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चीन बनाम अमेरिका EV स्टॉक वॉर

चीन बनाम अमेरिका EV स्टॉक वॉर: कौन आगे – BYD या टेस्ला?

दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दौड़ तेज हो गई है और चीन की BYD ने एलन मस्क की टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। BYD ने 2024 में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल कर लिया है, जिससे वह टेस्ला से आगे निकल गई है। आइए जानते हैं पूरा मामला! BYD बनाम टेस्ला: कौन आगे रेवेन्यू में? चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी BYD ने 2024 में 107.2 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 2023 से 29% ज्यादा है। वहीं, टेस्ला ने 97.7 अरब डॉलर का रेवेन्यू पोस्ट किया, जिससे वह BYD से पीछे रह गई। सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, BYD का नेट प्रॉफिट भी 2024 में 40.3 अरब युआन (5.6 अरब डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 34% ज्यादा है। इससे साफ है कि कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है। स्टॉक परफॉर्मेंस: BYD बनाम टेस्ला हालांकि टेस्ला EV बाजार में बड़ा नाम है, लेकिन स्टॉक परफॉर्मेंस के मामले में BYD ने उसे पीछे छोड़ दिया है। BYD के शेयर हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज (HKG) और शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंज (SHE) पर लिस्टेड हैं, जबकि टेस्ला नैस्डैक (USA) पर ट्रेड होती है। BYD की गेम-चेंजिंग बैटरी टेक्नोलॉजी BYD के तेजी से बढ़ने की एक बड़ी वजह उसकी नई बैटरी टेक्नोलॉजी है। कंपनी ने ऐसी बैटरी पेश की है जो सिर्फ 5 मिनट की चार्जिंग में 470 किमी (292 मील) तक की रेंज दे सकती है! इस नई बैटरी और चार्जिंग सिस्टम की स्पीड 1,000 kW है, जो कि टेस्ला के सुपरचार्जर (500 kW) से दोगुनी तेज है। यह EV इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और BYD को EV मार्केट का बादशाह बना सकता है। निष्कर्ष: क्या टेस्ला वापसी कर पाएगी? एलन मस्क की टेस्ला अब भी EV इंडस्ट्री की बड़ी कंपनी है, लेकिन BYD तेजी से आगे बढ़ रही है। रेवेन्यू, स्टॉक परफॉर्मेंस और बैटरी टेक्नोलॉजी के मामले में BYD ने बढ़त बना ली है। अब सवाल यह है – क्या टेस्ला वापसी कर पाएगी या BYD EV मार्केट पर राज करेगा?
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Telegram

Telegram Controversy: सरकार बोली- आतंकी नेटवर्क के लिए आसान माध्यम बनता जा रहा ऐप

लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप Telegram एक बार फिर कानूनी और सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दावा किया कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई मामलों में आतंकी गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रचार और अवैध नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से कहा कि Telegram धीरे-धीरे ऐसे तत्वों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माध्यम बनता जा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा? सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि Telegram के कुछ फीचर्स, खासकर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और बड़े पैमाने पर संचालित चैनल, सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई बार जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे संवेदनशील मामलों की जांच प्रभावित होती है। केंद्र ने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन जब उसी तकनीक का उपयोग कानून-विरोधी गतिविधियों के लिए होने लगे तो सरकार का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता सरकारी पक्ष के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें Telegram का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ आतंकी और आपराधिक संगठन इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने और संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही और सहयोग की मांग करती रही हैं। प्राइवेसी बनाम सुरक्षा की बहस Telegram को दुनियाभर में सुरक्षित और निजी संवाद के लिए जाना जाता है। लाखों लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की बातचीत, बिजनेस और सूचना साझा करने के लिए करते हैं। लेकिन जब किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की खबरें सामने आती हैं, तो निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स की प्राइवेसी भी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा भी। इसलिए दोनों के बीच संतुलित समाधान निकालना सबसे बड़ी चुनौती है। आगे क्या होगा? हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और महत्वपूर्ण बहस हो सकती है। अदालत का फैसला सिर्फ Telegram तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

खेत में मोटर चालू करने गया किसान करंट की चपेट में आया, दर्दनाक मौत से गांव में मातम

गुना जिले के धरनावदा थाना क्षेत्र के ग्राम खेजराबाबा में एक दर्दनाक हादसे में किसान की करंट लगने से मौत हो गई। किसान रात में खेत पर सिंचाई के लिए मोटर चालू करने गया था, लेकिन बिजली के तार की चपेट में आने से उसकी जान चली गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय बनवारी सहरिया बुधवार रात अपने खेत में बने कुएं पर मोटर चालू करने गया था। इसी दौरान वह बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई और रातभर उसका शव खेत में ही पड़ा रहा। सुबह परिजनों को लगी घटना की जानकारी गुरुवार सुबह जब परिजन खेत पहुंचे तो उन्होंने बनवारी को जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ा देखा। परिजनों ने तुरंत बिजली की डोरी हटाई और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का सहारा था बनवारी बताया जा रहा है कि बनवारी सहरिया खेती-किसानी के साथ ऑटो चलाकर भी परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। अचानक हुई इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने पर धरनावदा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
NEET

NEET की दर्दनाक सच्चाई: 2 दिन में 4 मौतें, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी बहस

देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर बढ़ता मानसिक दबाव एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 48 घंटों में अलग-अलग राज्यों से सामने आए दर्दनाक मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए दर्दनाक मामले गुजरात में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। वहीं तमिलनाडु की एक छात्रा ने अपने आखिरी संदेश में दोबारा परीक्षा देने के डर और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। इसी दौरान अन्य राज्यों से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आए हैं, जिससे कुल मिलाकर दो दिनों में कम से कम चार छात्रों की मौत की स्थिति बनी है। परिवारों ने बताया— लंबे समय से था तनाव परिजनों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से NEET की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे तनाव में रहते थे, लेकिन खुलकर अपनी बात साझा नहीं कर पा रहे थे। विशेषज्ञों की चिंता: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। छात्रों के लिए समय रहते काउंसलिंग, भावनात्मक सपोर्ट और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है, ताकि वे दबाव को संभाल सकें। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और मार्क्स पर ही केंद्रित रह गई है? समाज के कई वर्ग अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए। देश में गहराता संकट और बढ़ती चिंता फिलहाल इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों को खो तो नहीं रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर फ्लायओवर पर चलती कार में लगी भीषण आग, चालक ने कूदकर बचाई जान

इंदौर के भंवरकुआ थाना क्षेत्र में गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती कार में अचानक आग लग गई। घटना अटल बिहारी कॉलेज के पास स्थित फ्लायओवर पर हुई। आग लगते ही चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते कार से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब 12:30 बजे धमेन्द्र गोयल अपनी कार से फ्लायओवर से गुजर रहे थे। इसी दौरान कार के बोनट से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया। स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोका और बाहर निकल गए। देखते ही देखते आग की चपेट में आई कार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही मिनटों में कार के अगले हिस्से से आग की लपटें उठने लगीं। आग तेजी से फैलती गई और देखते ही देखते पूरा वाहन धू-धू कर जलने लगा। फ्लायओवर पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। फायर ब्रिगेड ने पाया आग पर काबू घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। हालांकि दमकल कर्मियों के पहुंचने तक कार का बड़ा हिस्सा जल चुका था। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। यातायात प्रभावित, लगा जाम घटना की सूचना पर भंवरकुआ थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सुरक्षा कारणों से फ्लायओवर के एक हिस्से पर कुछ समय के लिए यातायात रोक दिया गया, जिससे आसपास हल्का जाम लग गया। आग बुझने और वाहन हटाने के बाद यातायात को फिर से सामान्य किया गया। तकनीकी खराबी की आशंका प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह वाहन में तकनीकी खराबी मानी जा रही है। हालांकि पुलिस और संबंधित विभाग वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कार पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गई। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Stock Market

Stock Market Rally: NSE ₹30,000 करोड़ IPO अपडेट से निवेशकों में जोश, PSU शेयरों में भारी खरीदारी

Stock Market में आज सुबह से ही अलग तरह की हलचल देखने को मिली। वजह थी NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के ₹30,000 करोड़ के संभावित IPO को लेकर आई बड़ी अपडेट। जैसे ही यह खबर सामने आई, बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई और कई जुड़े हुए शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली। कुछ स्टॉक्स तो दिन के कारोबार में करीब 14% तक उछल गए। NSE IPO को लेकर क्या है नई अपडेट? NSE ने अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) SEBI के पास दाखिल कर दिया है, जिसे IPO प्रक्रिया का सबसे अहम कदम माना जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह इश्यू करीब ₹30,000 करोड़ का हो सकता है, जो इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बना सकता है। खास बात यह है कि यह पूरा IPO Offer for Sale (OFS) होगा, यानी इसमें कंपनी को नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। शेयरों में क्यों आई 14% तक की तेजी? NSE IPO की खबर का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका NSE में निवेश या संबंध है। बाजार में “value unlocking” और listing excitement की वजह से खरीदारी बढ़ गई। मुख्य असर: कौन बेच रहा है हिस्सेदारी? इस मेगा IPO में कई बड़े सरकारी और संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं: LIC का अहम फैसला इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि LIC ने NSE में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का संकेत दिया है। इससे बाजार में यह संदेश गया कि NSE के लॉन्ग टर्म ग्रोथ को लेकर भरोसा मजबूत है। NSE IPO क्यों माना जा रहा है ऐतिहासिक? निवेशकों के लिए जरूरी बात हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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