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Wall Street में भारी गिरावट

Wall Street में भारी गिरावट: Trump के tariff फैसले से Nasdaq bear market के करीब, $4 trillion का नुकसान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने के फैसले ने वॉल स्ट्रीट को हिला कर रख दिया है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंताएं और भी गहरी हो गई हैं। महज दो दिनों में अमेरिकी शेयर बाजारों से करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 334 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति का नुकसान हुआ है। Nasdaq बेयर मार्केट के करीब टेक कंपनियों से जुड़ा Nasdaq Composite इंडेक्स इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यह इंडेक्स लगभग 4.5% से अधिक गिर चुका है, जिससे यह बेयर मार्केट के करीब पहुंच गया है। Nasdaq की यह स्थिति 2020 में कोविड-19 के दौरान आई मंदी के बाद सबसे खराब मानी जा रही है। Dow Jones और S&P 500 भी लुढ़के Dow Jones Industrial Average और S&P 500 इंडेक्स में भी भारी गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। चीन ने दी जवाबी कार्रवाई, तनाव और गहरा ट्रंप के टैरिफ के जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर 34% तक आयात शुल्क लगा दिया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध और गहरा गया है, जिससे निवेशकों की बेचैनी और बढ़ गई है। मंदी का खतरा मंडराने लगा आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इन टैरिफ्स के चलते महंगाई बढ़ सकती है और इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी की स्थिति बन सकती है। इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी यह साफ कर दिया है कि ब्याज दरों में जल्द कोई राहत नहीं दी जाएगी, जिससे बाजार की गिरावट और तेज हो गई। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और जल्दबाज़ी में किसी भी प्रकार का बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। यह स्थिति अभी कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है।
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माँ महागौरी

नवरात्रि आठवें दिन

नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, जो शुद्धता और शांति की देवी मानी जाती हैं। उनकी कृपा से भक्तों के सभी दुःख दूर होते हैं और इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।माँ महागौरी का प्रिय रंग Purple है, जो गौरव और राजसी वैभव का प्रतीक है
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SBI

SBI में अफसर बनने का सुनहरा मौका! उम्र सीमा 55 साल, सैलरी ₹65,000 तक

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक बार फिर युवाओं और अनुभवी पेशेवरों के लिए शानदार अवसर पेश किया है। बैंक ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर (SCO) और रिव्यूअर पदों पर संविदा आधार पर नियुक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक उम्मीदवार SBI की आधिकारिक वेबसाइट sbi.co.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पदों का विवरण: शैक्षणिक योग्यता: महत्वपूर्ण तिथि: आयु सीमा: वेतनमान: आवेदन शुल्क: चयन प्रक्रिया: कैसे करें आवेदन:
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वेंकटेश अय्यर

कीमत से नहीं, प्रदर्शन से बनती है पहचान”: वेंकटेश अय्यर का बड़ा बयान

आईपीएल 2025 से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के स्टार ऑलराउंडर वेंकटेश अय्यर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार उनकी क्रिकेटिंग फॉर्म से ज़्यादा उनकी कीमत को लेकर बातें हो रही हैं। 23.75 करोड़ रुपये में रिटेन किए गए अय्यर का कहना है कि कीमत बड़ी हो सकती है, लेकिन असली फर्क उनके प्रदर्शन से पड़ेगा। “हर मैच में रन बनाना ज़रूरी नहीं, असर डालना ज़रूरी है” वेंकटेश अय्यर ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि भारी-भरकम रकम मिलने का यह मतलब नहीं कि हर मैच में उनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जाए। उन्होंने कहा: “मेरे लिए यह जरूरी नहीं कि हर मैच में रन बनाऊं। अगर मैं टीम के लिए अहम समय पर सही योगदान देता हूं, वही मेरे लिए असली सफलता है। आईपीएल में कीमत मायने नहीं रखती, योगदान मायने रखता है।” दबाव है, लेकिन उससे डरने की ज़रूरत नहीं अय्यर ने माना कि किसी भी खिलाड़ी पर मूल्यांकन का, चयन का या बल्लेबाजी क्रम का दबाव होता ही है। लेकिन एक पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर इसे संभालना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि: “दबाव हमेशा रहेगा, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उससे कैसे निपटते हैं। मैं मैदान पर सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं।” फ्रेंचाइज़ी का भरोसा और कप्तान का समर्थन केकेआर के नए कप्तान अजिंक्य रहाणे ने भी अय्यर का समर्थन करते हुए कहा कि वो इस रकम के पूरी तरह हकदार हैं। रहाणे के मुताबिक, वेंकटेश अय्यर ने कई बार फ्रेंचाइज़ी के लिए मैच जिताऊ प्रदर्शन किया है और वो टीम के लिए एक बड़ा संपत्ति हैं। अब तक का प्रदर्शन वेंकटेश अय्यर ने अपने आईपीएल करियर में अब तक 51 मैचों में 1,326 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 11 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा वह एक उपयोगी गेंदबाज़ भी हैं जो टीम को बैलेंस देते हैं। केकेआर की ओपनिंग भिड़ंत कोलकाता नाइट राइडर्स अपनी आईपीएल 2025 की शुरुआत 22 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के खिलाफ ईडन गार्डन्स में करेगा। फैंस को अय्यर से इस सीज़न में बड़े धमाके की उम्मीद है।
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सोना 3,200 डॉलर पार!

सोना 3,200 डॉलर पार! ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद रिकॉर्ड हाई, जानिए कीमतों में तेजी की वजह

गोल्ड ने फिर बनाया नया रिकॉर्ड! अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं। COMEX पर सोना $3,200 के पार निकल गया, जबकि MCX पर 91,423 रुपये तक चढ़ा। इस साल अब तक सोने में 20% की बढ़त दर्ज की गई है। क्यों बढ़ी सोने की कीमतें? गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा इन्वेस्टर्स तेजी से गोल्ड ETF में निवेश कर रहे हैं। पिछले 8 हफ्तों से लगातार इनफ्लो बना हुआ है, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। घरेलू और ग्लोबल बाजार में ताजा भाव क्या आगे भी बढ़ेगी कीमत? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेड वॉर, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महंगाई के चलते सोने की मांग बनी रहेगी। अगर फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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ICF चेन्नई का नया रिकॉर्ड

ICF चेन्नई का नया रिकॉर्ड: FY25 में 3000+ कोच तैयार, वंदे भारत, अमृत भारत और नामो भारत शामिल

भारतीय रेलवे ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3007 कोच तैयार किए हैं। यह संख्या पिछले साल के 2829 कोच की तुलना में ज्यादा है। इस रिकॉर्ड उत्पादन में वंदे भारत, अमृत भारत और अन्य आधुनिक कोच शामिल हैं। ICF की ऐतिहासिक उपलब्धि ICF भारतीय रेलवे की प्रमुख कोच निर्माण इकाई है। इस साल ICF ने कई नए मील के पत्थर हासिल किए हैं: 2024-25 में ICF द्वारा निर्मित कोचों की प्रमुख बातें 16-कार वंदे भारत स्लीपर रेक – पहली बार ICF ने 16-कार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का निर्माण किया है। यह ट्रेन जल्द ही सेवा में आएगी। 8 ट्रेजरी वैन कोच – रेलवे इतिहास में पहली बार ICF ने ट्रेजरी वैन कोच तैयार किए हैं। 12-कार नामो भारत रैपिड रेल – यह ट्रेन तेज और आरामदायक इंटरसिटी यात्रा के लिए बनाई गई है। यह वंदे भारत एक्सप्रेस का मिनी संस्करण है, जो क्षेत्रीय और शहरी यात्रियों के लिए बेहतरीन सुविधा प्रदान करता है। वंदे भारत चेयर कार ट्रेन का उत्पादन – ICF ने 21 रेक वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण किया है। वर्तमान में देशभर में 136 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। 2019 में शुरू हुई यह ट्रेन अब तक की सबसे तेज़ भारतीय ट्रेन बनी हुई है। अमृत भारत 2.0 ट्रेनें – लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए ICF ने अमृत भारत 2.0 ट्रेनों के लिए 4 रेक (प्रत्येक में 22 कोच) तैयार किए हैं। इन ट्रेनों में आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं। ICF का भविष्य ICF लगातार भारतीय रेलवे को नए और आधुनिक कोच उपलब्ध करवा रहा है। वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों के निर्माण से यात्री अनुभव बेहतर हो रहा है। आने वाले समय में और भी अत्याधुनिक ट्रेनें तैयार की जाएंगी।
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Donald Trump के 26% टैरिफ

Donald Trump के 26% टैरिफ से भारत को नुकसान या फायदा? सरकार कर रही है असर का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 26% अतिरिक्त टैरिफ (टैक्स) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। टैरिफ कब लागू होगा? टैरिफ दो चरणों में लागू होगा: भारत सरकार की रणनीति भारत सरकार ने पहले से ही इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर नजर बनाए रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया था। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि अभी बातचीत की गुंजाइश बाकी है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर कोई देश अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में राहत मिल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिशें भारत ने इस टैरिफ से छूट पाने के लिए पहले ही अमेरिका से बातचीत शुरू कर दी थी। इसी सिलसिले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका गए थे। दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, भारत पहले ही कुछ कदम उठा चुका है: डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भारत पर असर 2 अप्रैल को ट्रंप ने इस टैरिफ की घोषणा की और इसे “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “भारत हमसे 52% टैक्स लेता है, जो बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि यह सही नहीं है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर “डिस्काउंटेड” यानी रियायती टैरिफ लगाया है, जो 26% है। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। क्या होगा आगे?
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आरबीआई की नई डिप्टी गवर्नर बनीं पूनम गुप्ता

आरबीआई की नई डिप्टी गवर्नर बनीं पूनम गुप्ता, सरकार ने दी तीन साल की नियुक्ति

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को आखिरकार नया डिप्टी गवर्नर मिल गया है। सरकार ने पूनम गुप्ता को तीन साल के लिए आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है। पूनम गुप्ता इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की महानिदेशक थीं। डिप्टी गवर्नर का पद खाली था जनवरी 2024 में माइकल देबव्रत पात्रा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आरबीआई का एक डिप्टी गवर्नर पद खाली था। अब सरकार ने इस अहम पद के लिए पूनम गुप्ता को चुना, जो एक जानी-मानी अर्थशास्त्री हैं और कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी रही हैं। कौन हैं पूनम गुप्ता? मौद्रिक नीति समिति (MPC) में होंगी अहम सदस्य आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) में अब पूनम गुप्ता भी शामिल होंगी। यह समिति रेपो रेट और अन्य मौद्रिक नीतियों से जुड़े अहम फैसले लेती है। शैक्षिक योग्यता और उपलब्धियां अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या होगा असर?
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नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को दी कई सौगातें

नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को दी कई सौगातें, भोपाल, सागर, ग्वालियर और मुरैना को बड़ा तोहफा

मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य को नई सड़कों और बाईपास परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे यातायात सुगम होगा, ट्रैफिक जाम की समस्या दूर होगी और सफर का समय कम होगा। भोपाल, ग्वालियर, मुरैना और सागर सहित कई जिलों को इन प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। ग्वालियर-मुरैना को मिला एक्सेस कंट्रोल्ड बाईपास नितिन गडकरी ने ग्वालियर शहर के पश्चिमी हिस्से में 28.5 किमी लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4-लेन बाईपास को मंजूरी दी है। 1347.6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-46, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करेगी। इससे लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैफिक और माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, जिससे यात्रा समय कम होगा और सड़क यातायात सुगम बनेगा। सागर को भी बड़ी सौगात सागर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-146 पर लहदरा गांव जंक्शन से बेरखेड़ी गुरु गांव जंक्शन तक 20.2 किमी का ग्रीनफील्ड 4-लेन बाईपास बनाने के लिए 688.31 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। यह प्रोजेक्ट शहर के अंदर ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करेगा और यात्रा का समय कम करेगा। इसके अलावा, विदिशा और सागर जिले के राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक 10.08 किमी सड़क को 4-लेन बनाने के लिए 731.36 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। यह सड़क भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा होगी और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 व राष्ट्रीय राजमार्ग-346 को कनेक्ट करेगी। इससे राहतगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित और तेज़ यात्रा का लाभ मिलेगा। भोपाल के लिए 1535.66 करोड़ की परियोजना राजधानी भोपाल के संदलपुर से नसरुल्लागंज बाईपास तक राष्ट्रीय राजमार्ग-146B के 43.2 किमी हिस्से को 4-लेन में अपग्रेड करने के लिए 1535.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 को जोड़ने का काम करेगी। इससे भारी ट्रैफिक से राहत मिलेगी और सफर आसान होगा। MP को मिली बड़ी सौगात, नेताओं ने जताई खुशी मध्य प्रदेश के सांसदों और विधायकों ने हाल ही में नितिन गडकरी से नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने की मांग की थी। अब जब इन प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिल गई है, तो प्रदेश के नेताओं और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से मध्य प्रदेश में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को सुरक्षित एवं तेज़ सफर मिलेगा।
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चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन

चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति की प्रतीक हैं। उनकी उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। भक्त दीप जलाकर, भोग अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करते हैं। मंत्रोच्चारण और ध्यान से विशेष फल की प्राप्ति होती है।शुभ रंग -पीला रंग
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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