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Jaipur Bus Accident मजदूरों से भरी Private Bus में दौड़ा करंट

Table of Content

राजस्थान के Jaipur जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह मजदूरों से भरी एक Private Bus अचानक High Voltage Electric Wire की चपेट में आ गई। कुछ ही सेकंड में Bus में करंट दौड़ गया, जिससे कई मजदूर झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।

हादसा कैसे हुआ

जानकारी के अनुसार, यह बस Jaipur से मजदूरों को लेकर पास के औद्योगिक इलाके की ओर जा रही थी। रास्ते में बस का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रहे High-Tension Electric Wire से टकरा गया। टकराते ही बस में ज़ोरदार करंट दौड़ गया और सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस के ऊपर रखे लोहे के पाइप बिजली के तार से छू गए, जिसके कारण करंट पूरे वाहन में फैल गया। Driver ने तुरंत बस रोकी, लेकिन तब तक कई मजदूर झुलस चुके थे।

मौके पर अफरा-तफरी

घटना के बाद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। पुलिस, बिजली विभाग और एंबुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पहले भी हो चुके ऐसे हादसे Rajasthan में

यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में बस बिजली के तार की चपेट में आई हो।

  • 2022 में जैसलमेर (Jaisalmer) में बस की छत पर बैठे यात्री हाई-वोल्टेज तार की चपेट में आने से तीन की मौत और कई घायल हुए थे।
  • 2020 में जयपुर (Jaipur) में एक निजी बस बिजली के तार से टकराने के बाद आग की लपटों में घिर गई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत और छह घायल हुए थे।

इन हादसों के बावजूद कई इलाकों में बिजली के तार अब भी सड़क के बहुत पास हैं, जो किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकते हैं।

प्रशासन की जांच शुरू

जयपुर जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर इतने निचले स्तर पर हाई-वोल्टेज लाइन कैसे चल रही थी। वहीं, पुलिस ने बस चालक और मालिक से पूछताछ शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों का आरोप – लापरवाही से गया हादसा

घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने तारों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे मजदूरों की जान लेते रहेंगे।

सुरक्षा को लेकर क्या कहना है विशेषज्ञों का

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और परिवहन विभाग दोनों को जॉइंट सेफ्टी ड्राइव चलानी चाहिए।

  • बसों की ऊंचाई और बिजली के तारों की दूरी का नियमित निरीक्षण किया जाए।
  • गांव और औद्योगिक इलाकों में चलने वाली मजदूर बसों के लिए खास सुरक्षा गाइडलाइन बनाई जाए।

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Yukta

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ODI Rankings

India फिर बना ODI Rankings का King, 3 साल से Top पर; New Zealand दे रहा चुनौती

वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया (Team India) का दबदबा लगातार बना हुआ है। ICC Men’s ODI Rankings में भारत ने एक बार फिर नंबर-1 की कुर्सी संभाल रखी है। खास बात यह है कि सितंबर 2023 में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद से भारतीय टीम ने अपनी स्थिति लगातार मजबूत रखी है। मौजूदा ICC रैंकिंग में भारत के बाद न्यूजीलैंड दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर है। 2023 में पाकिस्तान को पीछे छोड़कर India बना था नंबर-1 सितंबर 2023 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ते हुए ODI Rankings में पहला स्थान हासिल किया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली वनडे में जीत के बाद भारत 116 रेटिंग पॉइंट्स के साथ टॉप पर पहुंचा था, जबकि पाकिस्तान 115 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर था। इसके बाद इंदौर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे वनडे में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत ने टीम इंडिया की नंबर-1 रैंकिंग को और मजबूत कर दिया था। उस दौर में भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि टीम टेस्ट, ODI और T20I—तीनों फॉर्मेट की ICC Rankings में नंबर-1 बनी थी। 2026 में भी Top पर Team India समय बदला, टीम में बदलाव हुए और कई बड़े मुकाबले आए, लेकिन ODI Rankings में भारत की स्थिति नहीं बदली। ICC के मई 2026 के वार्षिक अपडेट में भारत 118 रेटिंग पॉइंट्स के साथ पहले स्थान पर था। न्यूजीलैंड 113 अंकों के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 109 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर था। यानी टॉप पर भारत और उसके पीछे न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है। आने वाली वनडे सीरीज में टीमों के प्रदर्शन से रैंकिंग में बदलाव की संभावना बनी रहेगी। New Zealand बना रहा है सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड ने भी पिछले कुछ समय में वनडे क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है। ICC की मौजूदा टीम रैंकिंग में वह दूसरे स्थान पर है और उसके 109 रेटिंग पॉइंट्स हैं। भारत और न्यूजीलैंड की टक्कर सिर्फ टीम रैंकिंग तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों की व्यक्तिगत Rankings में भी दोनों टीमों के सितारे लगातार आगे बढ़ रहे हैं। जुलाई 2026 की ICC अपडेट में भारत के शुभमन गिल, विराट कोहली और रोहित शर्मा ODI Batting Rankings में टॉप पोजिशन के करीब पहुंच रहे थे। India की असली ताकत है consistency वनडे में नंबर-1 बनना एक बात है, लेकिन इतने लंबे समय तक उस स्थान पर बने रहना अलग उपलब्धि है। भारत की मौजूदा स्थिति बताती है कि टीम ने अलग-अलग दौर और परिस्थितियों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल जीत भी भारतीय क्रिकेट के हालिया शानदार दौर का हिस्सा रही है। ICC के 2026 वार्षिक अपडेट में भी भारत को ODI Rankings में शीर्ष स्थान मिला हुआ था। अब नजर नंबर-1 की कुर्सी बचाने पर टीम इंडिया के सामने अब चुनौती सिर्फ टॉप पर पहुंचने की नहीं, बल्कि इस जगह को बनाए रखने की है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें लगातार चुनौती दे रही हैं। ऐसे में आने वाले ODI मुकाबले भारत की रैंकिंग के लिहाज से काफी अहम होंगे। फिलहाल तस्वीर साफ है—Team India ICC ODI Rankings में नंबर-1 है और New Zealand दूसरे स्थान पर। सितंबर 2023 में शुरू हुई भारत की यह बादशाहत करीब तीन साल बाद भी कायम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Russia Su-57

Russia Su-57 Deal: भारत की नजर 75 Stealth Fighter Jets पर, Modi-Putin Talks से बढ़ी उम्मीद

भारत और रूस के बीच Defence Partnership को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रूस के Su-57 Stealth Fighter Jet को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक भारत करीब 75 Su-57 Fighter Jets लेने के विकल्प पर विचार कर सकता है। संभावित सौदे की कीमत करीब ₹1 लाख करोड़ तक बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक 75 विमानों की खरीद और इतनी रकम की डील को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बातचीत के दौरान Defence Cooperation के साथ Su-57 की बिक्री और Technology Transfer पर भी चर्चा हो सकती है। Su-57 Deal पर क्यों टिकी हैं नजरें? भारत लंबे समय से अपनी Air Force की combat capability को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस का पांचवीं पीढ़ी का Su-57 Fighter Jet चर्चा में आना स्वाभाविक है। रूस की ओर से भारत को सिर्फ तैयार विमान देने के बजाय Technology Transfer और स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जुड़े विकल्पों पर भी बातचीत के संकेत मिले हैं। अगर इस दिशा में कोई समझौता होता है, तो इसका फायदा भारत के Defence Manufacturing Sector को मिल सकता है। 75 Fighter Jets की खबर कितनी सही? सबसे ज्यादा चर्चा 75 Su-57 Jets की संभावित खरीद को लेकर है। कुछ रिपोर्टों में इसकी अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ तक बताई गई है। लेकिन फिलहाल इसे पक्की Deal मानना सही नहीं होगा। रूस ने Su-57 की बिक्री और तकनीकी सहयोग को लेकर भारत के साथ बातचीत की बात जरूर कही है, लेकिन विमानों की अंतिम संख्या, कीमत और खरीद की शर्तों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। यानी अभी कहानी बातचीत के दौर में है और आगे की तस्वीर दोनों देशों की बैठक के बाद ज्यादा साफ हो सकती है। Technology Transfer पर भारत का जोर भारत की Defence Procurement Policy में अब केवल विदेशी हथियार खरीदना ही मुख्य लक्ष्य नहीं है। देश की कोशिश है कि बड़े Defence Deals के साथ तकनीक और Manufacturing Capability भी भारत आए। Su-57 के मामले में भी Technology Transfer का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है। अगर रूस भारत में इस विमान से जुड़ी तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहयोग करता है, तो इससे भारतीय Aerospace Industry को लंबी अवधि में फायदा हो सकता है। Su-57 कितना खास है? Su-57 रूस का Fifth Generation Fighter Aircraft है। इसे आधुनिक एवियोनिक्स, स्टील्थ डिजाइन, सेंसर और लंबी दूरी की युद्ध क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के Fighter Aircraft की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना आने वाले वर्षों में अपने Fighter Squadron को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही भारत का अपना AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft Programme भी आगे बढ़ रहा है। मोदी-पुतिन Meeting पर सबकी नजर Su-57 के अलावा भारत और रूस की बातचीत का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। Defence Cooperation, Nuclear Energy, Trade और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में अगर Su-57 को लेकर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो यह भारत-रूस Defence Relations के लिए अहम पड़ाव साबित हो सकता है। भारत के लिए क्या बदल सकता है? अगर भविष्य में Su-57 की खरीद और Technology Transfer पर सहमति बनती है, तो भारत को एक तरफ आधुनिक Fighter Aircraft मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर घरेलू Defence Manufacturing को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, अभी 75 Su-57 Jets और ₹1 लाख करोड़ की कीमत को संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही देखना बेहतर है। अंतिम फैसला होने तक इन आंकड़ों में बदलाव संभव है। फिलहाल नजरें मोदी-पुतिन की बैठक पर हैं। अगर बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है, तो Su-57 Deal भारत की Defence Strategy और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी दोनों के लिए बड़ी खबर बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली, IIT इंदौर की टीम ने शुरू की जांच

उज्जैन: सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा हटाया गया, लेकिन मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। जेसीबी और क्रेन की मदद से करीब 10 दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। लगातार कोशिशों के बाद अब प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद ली है। IIT इंदौर की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर विशेष उपकरणों से प्रतिमा और आसपास की जमीन की जांच की। टीम यह पता लगा रही है कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे या आसपास किस तरह की संरचना मौजूद है। IIT इंदौर की टीम ने करीब दो घंटे की जांच IIT इंदौर के विशेषज्ञों ने करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। विशेष उपकरणों के जरिए प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन की संरचना से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है। अब विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है या नहीं। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक, मंदिर के पंडित के आग्रह पर IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय की जाएगी। सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम सिंहस्थ की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क की चौड़ाई करीब 15 मीटर किए जाने की योजना है। इसी दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा था। प्रतिमा हटाने के लिए नगर निगम की टीम कटर और अन्य मशीनों के साथ पहुंची थी। हालांकि, भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि मशीनों या ज्यादा ताकत के इस्तेमाल से प्रतिमा को नुकसान पहुंच सकता है। इसके बाद मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों से प्रतिमा की जांच कराने की मांग की थी। पुरातत्व विशेषज्ञ के मुताबिक 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उनका कहना है कि पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था और संभव है कि खड़े हनुमान की प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित की गई हो। उनके मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की हो सकती है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल बनावट और भाव-भंगिमा भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। प्रतिमा नहीं हिली तो भक्तों ने माना भगवान का संकेत प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बावजूद उसके नहीं हिलने की खबर सोशल मीडिया तक पहुंच गई। इसके बाद स्थानीय श्रद्धालुओं, पुजारियों और हिंदू संगठनों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कई भक्त इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। प्रतिमा को हटाने के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं के बीच खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहे जाने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। बच्चों के इलाज से जुड़ी है धार्मिक मान्यता मंदिर के पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक, यहां लंबे समय से छोटे बच्चों को झाड़नी देने और ताबीज बांधने की परंपरा है। उनका दावा है कि इससे कई बच्चों को फायदा मिला है। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका लिवर ट्रांसप्लांट होना था। परिवार बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हर बार उसकी तबीयत बिगड़ जाती थी। इसके बाद परिवार मंदिर आया और बच्चे को भगवान का ताबीज बांधा गया। पुजारी के मुताबिक, इसके बाद बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया, जहां उसका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। यह पुजारी द्वारा बताई गई घटना और धार्मिक मान्यता है, इसे चिकित्सकीय रूप से मंदिर की प्रक्रिया का परिणाम प्रमाणित नहीं किया गया है। मुस्लिम परिवार भी मन्नत लेकर पहुंचते हैं स्थानीय भक्त शिवेंद्र तिवारी के मुताबिक, मंदिर में मुस्लिम समाज के परिवार भी मन्नत मांगने आते हैं। उनके अनुसार संतान प्राप्ति या बीमारी जैसी समस्याओं को लेकर भी लोग यहां पहुंचते हैं। फिलहाल प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने का फैसला विशेषज्ञ रिपोर्ट आने तक रोक दिया है। अब IIT इंदौर की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर MP के इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन, भोपाल में सड़क पर बैठे

भोपाल:  मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। राजधानी भोपाल में डॉक्टरों का सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे हैं। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हमीदिया अस्पताल में 12 बजे तक OPD बंद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। इस दौरान सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे किडनी और लिवर के मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया गया कि हमीदिया अस्पताल में बुधवार को सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि सामान्य दिनों में यहां 40 से ज्यादा ऑपरेशन किए जाते हैं। इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अस्पताल की नियमित व्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ा है। कमला पार्क के पास डॉक्टरों का प्रदर्शन भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने रास्ते को वन-वे कर दिया है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि आंदोलन के कारण आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। ‘मांग पूरी होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन’ इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही है। वहीं, डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के कारण प्रदर्शन के दौरान काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर उन्हें कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि सीनियर डॉक्टरों, साथी डॉक्टरों और भोपाल के स्थानीय लोगों की ओर से भी प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के लिए खाना भेजा जा रहा है। फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी है और सरकार के साथ बातचीत के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
Punjab

Punjab Employees Protest खत्म: DA, OPS समेत लंबित मांगों पर सरकार से Agreement

Punjab में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बन गई है। हड़ताल खत्म होने के साथ ही सरकारी दफ्तरों में कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारी लंबे समय से DA (Dearness Allowance) की लंबित किस्तों, वेतन से जुड़े बकाये और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे। इसी को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया था। सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति हड़ताल के दौरान कर्मचारियों और सरकार के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। कर्मचारियों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। वहीं सरकार ने भी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। बातचीत के बाद सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए Show Cause Notice और कार्रवाई से जुड़े कदम वापस लेने पर सहमति बनी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आंदोलन खत्म जरूर किया गया है, लेकिन उनकी सभी मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है। इन मुद्दों को लेकर सरकार के साथ आगे भी बातचीत जारी रहेगी। DA की मांग सबसे अहम पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ते यानी DA की लंबित किस्तों का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से DA की कई किस्तें बकाया हैं, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके साथ ही वेतन और भत्तों के बकाये का भुगतान भी कर्मचारी संगठनों की प्राथमिक मांगों में शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इन मामलों में जल्द स्पष्ट फैसला ले। Old Pension Scheme और दूसरी मांगें भी शामिल DA के अलावा कर्मचारी Old Pension Scheme (OPS), ACP योजना, वेतन विसंगतियों को दूर करने और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार के साथ लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब हड़ताल खत्म होने के बाद उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इन मामलों का समाधान निकलेगा। ‘No Work, No Pay’ को लेकर भी था विवाद हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से ‘No Work, No Pay’ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था। यानी जो कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहेंगे, उनके वेतन को लेकर कार्रवाई की जा सकती थी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद और बढ़ गया था। बाद में दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की दिशा में सहमति बनी। अब मुख्यमंत्री से बातचीत पर नजर हड़ताल खत्म होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के साथ होने वाली अगली बातचीत पर है। कर्मचारी संगठन DA, OPS और बाकी लंबित मांगों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने रखेंगे। फिलहाल आंदोलन खत्म होने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी विभागों में रुका हुआ काम फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। हालांकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर अंतिम फैसला आगामी बैठकों और सरकार के निर्णय के बाद ही साफ होगा। Punjab Employees Strike: आगे क्या? हड़ताल खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि DA की लंबित किस्तों, OPS और अन्य मांगों पर सरकार कब तक फैसला लेती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार बातचीत को आगे बढ़ाएगी और लंबे समय से लंबित मुद्दों का कोई व्यावहारिक समाधान निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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