राजस्थान के Jaipur जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह मजदूरों से भरी एक Private Bus अचानक High Voltage Electric Wire की चपेट में आ गई। कुछ ही सेकंड में Bus में करंट दौड़ गया, जिससे कई मजदूर झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, यह बस Jaipur से मजदूरों को लेकर पास के औद्योगिक इलाके की ओर जा रही थी। रास्ते में बस का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रहे High-Tension Electric Wire से टकरा गया। टकराते ही बस में ज़ोरदार करंट दौड़ गया और सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस के ऊपर रखे लोहे के पाइप बिजली के तार से छू गए, जिसके कारण करंट पूरे वाहन में फैल गया। Driver ने तुरंत बस रोकी, लेकिन तब तक कई मजदूर झुलस चुके थे।
मौके पर अफरा-तफरी
घटना के बाद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। पुलिस, बिजली विभाग और एंबुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पहले भी हो चुके ऐसे हादसे Rajasthan में
यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में बस बिजली के तार की चपेट में आई हो।
- 2022 में जैसलमेर (Jaisalmer) में बस की छत पर बैठे यात्री हाई-वोल्टेज तार की चपेट में आने से तीन की मौत और कई घायल हुए थे।
- 2020 में जयपुर (Jaipur) में एक निजी बस बिजली के तार से टकराने के बाद आग की लपटों में घिर गई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत और छह घायल हुए थे।
इन हादसों के बावजूद कई इलाकों में बिजली के तार अब भी सड़क के बहुत पास हैं, जो किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकते हैं।
प्रशासन की जांच शुरू
जयपुर जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर इतने निचले स्तर पर हाई-वोल्टेज लाइन कैसे चल रही थी। वहीं, पुलिस ने बस चालक और मालिक से पूछताछ शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों का आरोप – लापरवाही से गया हादसा
घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने तारों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे मजदूरों की जान लेते रहेंगे।
सुरक्षा को लेकर क्या कहना है विशेषज्ञों का
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और परिवहन विभाग दोनों को जॉइंट सेफ्टी ड्राइव चलानी चाहिए।
- बसों की ऊंचाई और बिजली के तारों की दूरी का नियमित निरीक्षण किया जाए।
- गांव और औद्योगिक इलाकों में चलने वाली मजदूर बसों के लिए खास सुरक्षा गाइडलाइन बनाई जाए।
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