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सोना-चांदी ने बनाया ऑल टाइम हाई, कीमतों में जबरदस्त उछाल

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार (28 मार्च) को सोना-चांदी ने ऑल टाइम हाई बनाया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 747 रुपए बढ़कर 89,164 रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। इससे पहले 20 मार्च को सोने ने 88,761 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 1,117 रुपए बढ़कर 1,00,892 रुपए प्रति किलो हो गई। यह इसका नया ऑल टाईम हाई भी है। इससे पहले मंगलवार, 18 मार्च को चांदी का भाव ₹1,00,400 प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर था। कल यानी गुरुवार (27 मार्च) इसका दाम 99,775 रुपए था। सोने की कीमतें (28 मार्च 2025) प्योरिटी 27 मार्च 28 मार्च 24 कैरेट ₹88,417 ₹89,164 22 कैरेट ₹80,990 ₹81,674 18 कैरेट ₹66,313 ₹66,873 महानगरों में सोने की कीमतें (10 ग्राम) शहर 22 कैरेट (₹) 24 कैरेट (₹) दिल्ली 83,550 91,130 मुंबई 83,400 90,980 कोलकाता 83,400 90,980 चेन्नई 83,400 90,980 2025 में अब तक सोने-चांदी की कीमतों में वृद्धि तारीख सोने की कीमत (₹) चांदी की कीमत (₹) 1 जनवरी 76,162 86,017 28 मार्च 89,164 1,00,892 परिवर्तन +₹13,002 +₹14,875 कीमतों में उछाल का कारण: सोने और चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की कमजोरी और बढ़ती मांग के कारण हुई है। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश साधनों की ओर बढ़ा है, जिससे कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
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ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते

ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते? जानिए इस विवाद का सच

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिनमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाने का सुझाव दिया। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया। इस बयानबाजी के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि इस विवाद का क्या असर हो सकता है। ट्रंप ने दिया कनाडा को अमेरिका में शामिल करने का सुझाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका हर साल कनाडा को 100 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी देता है। इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि इससे दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा लाभ होंगे। ट्रूडो ने दिया करारा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सख्ती से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा हमेशा स्वतंत्र और संप्रभु रहेगा। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिका के अधीन नहीं जाएगा और अपनी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। क्या कनाडा ने अमेरिका से तोड़ दिए रिश्ते? हालांकि, इस बयानबाजी के बाद भी कनाडा और अमेरिका के बीच राजनयिक और व्यापारिक रिश्ते यथावत हैं। अभी तक दोनों देशों ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में तनाव जरूर बढ़ गया है। इस विवाद का असर क्या होगा? इस तरह के बयानों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रूडो सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विवाद और कितना गहराता है या फिर दोनों देश इसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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बाजार में कौन आगे? F&O में FIIs, DIIs या रिटेल निवेशक

बाजार में कौन आगे? F&O में FIIs, DIIs या रिटेल निवेशक

भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में विदेशी निवेशकों (FIIs), घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों की रणनीतियों पर सबकी नजर है। मार्च सीरीज के आखिरी दिन निफ्टी 1,047 अंकों की उछाल के साथ 23,592 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी और मिडकैप निफ्टी में भी क्रमश: 5.8% और 5.1% की तेजी रही। FIIs की बढ़ती खरीदारी – बाजार में तेजी का संकेत F&O डेटा के अनुसार, FIIs ने बीते 9 ट्रेडिंग सेशंस में ₹17,433.78 करोड़ की नेट खरीदारी की है। इसके अलावा, उन्होंने अपनी शॉर्ट पोजीशन में कटौती की है, जिससे बाजार में तेजी का संकेत मिल रहा है। DIIs और रिटेल निवेशकों की स्थिति कैसी? घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का भरोसा भी बाजार में मजबूत बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण – बाजार का अगला कदम क्या? तकनीकी चार्ट्स के अनुसार, निफ्टी को 200-दिनों की मूविंग एवरेज (EMA) से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। किन शेयरों में जोरदार मूवमेंट? तेजी वाले शेयर: बिकवाली दबाव वाले शेयर: निष्कर्ष – आगे क्या करें? बाजार में मजबूती बनी हुई है, खासकर FIIs और DIIs की बढ़ती खरीदारी इसे सपोर्ट दे रही है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में 24,000 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख सकता है। निवेशकों को समझदारी से ट्रेडिंग करनी चाहिए और 23,500 के स्तर को खरीदारी का अच्छा मौका मानना चाहिए। बाजार की हर हलचल पर नजर रखने के लिए जुड़े रहें Deshharpal के साथ!
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मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति अडानी दुसरे नम्बर पर

हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब बरकरार रखा है। वह विश्व स्तर पर 10वें स्थान पर हैं, उनकी संपत्ति में 40% की वृद्धि हुई है, जिससे उनकी कुल संपत्ति 11.5 अरब डॉलर हो गई है अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी 15वें स्थान पर हैं, जिनकी शुद्ध संपत्ति 86 अरब डॉलर है। उनकी संपत्ति में 33 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिसमें 2023 में उनकी कंपनियों के शेयरों में तेज सुधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है。 एचसीएल की रोशनी नाडार तीसरे स्थान पर हैं और भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों में इकलौती महिला हैं।​ हुरुन लिस्ट 2025 से जुड़ी प्रमुख बातें: इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में आर्थिक विकास के साथ-साथ अरबपतियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, जो देश की बढ़ती आर्थिक प्रमुखता को दर्शाता है।
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Vladimir Putin India Visit Update; PM Narendra Modi

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे, तैयारियां शुरू

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल भारत की यात्रा करेंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के दौरे की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस यात्रा की सटीक तारीख या महीने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लावरोव ने यह बयान ‘रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ समिट के दौरान दिया। इस बैठक का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (RIAC) द्वारा किया गया था। मोदी के रूस दौरे के बाद पुतिन भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की थी। अब हमारी बारी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 में दो बार रूस की यात्रा की थी। वह 22 अक्टूबर को BRICS समिट के लिए रूस गए थे। इससे पहले, जुलाई में भी उन्होंने रूस का दौरा किया था और इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का आमंत्रण दिया था। 2021 में आखिरी बार भारत आए थे पुतिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पिछली बार 6 दिसंबर 2021 को भारत का दौरा किया था। वह केवल चार घंटे के लिए भारत आए थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें सैन्य और तकनीकी समझौते भी शामिल थे। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद यह राष्ट्रपति पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 2030 तक के आर्थिक रोडमैप को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए इसे 100 अरब डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है। अरेस्ट वारंट के बाद अंतरराष्ट्रीय दौरे से बचते रहे पुतिन मार्च 2023 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। उन पर यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और जबरन डिपोर्टेशन के आरोप लगे थे। यह पहली बार था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के किसी स्थायी सदस्य देश के शीर्ष नेता के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। इस वारंट के बाद से पुतिन विदेश यात्राओं से बचते रहे हैं। वह 2023 में भारत में हुए G20 समिट में शामिल नहीं हुए थे और इस साल ब्राजील में हो रहे G20 समिट में भी हिस्सा नहीं लिया है। उनकी जगह दोनों सम्मेलनों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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IPL 2025: SRH बनाम LSG मुकाबला आज, क्या लखनऊ को मिलेगी लगातार दूसरी हार?

हैदराबाद के मैदान पर भिड़ेंगी SRH और LSG की टीमें आईपीएल 2025 का रोमांच अपने चरम पर है और आज यानी 27 मार्च को इस सीजन का 7वां मुकाबला खेला जाएगा। यह मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच होगा, जो हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में शाम 7:30 बजे शुरू होगा। दोनों ही टीमों के लिए यह सीजन का दूसरा मुकाबला है, लेकिन उनके प्रदर्शन में काफी अंतर रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद ने अपने पहले ही मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 286 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर धमाकेदार जीत दर्ज की थी। वहीं, लखनऊ सुपर जायंट्स ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 209 रन बनाने के बावजूद हार का सामना किया। ऐसे में SRH का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। SRH बनाम LSG: हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में कौन आगे? अगर हेड-टू-हेड रिकॉर्ड की बात करें, तो लखनऊ सुपर जायंट्स का पलड़ा भारी रहा है। अब तक दोनों टीमों के बीच 4 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से 3 बार LSG को जीत मिली, जबकि SRH को सिर्फ 1 जीत हासिल हुई है। हैदराबाद स्टेडियम के आंकड़े राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में अब तक 78 आईपीएल मुकाबले खेले जा चुके हैं। इस मैदान पर – कैसी होगी पिच? पिछले कुछ सालों में राजीव गांधी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल रही है। इस सीजन के पहले मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने इसी मैदान पर 286 रन बनाकर अपनी ताकत दिखाई थी। ऐसे में इस मैच में भी हाई-स्कोरिंग गेम की उम्मीद की जा रही है। संभावित प्लेइंग-11 और इम्पैक्ट प्लेयर सनराइजर्स हैदराबाद (SRH):ट्रेविस हेड, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, नीतीश कुमार रेड्डी, हेनरिक क्लासन, अनिकेत वर्मा, अभिनव मनोहर, पैट कमिंस (कप्तान), सिमरजीत सिंह, हर्षल पटेल, मोहम्मद शमी और एडम जैम्पा लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG):एडन मार्करम, मिचेल मार्श, निकोलस पूरन, ऋषभ पंत (कप्तान), डेविड मिलर, आयुष बडोनी, शाहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, रवि बिश्नोई, दिग्वेश राठी, मनिमारन सिद्धार्थ और आवेश खान क्या कहती है भविष्यवाणी? पिछले रिकॉर्ड और मौजूदा फॉर्म को देखें तो सनराइजर्स हैदराबाद की टीम काफी मजबूत नजर आ रही है। अगर लखनऊ को जीत हासिल करनी है, तो उसे अपनी गेंदबाजी में सुधार करना होगा। देखना दिलचस्प होगा कि क्या LSG इस मुकाबले में SRH को चुनौती दे पाती है या फिर हैदराबाद एक और बड़ी जीत दर्ज करता है।
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टैक्स घोटाला

₹250 करोड़ टैक्स घोटाला: WhatsApp- Google Maps से खुलासा, सीतारमण के बड़े खुलासे!

नई इनकम टैक्स बिल 2025: डिजिटल एविडेंस से नहीं बच पाएंगे टैक्स चोर देश में एक बड़ा टैक्स घोटाला सामने आया है, जिसमें ₹250 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। इस घोटाले को पकड़ने में WhatsApp चैट, Google Maps और Instagram जैसी डिजिटल तकनीकों ने अहम भूमिका निभाई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में Income Tax Bill 2025 पर चर्चा करते हुए बताया कि अब डिजिटल रिकॉर्ड को भी टैक्स जांच के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कसना और आसान होगा। WhatsApp और Google Maps से कैसे पकड़ा ₹250 करोड़ का काला धन? निर्मला सीतारमण ने बताया कि जांच एजेंसियों ने डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर टैक्स चोरों को बेनकाब किया। कुछ बड़े खुलासे: WhatsApp Chats – क्रिप्टो करेंसी से जुड़े लेन-देन की गुप्त चैट से ₹250 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ।Google Maps Location – अधिकारियों ने लोकेशन हिस्ट्री से संदिग्ध जगहों की पहचान की और वहां छिपे कैश को जब्त किया।Instagram Activity – सोशल मीडिया पर लक्जरी लाइफस्टाइल दिखाने वाले कई लोगों की बेनामी संपत्तियां जांच में पकड़ी गईं। Income Tax Bill 2025: टैक्स चोरी रोकने के लिए नया कानून 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया Income Tax Bill 2025 पुराने 1961 के कानून को हटाकर नए डिजिटल युग के अनुसार बनाया गया है। डिजिटल डेटा की जांच संभव होगी – अब टैक्स अधिकारी WhatsApp, Telegram, Emails, और बिजनेस सॉफ्टवेयर का डेटा भी देख सकेंगे। क्रिप्टोकरेंसी होगी कड़ी निगरानी में – अब Bitcoin, डिजिटल टोकन और क्रिप्टो संपत्तियां अघोषित आय मानी जाएंगी। टैक्स कानून होगा सरल और छोटा – पुराने 5.12 लाख शब्दों वाले कानून की जगह, नया बिल 2.6 लाख शब्दों का होगा। नया ‘टैक्स ईयर’ सिस्टम क्या है? इस बिल में नया टैक्स ईयर सिस्टम लाया गया है, जो ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘पिछला वित्त वर्ष’ जैसी जटिलताओं को खत्म कर देगा। उदाहरण के लिए, अगर आपने अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच कमाई की है, तो इसे सीधे टैक्स ईयर 2024-25 कहा जाएगा। यह बिल मानसून सत्र में चर्चा के बाद पास हो सकता है। अगर यह लागू हुआ, तो टैक्स चोरी के खिलाफ डिजिटल एविडेंस का इस्तेमाल और आसान हो जाएगा। अब टैक्स चोरों के लिए काले धन को छिपाना मुश्किल होगा! Deshharpal पर पढ़ते रहें देश-विदेश की ताज़ा खबरें!
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की

ज़ेलेंस्की को उम्मीद – अमेरिका रूसी मांगों के सामने मज़बूती से खड़ा रहेगा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका रूस की शर्तों के सामने झुकेगा नहीं और मजबूती से खड़ा रहेगा। रूस ने काला सागर में युद्धविराम के लिए शर्त रखी है कि पश्चिमी देश उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। रूस की नई शर्तें और ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया मंगलवार को रूस ने घोषणा की कि वह काला सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए युद्धविराम के लिए तैयार है। लेकिन उसने शर्त रखी कि पश्चिमी देश रूस के खाद्य और उर्वरक व्यापार से जुड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। ज़ेलेंस्की ने पेरिस में यूरोप के कई पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका रूसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका रूस की इन मांगों को मान सकता है, तो उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। भगवान करे, वे मजबूती से खड़े रहें। लेकिन देखना होगा कि आगे क्या होता है।” अमेरिका और यूरोप का जवाब व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच सऊदी अरब में तीन दिन की बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी है। लेकिन कुछ ही घंटे बाद क्रेमलिन ने बयान जारी कर कुछ शर्तें रख दीं। रूस ने मांग की है कि उसके कृषि व्यापार से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम SWIFT तक दोबारा पहुंच दी जाए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस अनुरोध पर विचार कर रही है। लेकिन यूरोपीय संघ (EU) ने साफ कर दिया कि जब तक रूसी सेना पूरी तरह यूक्रेनी सीमा से पीछे नहीं हटती, तब तक प्रतिबंधों को हटाने का सवाल ही नहीं उठता। अमेरिका में रूस के प्रभाव की चिंता ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे अमेरिकी समर्थन के लिए आभारी हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि कुछ लोग “रूसी प्रचार” के प्रभाव में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस के इन झूठे नैरेटिव्स को स्वीकार नहीं कर सकते।” जब उनसे पूछा गया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का रिश्ता उनके साथ ज्यादा अच्छा है या पुतिन के साथ, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता। यह कहना मुश्किल है। मैं नहीं जानता कि उनकी कितनी बार किससे बातचीत हुई है।” यूरोप की भूमिका और ट्रंप के दूत की टिप्पणी पिछले हफ्ते ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा था कि यूरोप द्वारा यूक्रेन की मदद के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” (इच्छुक देशों का गठबंधन) बनाने का प्रयास बेकार है। इस पर ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह इस पर जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकालेंगे। उन्होंने कहा, “जहां तक मैं जानता हूं, विटकॉफ़ को रियल एस्टेट खरीदने और बेचने का अच्छा अनुभव है, लेकिन यह मामला अलग है।” इतिहास में ज़ेलेंस्की की पहचान? बीबीसी ने ज़ेलेंस्की से पूछा कि भविष्य में इतिहास उन्हें कैसे याद करेगा – यूक्रेन को बचाने वाले नेता के रूप में या इसे गिरते देखने वाले व्यक्ति के रूप में? इस पर ज़ेलेंस्की ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि इतिहास की किताबों में मेरे बारे में क्या लिखा जाएगा। लेकिन मेरा मकसद यह नहीं है। मेरा लक्ष्य है – अपने देश की रक्षा करना और यह देखना कि मेरे बच्चे बिना किसी डर के अपनी सड़कों पर चल सकें।“ उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी आखिरी सांस तक यूक्रेन की रक्षा करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।” नाटो में यूक्रेन की एंट्री का मुद्दा ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का नाटो में शामिल होना गठबंधन को और मजबूत करेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यूक्रेन और रूस के बीच जंग अब भी जारी है, और ज़ेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका रूस की शर्तों को नहीं मानेगा। हालांकि, रूस का दबाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका की नीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। Deshharpal पर ताज़ा ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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सरकारी नौकरी: IRCTC में अप्रेंटिस भर्ती, ग्रेजुएट्स के लिए शानदार मौका! बिना एग्जाम के सीधा सिलेक्शन

सरकारी नौकरी: IRCTC में अप्रेंटिस भर्ती, ग्रेजुएट्स के लिए शानदार मौका! बिना एग्जाम के सीधा सिलेक्शन

अगर आप सरकारी नौकरी की तलाश में हैं, तो यह खबर आपके लिए है! भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने अप्रेंटिस पदों पर भर्ती निकाली है। इच्छुक उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.apprenticeshipindia.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। IRCTC अप्रेंटिस भर्ती 2025 – मुख्य जानकारी आयु सीमा: स्टाइपेंड (मासिक वेतन): कैसे करें आवेदन? 👉 [ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक] 👉 [ऑनलाइन आवेदन लिंक] अन्य सरकारी नौकरी भर्ती 2025 अपडेट 1. बिहार में 15,000 होमगार्ड पदों पर भर्ती 2. जामनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (गुजरात) में भर्ती (85 पद) सरकारी नौकरियों की ताज़ा अपडेट के लिए Deshharpal से जुड़े रहें!
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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