो रहे हैं। Iraq और Bulgaria की प्रॉपर्टीज पर निगाह Lukoil के पास इराक (Iraq) के West Qurna-2 Oil Field में लगभग 75% हिस्सेदारी है। यह देश का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र माना जाता है।वहीं, बुल्गारिया (Bulgaria) में कंपनी की एक बड़ी Refinery है, जो दक्षिण-पूर्व यूरोप की सबसे अहम रिफाइनरियों में से एक है।रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इन दोनों विदेशी संपत्तियों को बेचने के लिए बातचीत शुरू कर चुकी है। संभावित खरीदारों से डील की प्रक्रिया रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Lukoil ने Investment Banks और Potential Buyers से संपर्क करना शुरू कर दिया है।हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-कौन सी संपत्तियां बेची जाएंगी या डील की वैल्यू क्या होगी, लेकिन यह तय है कि कंपनी अब अपने इंटरनेशनल बिजनेस को सीमित करने की दिशा में बढ़ रही है। रूस की Economy पर असर रूस की अर्थव्यवस्था में Oil & Gas Sector की हिस्सेदारी लगभग 40% है।अगर Lukoil जैसी बड़ी कंपनी अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां बेचती है, तो इससे Foreign Exchange Income और Government Revenue पर असर पड़ेगा।अमेरिका और यूरोपीय देशों का उद्देश्य यही है कि रूस की ऊर्जा से होने वाली आमदनी घटे और युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता कमज़ोर हो। Global Oil Market पर Impact Lukoil का यह कदम Global Crude Oil Market पर बड़ा असर डाल सकता है।अगर रूस की कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी कम होती है, तो Oil Supply Chain प्रभावित होगी और Oil Prices में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।भारत और एशिया के अन्य देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन देशों की ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से आने वाले तेल पर निर्भर है। Lukoil का यह फैसला सिर्फ बिजनेस स्ट्रैटेजी नहीं बल्कि Geo-Political Signal भी है। यह दिखाता है कि Western Sanctions का दबाव रूस की कंपनियों पर अब गहराई से असर डाल रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी कौन-कौन सी संपत्तियां बेचती है और इसका असर Global Energy Market पर कितना पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Montha

Cyclone Montha Impact आंध्र, ओडिशा, केरल में मचा हाहाकार North India में भी दिखेगा असर

IMD का बड़ा अलर्ट – Cyclone Montha आज करेगा Landfall भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि Cyclone Montha (साइक्लोन मोंथा) ने बंगाल की खाड़ी में रफ्तार पकड़ ली है और आज यानी 28 अक्टूबर 2025 की शाम या रात को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट (Kakinada Coast) से टकराएगा।तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।IMD ने आंध्र प्रदेश के 13 जिलों में Red Alert जारी किया है और लोगों को तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। आंध्र प्रदेश में Alert Mode – हजारों लोगों को किया गया Evacuate आंध्र प्रदेश सरकार ने पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। समुद्र तट के पास के जिलों — काकीनाडा, श्रीकाकुलम, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा — में तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई हैं। Odisha, Kerala और Tamil Nadu में Heavy Rain का अलर्ट साइक्लोन मोंथा का असर सिर्फ आंध्र तक सीमित नहीं रहेगा। Cyclone Montha का असर अब पहुंचेगा उत्तर भारत तक मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोन मोंथा के कमजोर पड़ने के बाद इसका असर मध्य भारत और उत्तर भारत (Central & North India) में देखने को मिलेगा। Government की तैयारी और Relief Work संभावित खतरे और सावधानियां Cyclone Montha से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले आंध्र प्रदेश: काकीनाडा, विशाखापट्टनम, श्रीकाकुलमओडिशा: गंजाम, गजपति, पुरी, कोरापुटकेरल: कोल्लम, त्रिशूर, तिरुवनंतपुरममध्य प्रदेश: जबलपुर, बालाघाटउत्तर प्रदेश: प्रयागराज, वाराणसीराजस्थान: कोटा, जयपुर IMD का Forecast: कब थमेगा मोंथा का असर? IMD के मुताबिक, Cyclone Montha मंगलवार रात को लैंडफॉल के बाद धीरे-धीरे कमजोर होकर डिप्रेशन में तब्दील हो जाएगा।लेकिन इसका असर 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा, जिससे देश के कई हिस्सों में ठंडी हवाएं और बारिश देखने को मिलेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

Election Commission का बड़ा फैसला 12 राज्यों में शुरू हुआ SIR Second Phase, Voter List होगी अपडेट

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने एक अहम फैसला लेते हुए देश के 12 राज्यों में Special Intensive Revision (SIR) का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। क्या है SIR (Special Intensive Revision)? SIR एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की पूरी जांच और सुधार किया जाता है। इसमें— इसका मुख्य उद्देश्य है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में सही ढंग से दर्ज हो, ताकि किसी का वोटिंग अधिकार प्रभावित न हो। किन 12 राज्यों में शुरू होगा दूसरा चरण चुनाव आयोग ने बताया कि दूसरे चरण की SIR प्रक्रिया 12 राज्यों में लागू की जाएगी। इन राज्यों में जिला और राज्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर बूथवार जांच करें और मतदाता सूची को अद्यतन करें। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर यह तय किया कि कहाँ पर सूची में सबसे अधिक सुधार की आवश्यकता है। आज रात से फ्रीज़ होगी मतदाता सूची Election Commission ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 12 राज्यों में यह प्रक्रिया लागू हो रही है, वहाँ आज रात से voter list freeze कर दी जाएगी। यानी इसके बाद कोई नया नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकेगा। यह प्रक्रिया सूची को स्थिर और प्रमाणिक बनाए रखने के लिए की जा रही है। क्यों ज़रूरी है SIR प्रक्रिया SIR का उद्देश्य केवल तकनीकी सुधार नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। अक्सर मतदाता सूचियों में कई त्रुटियाँ पाई जाती हैं जैसे कि— ऐसी त्रुटियाँ चुनाव की सटीकता और विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, इसलिए SIR इन सबको सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका है। इतिहास: कब-कब हुई SIR प्रक्रिया भारत में 1951 से 2004 के बीच अब तक कुल 8 बार Special Intensive Revision की प्रक्रिया हो चुकी है। 2025 में यह नौवीं बार आयोजित की जा रही है, जो देशभर में मतदाता सूचियों की शुद्धता बढ़ाने का एक बड़ा अभियान है। पारदर्शी चुनावों की दिशा में मजबूत कदम Election Commission का यह फैसला आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग का लक्ष्य है कि 100% eligible voters को सूची में शामिल किया जाए और किसी भी गलत नाम को हटाया जाए। इस कदम से न केवल मतदान प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि जनता का विश्वास और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। Election Commission का यह कदम भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है। 12 राज्यों में शुरू हुई SIR की दूसरी चरण प्रक्रिया से voter list accuracy, transparency और public trust में सुधार आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

MP NEET Re-Exam Controversy: 30 Seconds Late Entry से छूटी परीक्षा, गेट पर रोते रहे छात्र

मध्य प्रदेश में NEET री-एग्जाम के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे परीक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिर्फ 30 सेकंड की देरी की वजह से कई छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला और उनकी परीक्षा छूट गई। गेट के बाहर घंटों तक रोते-बिलखते छात्र और परेशान परिजन प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन नियमों के आगे किसी की एक नहीं चली। Madhya Pradesh के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर यह मामला सामने आने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण और भावुक हो गया। 30 सेकंड की देरी बनी जिंदगी का बड़ा झटका रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ छात्र परीक्षा केंद्र पर तय समय से बेहद मामूली—सिर्फ 30 सेकंड—देरी से पहुंचे थे। लेकिन गेट पहले ही बंद कर दिया गया था। नियमों के अनुसार, एक बार प्रवेश बंद होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस सख्ती के चलते कई छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही लौटना पड़ा, जिससे उनका भविष्य और मानसिक स्थिति दोनों पर गहरा असर पड़ा है। गेट के बाहर दर्दनाक दृश्य, परिजनों की आखिरी कोशिश परीक्षा केंद्रों के बाहर जो दृश्य देखने को मिला, वह बेहद भावुक कर देने वाला था। छात्र गेट के सामने हाथ जोड़कर अंदर जाने की गुहार लगाते रहे। कई परिजन सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से आखिरी उम्मीद के साथ अनुरोध करते रहे। लेकिन परीक्षा नियमों की सख्ती के चलते किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं मिला। नंगे पैर परीक्षा और धार्मिक प्रतीकों पर विवाद कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें जूते-चप्पल उतारकर नंगे पैर परीक्षा हॉल में जाना पड़ा। वहीं कुछ मामलों में कलावा हटवाने जैसी बातें भी सामने आईं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई। इन घटनाओं ने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सख्त नियम या मानवीय दृष्टिकोण? शुरू हुई बहस इस घटना के बाद एक नई बहस तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में इतनी सख्ती जरूरी है या फिर कुछ मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियम अनिवार्य हैं। वहीं दूसरी ओर, अभिभावकों का कहना है कि इतनी छोटी सी देरी पर छात्रों का भविष्य दांव पर लगना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उठा तूफान यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है और नियमों में थोड़ी लचीलापन की मांग की है। वहीं कुछ लोग इसे परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
TMC

Mamata Banerjee की TMC को झटका: Minority Cell अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली All India Trinamool Congress (TMC) को अल्पसंख्यक सेल से जुड़ी एक अहम राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के Minority Cell के प्रदेश अध्यक्ष मोशरेफ हुसैन ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन में हलचल मचा दी है। यह कदम ऐसे समय आया है जब TMC पहले से ही कई स्तरों पर अंदरूनी असंतुलन और संगठनात्मक बदलावों से गुजर रही है। अचानक इस्तीफे से बढ़ी सियासी चर्चा मोशरेफ हुसैन के इस्तीफे की वजह को लेकर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यह फैसला लंबे समय से चल रहे अंदरूनी मतभेद और संगठनात्मक असंतोष का परिणाम हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, Minority Cell के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर खींचतान चल रही थी, जो धीरे-धीरे गंभीर होती चली गई। TMC के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? TMC की राजनीति में अल्पसंख्यक वोट बैंक हमेशा से एक मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इस सेल में आई दरार को पार्टी के लिए एक संवेदनशील संकेत माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के संभावित असर: पहले से चल रही अंदरूनी खींचतान पिछले कुछ समय से TMC के भीतर कई स्तरों पर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। विभिन्न प्रकोष्ठों में बदलाव और नेतृत्व को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में मोशरेफ हुसैन का इस्तीफा इस राजनीतिक घटनाक्रम को और गंभीर बनाता है। आगे क्या हो सकता है? अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi NEET Support: छात्रों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर मॉनिटरिंग

नई दिल्ली में NEET परीक्षा के दिन एक अहम और संवेदनशील स्थिति देखने को मिली, जब PM Modi ने छात्रों की सुविधा और समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर ही ट्रैवल व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। सूत्रों के मुताबिक, उस दिन एयर ट्रैवल और फ्लाइट संचालन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही थी, ताकि किसी भी NEET अभ्यर्थी को यात्रा में देरी या किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर रुककर पूरी स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से लगातार अपडेट लेते रहे। NEET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में देशभर से लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। कई उम्मीदवार दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं, ऐसे में समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना बेहद जरूरी होता है। छोटी सी देरी भी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। इसी वजह से प्रशासन ने एयरपोर्ट और ट्रैवल सिस्टम को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा। दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि फ्लाइट संचालन सामान्य रहे और किसी भी छात्र की यात्रा प्रभावित न हो। यात्रियों की सुविधा और परीक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए पूरी व्यवस्था को सक्रिय और सुचारू रखा गया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि बड़े एग्जाम के दौरान ट्रैवल मैनेजमेंट और सरकारी समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है। खासकर NEET जैसे एग्जाम में, जहां हर मिनट की कीमत होती है, वहां सही व्यवस्था छात्रों के लिए बड़ी राहत बनती है।
Tiruvallur

Tiruvallur Factory Accident: Ammonia Gas Leak से 65+ Workers प्रभावित, 6 गंभीर

तमिलनाडु के Tiruvallur में एक फैक्ट्री के अंदर हुए अमोनिया गैस लीक ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। अचानक हुए इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो गए, जबकि 6 वर्करों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सुबह की शिफ्ट के दौरान हुए इस हादसे ने कामकाज के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री के अंदर घबराहट फैल गई और लोग सुरक्षित बाहर निकलने के लिए दौड़ पड़े। कैसे हुआ यह हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री के एक तकनीकी यूनिट में Ammonia Gas Leakage हुआ। गैस जैसे ही फैलनी शुरू हुई, वहां मौजूद कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और कई कर्मचारी बेहोश होकर गिर पड़े। इसके बाद फैक्ट्री प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया। कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री बनी “खतरे का जोन” राहत और बचाव कार्य तेज हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू टीम और प्रशासन मौके पर पहुंचा और प्रभावित लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया। अस्पताल में भर्ती कई कर्मचारी अभी भी गैस के असर से उबर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इस घटना के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि अगर सुरक्षा सिस्टम मजबूत होते तो यह हादसा टल सकता था। लोग पूछ रहे हैं कि क्या: प्रशासन ने शुरू की जांच जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया की गहन जांच की जाएगी। अगर लापरवाही साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Murmu

MP Breaking: Jabalpur में राष्ट्रपति Murmu का दौरा, Yoga Event और Convocation में शामिल

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आज एक बेहद खास और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu अपने एक दिवसीय दौरे पर शहर पहुंचीं। उनका यह दौरा सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें योग, शिक्षा और सामाजिक संदेशों का मजबूत समावेश देखने को मिला। योग कार्यक्रम में दिखा उत्साह और एकता जबलपुर में आयोजित योग कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ हिस्सा लिया। खुले वातावरण में हुए इस कार्यक्रम में लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया और पूरे माहौल में सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। राष्ट्रपति ने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि यह शरीर के साथ-साथ मन को भी संतुलित और शांत रखता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह क्षण बेहद खास रहा, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति ने खुद योग कर एक मजबूत संदेश दिया कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है। RDVV दीक्षांत समारोह में छात्रों को मिला प्रेरणादायक संदेश इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मु ने Rani Durgavati Vishwavidyalaya के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यहां उन्होंने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें न केवल शिक्षा में बल्कि चरित्र निर्माण में भी आगे रहना चाहिए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। शिक्षा और स्वास्थ्य का मिला सुंदर संदेश पूरा दिन जबलपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण और यादगार बन गया, जहां एक ओर योग के माध्यम से स्वास्थ्य का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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