मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पेयजल समस्या दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए पानी के टैंकर अब सवालों के घेरे में हैं। गांव में उपयोग के दौरान सांसद निधि से मिला एक टैंकर महज चार महीने में ही टूट गया। घटना के बाद टैंकर की गुणवत्ता और निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे हैं।
श्मशान घाट ले जाते समय टूटा टैंकर
मामला खंडवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बावड़ियांकाजी (ग्राम पंचायत सिरपुर) का है। यहां सांसद Gyaneshwar Patil निधि से फरवरी 2026 में एक पानी का टैंकर पंचायत को दिया गया था।
बताया जा रहा है कि गांव में एक अंत्येष्टि कार्यक्रम के दौरान टैंकर में पानी भरकर श्मशान घाट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में लॉकिंग एरिया के पास से टैंकर ट्रैक्टर से अलग होकर टूट गया। राहत की बात यह रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ।
कमजोर वेल्डिंग पर उठे सवाल
सरपंच प्रतिनिधि दीपक पटेल के अनुसार, टैंकर की वेल्डिंग बेहद कमजोर थी। अगर ढलान पर ट्रैक्टर पलट जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद तुरंत खंडवा से वेल्डर बुलाकर टैंकर की मरम्मत कराई गई। बाद में इसे दोबारा मजबूत वेल्डिंग के लिए खंडवा भेजा गया।
उन्होंने कहा कि नया टैंकर होने के बावजूद उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी, जिससे निर्माण कार्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विधायक के टैंकर में भी आई दिक्कत
दीपक पटेल ने बताया कि गांव को विधायक Kanchan Tanve की ओर से भी एक टैंकर मिला था। लेकिन उसकी हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है। महज तीन महीने में उसके टायर बदलवाने पड़े, जिस पर करीब 7 हजार रुपए खर्च हुए।
थर्ड पार्टी एजेंसी से होते हैं ऐसे काम
जानकारी के मुताबिक, सांसद और विधायक निधि की राशि जनहित कार्यों में खर्च की जाती है। सड़क, नाली जैसे निर्माण कार्य पंचायत सीधे करवाती है, लेकिन टैंकर और यात्री प्रतीक्षालय जैसे काम निजी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं।
पहले भी उठ चुका है ‘टैंकर भ्रष्टाचार’ का मुद्दा
मध्यप्रदेश में टैंकरों की खराब गुणवत्ता का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। 2019 लोकसभा चुनाव में मंदसौर संसदीय क्षेत्र में घटिया क्वालिटी के टैंकरों को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय सांसद Sudhir Gupta को लोग ‘टैंकर बाबू’ तक कहने लगे थे।
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